सेलेरी 11-15 हजार, टारगेट लाखों की ठगी:लोगों को फंसाने के लिए स्क्रिप्ट, 8 हजार में खरीदा 50 हजार लोगों का डेटा, 2 खातों में 4.9 करोड़

सेलेरी 11-15 हजार, टारगेट लाखों की ठगी:लोगों को फंसाने के लिए स्क्रिप्ट, 8 हजार में खरीदा 50 हजार लोगों का डेटा, 2 खातों में 4.9 करोड़

डीग पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दिल्ली में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर से 64 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें 31 युवक और 33 युवतियां थीं। ये लोग खुद को बैंक अधिकारी बताकर क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने और दूसरी बैंक सुविधाओं का झांसा देकर ओटीपी, सीवीवी, पैन कार्ड, जीमेल आईडी, जन्मतिथि और केवाईसी जैसी गोपनीय जानकारी चुरा लेते थे। पुलिस जांच में सामने आया कि 3 साल ये खेल चल रहा था। 11 से 15 हजार रुपए के बदले इन युवाओं को रोज लाखों की ठगी का टारगेट दिया जाता। लोगों को जाल में कैसे फंसाना है, इसके लिए बाकायदा स्क्रिप्ट इनकी टेबल पर रखी होती थी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… लोगों को ठगने के लिए तैयार कर रखी थी स्क्रिप्ट डीग पुलिस अधीक्षक शरण गोपीनाथ ने बताया कि एक मामले में जांच करते हुए पुलिस गैंग तक पहुंची। गिरोह का नेटवर्क किसी बैंक के कॉल सेंटर से कम नहीं था। बेरोजगार युवाओं के रिज्यूम जॉब पोर्टल्स से निकाले जाते थे। 11 से 15 हजार रुपए सेलेरी का लालच देकर उन्हें इस फर्जी कॉल सेंटर तक लाया जाता। ज्यादा लोगों को ठगी के जाल में फंसाने वालों को कमीशन भी मिलता। गिरोह ने कई नाबालिगों को भी अपने साथ जोड़ लिया था। एसपी ने बताया कि कॉल सेंटर में काम करने वालों को ग्राहकों से बातचीत के लिए पहले से तैयार स्क्रिप्ट दी जाती थी। इसी स्क्रिप्ट को पढ़ते हुए वे बैंक अधिकारी बन कर लोगों से बात करते थे। ग्राहक को बताया जाता कि उसके क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाई जा रही है या कार्ड का नवीनीकरण होना है। विश्वास दिलाने के लिए आरोपी बैंक के नाम और लोगो वाली फर्जी वेबसाइट और आईडी कार्ड का इस्तेमाल करते थे। इसके बाद बातचीत को धीरे-धीरे OTP, CVV, PAN कार्ड, Gmail ID,जन्मतिथि और दूसरी KYC जानकारी तक ले जाया जाता। जानकारी मिलते ही उसका इस्तेमाल ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी में किया जाता था। पीड़ित इस विश्वास में रहता कि वह सीधे बैंक से ही डील कर रहा है। ऐसे में वह भी ज्यादा ध्यान नहीं देता और अपनी जानकारी धीरे-धीरे इन बदमाशों के साथ साझा कर के ठगी का शिकार हो जाता। बदमाशों से फर्जी बैंक आईडी और बल्क डेटा बरामद डीग पुलिस ने दिल्ली के उत्तम नगर स्थित तीन मंजिला इमारत पर दबिश दी। मौके से 88 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, Axis Bank, HDFC Bank और Yes Bank के अधिकारियों के फर्जी आईडी कार्ड तथा बड़ी मात्रा में ग्राहकों का बल्क डेटा बरामद किया गया। इस डेटा में लोगों के नाम, बैंक अकाउंट, PAN कार्ड, पते और अन्य बैंकिंग जानकारियां शामिल थीं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतना संवेदनशील डेटा आरोपियों तक कहां से पहुंच रहा था। पूछताछ में बदमाशों ने बताया कि 8 हजार रुपए में 50 हजार लोगों का डेटा लिया करते थे। ये डेटा वो कई प्लेटफॉर्म से लिया करते थे। एक नाम पर कई सिम, खातों में करोड़ों के लेनदेन के सुराग पुलिस जांच में सामने आया कि इस गैंग के सदस्य एक ही व्यक्ति के नाम पर कई सिम जारी करवा कर उस का उपयोग कर रहे थे। ठगी का पैसा बदमाश करीब 50 बैंक खातों में डालकर उसे अलग-अलग बैंक खातों में घुमाया करते। दो बैकों खातों की डिटेल अभी तक पुलिस को पता चली है। एक बैंक खाते में 3.2 करोड़ रुपए और दूसरे बैंक खाते में 1.7 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन होना सामने आया है। वहीं 48 बैंक खातों की जानकारी सामने आना बाकी है। अब तक की जांच के आधार पर आशंका है कि बदमाशों ने सैकड़ों करोड़ रुपए की ठगी की होगी। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी गिरोह के खिलाफ कई शिकायतें मिली हैं। पुलिस अब जांच कर रही है कि ठगी की रकम कहां-कहां भेजी गई, किन बैंक खातों का इस्तेमाल हुआ और कौन लोग रकम को आगे पहुंचाते थे। Axis Bank की शिकायत से खुला पूरा नेटवर्क मामले का खुलासा Axis Bank डीग के शाखा प्रबंधक फूल सिंह की रिपोर्ट से हुआ। उन्होंने साइबर क्राइम थाना डीग में शिकायत दी थी कि कुछ लोग बैंक की फर्जी आईडी और दस्तावेज बनाकर ग्राहकों के साथ ठगी कर रहे हैं। फूलसिंह ने बताया कि कई लोग शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं कि उनके पास बैंक से कॉल आ रहा है। फोन करने वालों ने खुद की आईडी तक उन्हें भेज रखी है। फूलसिंह ने बैंक के बैक ऑफिस से जांच कराई तो पता चला कि यह फर्जी आईडी है। इस पर फूलसिंह ने साइबर थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दी। पुलिस के हाथ जो फर्जी आईडी और नम्बर लगे उनकी जांच की तो गिरोह के मुख्य सदस्य के रूप में आकाश पुत्र रामप्रकाश निवासी उत्तर प्रदेश का नाम सामने आया। जांच आगे बढ़ी तो दिल्ली के उत्तम नगर में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का पता चला। पुलिस ने वहां दबिश देकर बदमाशों को गिरफ्तार किया। डीग पुलिस की जांच का अगला फोकस इस नेटवर्क के मुख्य संचालकों, फर्जी डेटा उपलब्ध कराने वालों, बैंकिंग और सिम नेटवर्क से जुड़े लोगों तथा साइबर ठगी की रकम को आगे पहुंचाने वाले नेटवर्क पर है।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *