IAS दिव्या ने जिस गांव में पानी पहुंचाया-वहां हालात कैसे:टैंकर के पानी के लिए राशन कार्ड दिखाना पड़ता था; 5km दूर झरने पर लगती थी लाइनें

IAS दिव्या ने जिस गांव में पानी पहुंचाया-वहां हालात कैसे:टैंकर के पानी के लिए राशन कार्ड दिखाना पड़ता था; 5km दूर झरने पर लगती थी लाइनें

‘जब से पैदा हुए हैं, झरने और टैंकर से पानी लेते आए। रात 8 बजे पानी लेने के लिए झरने के पास जाकर बैठ जाते थे, तब कहीं अगली सुबह पानी मिलता था। दिव्या मित्तल हमारे लिए भगवान बनकर आईं। उन्होंने हमारे गांव में पानी पहुंचा दिया।’ यह कहना है मिर्जापुर के लहुरियादह गांव के राकेश यादव का । उनकी तरह गांव के करीब 90% लोग मानते हैं कि पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने उनके गांव की किस्मत बदल दी। दरअसल, सितंबर- 2022 में दिव्या मित्तल मिर्जापुर की डीएम बनी थीं। वह दौरे पर लहुरियादह गांव पहुंची, तो लोगों ने बताया कि पीने के साफ पानी के लिए उन्हें 5 किमी चलना पड़ता है। तब दिव्या ने कहा था- ‘जब तक इस गांव में पानी नहीं पहुंच जाता, तब तक मैं यहां का पानी नहीं पीऊंगी।’ करीब 1 साल की कोशिशों के बाद आखिरकार गांव के लोगों का सपना पूरा हुआ। यहां पीने का पानी पहुंचाया जा सका। कुछ महीने बाद सितंबर- 2023 में दिव्या मित्तल का यहां से ट्रांसफर हो गया। 30 अगस्त, 2026 को उन्होंने नौकरी से ही इस्तीफा दे दिया है। अब यह गांव सुर्खियों में है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… राशन कार्ड दिखाकर मिलता था पानी मिर्जापुर जिला मुख्यालय से करीब 65 किमी दूर यूपी-एमपी बॉर्डर पर बसे इस गांव में 4 साल पहले राशन कार्ड के हिसाब से पानी मिलता था। यहां के लोगों ने बताया कि हर व्यक्ति को सिर्फ 15 लीटर पानी दिया जाता था। यह गांव हनुमाना पहाड़ी के ऊपर बसा है। कई बार टैंकर भी नहीं पहुंचता था। ऐसे में गांव के लोगों को जंगल में 5 किमी पैदल चलकर जाना पड़ता था। यहां पहाड़ से रिसने वाले पानी को बर्तन में भरकर लाते थे। 2022 तक यहां पीने के पानी के लिए नल की कोई व्यवस्था नहीं थी। ट्रक पर पानी लादने पर महिलाएं होती थीं बेइज्जत गांव में हमारी मुलाकात सड़क किनारे दुकान चलाने वाली कमला देवी केसरवानी से हुई। वह बताती हैं- हम लोग पानी लेने के लिए 5 किमी दूर भैंसोर जाते थे। वहां से आने वाले ट्रकों पर पानी लाद देते थे। ट्रक वाले उल्टा-सीधा बोलते थे। लेकिन हमारी मजबूरी थी, इसलिए सब सुनना पड़ता था। कमला आगे कहती हैं- 2022 में दिव्या मित्तल ने हमारे गांव का दौरा किया। गांव पहाड़ पर बसा है और काफी ऊंचाई पर है। पाइप के जरिए यहां पानी नहीं पहुंचाया जा सकता था। इसलिए उन्होंने पानी की टंकी बनवाने का प्रोजेक्ट फाइनल किया। उन्होंने जैसा कहा था, वैसा ही किया। उन्होंने उद्घाटन में सांसद या विधायक को नहीं बुलाया। इस वजह से सांसद अनुप्रिया पटेल ने उनका ट्रांसफर करवा दिया। मजबूरी में बरसात का पानी पीते थे लहुरियादह में दुकान चलाने वाले विकास कुमार तेज बारिश के बीच अपने घर के डिब्बों में पानी भर रहे थे। इसकी वजह पूछने पर उन्होंने बताया- इससे दुकान के गंदे बर्तन धो लेते हैं। दिव्या मित्तल ने हमारे घर तक नल और पाइप से पानी पहुंचा दिया। इनसे पहले भी हमने कई