मुजफ्फरपुर में बाल विवाह के खिलाफ तीन दिवसीय अभियान शुरू:9 क्षेत्रों में नुक्कड़ नाटक; पंचायत, जीविका और C3 की संयुक्त पहल

मुजफ्फरपुर में बाल विवाह के खिलाफ तीन दिवसीय अभियान शुरू:9 क्षेत्रों में नुक्कड़ नाटक; पंचायत, जीविका और C3 की संयुक्त पहल

मुजफ्फरपुर जिले में बाल विवाह रोकने और इसके दुष्परिणामों के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने के लिए तीन दिवसीय विशेष जन-जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। यह अभियान जिले के चयनित नौ सामुदायिक क्षेत्रों में चलाया जा रहा है। अभियान का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर लोगों की सोच में बदलाव लाना और बेटियों के अधिकारों की रक्षा करना है। इस विशेष अभियान का आयोजन पंचायत प्रशासन, जीविका और सेंटर फॉर कैटेलाइजिंग चेंज (C3) की संयुक्त पहल पर किया जा रहा है। अभियान के तहत नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से बाल विवाह से होने वाले सामाजिक, स्वास्थ्य, शैक्षणिक और आर्थिक नुकसान को आसान और प्रभावी तरीके से लोगों के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। नाटकों के जरिए लोगों को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि कम उम्र में शादी करने से बच्चियों के शारीरिक और मानसिक विकास के साथ उनकी पढ़ाई और भविष्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। परिवार और समाज की भूमिका पर जोर बाल विवाह रोकने में परिवार, समाज और स्थानीय संस्थाओं की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। तीन दिवसीय अभियान में पंचायत प्रतिनिधियों, जीविका के स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संगठनों, संकुल स्तरीय संघों (CLF), किशोर-किशोरियों और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। कार्यक्रम स्थलों पर बाल विवाह विरोधी जागरूकता सामग्री और पोस्टर भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं, ताकि लोग इस कुप्रथा के कानूनी और सामाजिक पहलुओं को बेहतर तरीके से समझ सकें। ‘पहले पढ़ाई, फिर शादी’ का दिया संदेश नुक्कड़ नाटकों के जरिए ‘बेटी की शादी नहीं, पहले उसकी पढ़ाई और सपनों की उड़ान’ जैसे नारों के माध्यम से लोगों को बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया गया। कलाकारों ने संदेश दिया कि बाल विवाह बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य के अधिकारों का उल्लंघन करता है। बाल विवाह रोकना पूरे समाज की जिम्मेदारी अभियान के दौरान यह संदेश दिया गया कि बाल विवाह रोकना केवल किसी एक परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं की यह संयुक्त पहल मुजफ्फरपुर को बाल विवाह मुक्त जिला बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। मुजफ्फरपुर जिले में बाल विवाह रोकने और इसके दुष्परिणामों के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने के लिए तीन दिवसीय विशेष जन-जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। यह अभियान जिले के चयनित नौ सामुदायिक क्षेत्रों में चलाया जा रहा है। अभियान का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर लोगों की सोच में बदलाव लाना और बेटियों के अधिकारों की रक्षा करना है। इस विशेष अभियान का आयोजन पंचायत प्रशासन, जीविका और सेंटर फॉर कैटेलाइजिंग चेंज (C3) की संयुक्त पहल पर किया जा रहा है। अभियान के तहत नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से बाल विवाह से होने वाले सामाजिक, स्वास्थ्य, शैक्षणिक और आर्थिक नुकसान को आसान और प्रभावी तरीके से लोगों के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। नाटकों के जरिए लोगों को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि कम उम्र में शादी करने से बच्चियों के शारीरिक और मानसिक विकास के साथ उनकी पढ़ाई और भविष्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। परिवार और समाज की भूमिका पर जोर बाल विवाह रोकने में परिवार, समाज और स्थानीय संस्थाओं की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। तीन दिवसीय अभियान में पंचायत प्रतिनिधियों, जीविका के स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संगठनों, संकुल स्तरीय संघों (CLF), किशोर-किशोरियों और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। कार्यक्रम स्थलों पर बाल विवाह विरोधी जागरूकता सामग्री और पोस्टर भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं, ताकि लोग इस कुप्रथा के कानूनी और सामाजिक पहलुओं को बेहतर तरीके से समझ सकें। ‘पहले पढ़ाई, फिर शादी’ का दिया संदेश नुक्कड़ नाटकों के जरिए ‘बेटी की शादी नहीं, पहले उसकी पढ़ाई और सपनों की उड़ान’ जैसे नारों के माध्यम से लोगों को बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया गया। कलाकारों ने संदेश दिया कि बाल विवाह बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य के अधिकारों का उल्लंघन करता है। बाल विवाह रोकना पूरे समाज की जिम्मेदारी अभियान के दौरान यह संदेश दिया गया कि बाल विवाह रोकना केवल किसी एक परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं की यह संयुक्त पहल मुजफ्फरपुर को बाल विवाह मुक्त जिला बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।  

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