भागलपुर में करंट से झुलसी बच्ची को नहीं मिला स्ट्रेचर:गोद में उठाकर जाते दिखे परिजन, डेढ़ घंटे बाद अस्पताल ने उपलब्ध कराई एंबुलेंस

भागलपुर में करंट से झुलसी बच्ची को नहीं मिला स्ट्रेचर:गोद में उठाकर जाते दिखे परिजन, डेढ़ घंटे बाद अस्पताल ने उपलब्ध कराई एंबुलेंस

भागलपुर के शाहकुंड में करंट से झुलसी बच्ची को अस्पताल में न स्ट्रेचर मिला, न एंबुलेंस। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से बच्ची को बेहतर इलाज के लिए रेफर किए जाने के बाद परिजन उसे गोद में लेकर अस्पताल के बाहर जाते दिखे। बच्ची के हाथ में ड्रीप लगी थी, जबकि उसके परिजन ने हाथ में स्लाइन की बोतल थी। हालांकि, डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ ने उन्हें रोका। थोड़ी देर कहते हुए डेढ़ घंटे बाद एंबुलेंस मुहैया कराई गई। इसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। दरअसल, सादपुर गांव के रहने वाले करू यादव की बेटी 9 साल की सोनाक्षी कुमारी को करंट लग गया था। परिजन उसे आनन-फानन में इलाज के लिए शाहकुंड अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसे समुचित इलाज नहीं मिला। डॉक्टरों ने उसे मायागंज अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन हॉस्पिटल मैनेजमेंट से बार-बार एंबुलेंस की डिमांड करते रहे, लेकिन डेढ़ घंटे तक एंबुलेंस के लिए इंतजार करना पड़ा। हंगामा कर रहे परिजन को मेडिकल कर्मियों ने शांत कराया एंबुलेंस तक ले जाने के लिए परिजनों को स्ट्रेचर तक मुहैया नहीं कराया गया। रेफर किए जाने के डेढ़ घंटे बाद एंबुलेंस मिलने के बाद पिता करू यादव अपनी बेटी को गोद में लेकर धीरे-धीरे एंबुलेंस की तरफ बढ़ते दिखे। एंबुलेंस में बच्ची को रखने के बाद उसके पिता हंगामा करने लगे। हालांकि, वहां मौजूद परिजन ने किसी तरह उन्हें समझा बुझाकर मामला शांत कराया। इसके बाद बच्ची को इलाज के लिए मायागंज अस्पताल भेजा गया। परिवार के सदस्य बोले- मायागंज ले जाने के लिए साधन नहीं था मामले पर बच्ची के परिवार के सदस्य पंकज कुमार ने बताया कि 2 घंटे पहले हम लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे। यहां पर प्रारंभिक उपचार हुआ। डॉक्टरों ने बेहतर उपचार के लिए रेफर कर दिया। बच्ची को मायागंज ले जाने के लिए हमारे पास अपना कोई साधन नहीं था। पंकज ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन से हम लोगों ने 100 से ज्यादा बार एंबुलेंस की डिमांड की, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की तरफ से कहा गया कि महिला मरीज को छोड़ने के लिए एंबुलेंस गई है। उन्होंने कहा कि बच्ची के पैर से लगातार ब्लड आ रहा था, स्थिति गंभीर थी। हम लोग डेढ़ घंटे तक इंतजार करते रहे, तब एंबुलेंस आई। मामले पर अस्पताल प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। भागलपुर के शाहकुंड में करंट से झुलसी बच्ची को अस्पताल में न स्ट्रेचर मिला, न एंबुलेंस। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से बच्ची को बेहतर इलाज के लिए रेफर किए जाने के बाद परिजन उसे गोद में लेकर अस्पताल के बाहर जाते दिखे। बच्ची के हाथ में ड्रीप लगी थी, जबकि उसके परिजन ने हाथ में स्लाइन की बोतल थी। हालांकि, डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ ने उन्हें रोका। थोड़ी देर कहते हुए डेढ़ घंटे बाद एंबुलेंस मुहैया कराई गई। इसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। दरअसल, सादपुर गांव के रहने वाले करू यादव की बेटी 9 साल की सोनाक्षी कुमारी को करंट लग गया था। परिजन उसे आनन-फानन में इलाज के लिए शाहकुंड अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसे समुचित इलाज नहीं मिला। डॉक्टरों ने उसे मायागंज अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन हॉस्पिटल मैनेजमेंट से बार-बार एंबुलेंस की डिमांड करते रहे, लेकिन डेढ़ घंटे तक एंबुलेंस के लिए इंतजार करना पड़ा। हंगामा कर रहे परिजन को मेडिकल कर्मियों ने शांत कराया एंबुलेंस तक ले जाने के लिए परिजनों को स्ट्रेचर तक मुहैया नहीं कराया गया। रेफर किए जाने के डेढ़ घंटे बाद एंबुलेंस मिलने के बाद पिता करू यादव अपनी बेटी को गोद में लेकर धीरे-धीरे एंबुलेंस की तरफ बढ़ते दिखे। एंबुलेंस में बच्ची को रखने के बाद उसके पिता हंगामा करने लगे। हालांकि, वहां मौजूद परिजन ने किसी तरह उन्हें समझा बुझाकर मामला शांत कराया। इसके बाद बच्ची को इलाज के लिए मायागंज अस्पताल भेजा गया। परिवार के सदस्य बोले- मायागंज ले जाने के लिए साधन नहीं था मामले पर बच्ची के परिवार के सदस्य पंकज कुमार ने बताया कि 2 घंटे पहले हम लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे। यहां पर प्रारंभिक उपचार हुआ। डॉक्टरों ने बेहतर उपचार के लिए रेफर कर दिया। बच्ची को मायागंज ले जाने के लिए हमारे पास अपना कोई साधन नहीं था। पंकज ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन से हम लोगों ने 100 से ज्यादा बार एंबुलेंस की डिमांड की, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की तरफ से कहा गया कि महिला मरीज को छोड़ने के लिए एंबुलेंस गई है। उन्होंने कहा कि बच्ची के पैर से लगातार ब्लड आ रहा था, स्थिति गंभीर थी। हम लोग डेढ़ घंटे तक इंतजार करते रहे, तब एंबुलेंस आई। मामले पर अस्पताल प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।  

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