अधिकारियों से अपनी समस्या बताई, लेकिन किसी ने हमारी बात नहीं सुनी। गांव के लिए स्वर्ग में सीढ़ियां लगाकर चली गईं दैनिक भास्कर की टीम बारिश में भीगते हुए गांव में आगे बढ़ी, तो राकेश यादव मिले। वह अपने पूरे परिवार के साथ बैठे थे। दिव्या मित्तल और पानी की बात चली तो कहने लगे- पहले हम कभी भैंसोर तो कभी ड्रमंडगंज का चक्कर लगाते थे। घर के सारे लोग, मतलब बीवी-बच्चे पानी के इंतजाम में लगे रहते थे। वह आगे कहते हैं- दिनभर पानी इकट्ठा करके उसे ढोते रहो, यही काम था। जैसे लोग कंधे पर कांवड़ लेकर चलते हैं, ठीक वैसे चाहे हमारी बीवी हो या बच्चे, कंधे पर पानी के दो डिब्बे लेकर चलते थे। जब ये अधिकारी आईं, तब गांव में पानी आ सका। इस गांव के लिए स्वर्ग में सीढ़ियां लगाकर चली गईं। शादी में पैसा खर्च करके मिलता था पानी गांव के एक किनारे हीरावती का घर है। उनके पति की मौत हो चुकी है। बताती हैं- हमारे यहां जब किसी की शादी होती थी, तो 1500-2000 रुपए खर्च करने पर एक टैंकर पानी आता था। पानी की दिक्कत इतनी थी कि हम झरने के पास ही जाकर सो जाते थे। 3-4 दिन बाद नंबर आता था, तब पानी मिल पाता था। टोंटी लग गई, 6 दिन से पानी की सप्लाई नहीं आई गांव की रीता आदिवासी बताती हैं- पानी की टोंटी तो घर के बाहर लग गई, लेकिन दिक्कत पूरी तरह खत्म नहीं हुई। आज 6 दिन हो गए हैं, सप्लाई का पानी नहीं आया। बारिश में जो पानी गिर रहा, उसी को इकट्ठा कर रहे हैं। यही पानी पीएंगे और दूसरे कामों में भी इस्तेमाल करेंगे। 32 साल हो गए, अब गांव में पानी की टोंटी देखी गांव के गौरीशंकर आदिवासी कहते हैं- मेरी उम्र 32 साल हो गई है। अब जाकर गांव में पानी की टोंटी देखी है। पानी आने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह हुआ कि अब घर के एक आदमी को झरने के पास नहीं बैठना पड़ता। वह घर के दूसरे काम कर पाता है, बच्चे भी स्कूल जाते हैं। पहले उन्हें भी पानी लेने झरने के पास भेजा जाता था। क्या बच्चे पढ़ने जा पा रहे हैं? इस पर वह कहते हैं- अभी जो स्कूल है, वह 4 किमी दूर है। रास्ते में जंगल पड़ता है। इसलिए बच्चों को वहां भेजने में डर लगता है। लोग बोले- दिव्या चुनाव लड़ेंगी, तो सपोर्ट करेंगे राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दिव्या मित्तल मिर्जापुर से चुनाव लड़ सकती हैं। भाजपा प्रवक्ता प्रशांत उमराव ने दावा किया है कि दिव्या कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेंगी। सोशल मीडिया पर भी लोग ऐसे कयास लगा रहे हैं।
लहुरियादह गांव के लोग कहते हैं- अगर दिव्या मित्तल चुनावी मैदान में उतरती हैं, तो उनका पूरा समर्थन करेंगे। ————————– यह खबर भी पढ़ें- IAS दिव्या मित्तल क्या मिर्जापुर से चुनाव लड़ेंगी?, सांसद अनुप्रिया की शिकायत पर हटाई गई थीं नौकरी से इस्तीफा देने वाली यूपी की IAS दिव्या मित्तल क्या चुनाव लड़ेंगी? राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चा तेज हो गई है। मिर्जापुर में दिव्या सबसे ज्यादा समय तक जिलाधिकारी रहीं। यहां सांसद अनुप्रिया पटेल और यूपी सरकार में मंत्री आशीष पटेल से उनकी तनातनी रही। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

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