30 सेकेंड में डेथ की मिस्ट्री चौकाने वाली है। ऐसा लगा कि शराब नहीं साइनाड है। पेट में चीरा लगाने के बाद चारो डेड बॉडी से स्मेल भी केमिकल मिक्स शराब की आ रही थी। ऐसा कौन सा केमिकल था जो शराब में मिक्स होते ही साइनाइड की तरह खतरनाक जहर बन गया, इसकी जांच के लिए सैंपल फॉरेंसिक डिपार्टमेंट को भेजा गया है। यह खुलासा जहरीली अंग्रेजी शराब से 4 मौतों का पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर का है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में सामने आया है कि शराबबंदी के 10 साल में पहली बार बिहार में अंग्रेजी शराब से साइनाइड की तरह 30 सेकेंड में 4 मौतें हुई हैं। पढ़िए और देखिए बंगाल से आई अंग्रेजी शराब को डबल करने में केमिकल मिलाने के ट्रेंड ने कैसे ली 4 जानें..। पटना के बाढ़ थाना क्षेत्र के बढ़या गांव में 30 अगस्त को पार्टी में अंग्रेजी शराब पीते ही 4 लोगों की मौत हो गई। मामला इसलिए बड़ा था क्योंकि शराबबंदी के 10 साल में पहली बार अंग्रेजी शराब जहरीली हुई और साइनाइड की तरह 4 लोगों की मौत हो गई। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम इन मौतों की तह तक पहुंचने के लिए चारों डेड बॉडी का पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर से मिली। पटन के बाढ़ अनुमंडल अस्पताल में तैनात डॉक्टर अजय ने कई बड़े खुलासे किए। रिपोर्टर- आपने चारो डेडबॉडी का पोस्टमॉर्टम किया है, क्या फाइंडिंग है आपकी?
डॉक्टर- बॉडी के एक्सटर्नल लुक और पोस्टमॉर्टम करने के बाद यह कन्फर्म है कि मौत साइनाइड के नेचर वाले पॉइजन से हुई है। रिपोर्टर – शराब में साइनाइड का नेचर?
डॉक्टर – बॉडी में शराब और केमिकल मिक्स पॉइजन मिला है। पेट खोलने पर शराब की काफी तेज गंध आ रही थी, लेकिन डेथ का जो पैटर्न दिखा वह पूरी तरह से साइनाइड के जहर वाला था। रिपोर्टर – कौन सा केमिकल था जिससे शराब साइनाइड की तरह तेज जहरीली हो गई?
डॉक्टर – शराब बनाने में जिस केमिकल का इस्तेमाल किया गया होगा, वह रिएक्शन कर के ही साइनाइड की तरह जहरीला हुआ है। रिपोर्टर – पहली बार ऐसा देखने में आया है कि अंग्रेजी शराब से इतनी तेज मौत हुई?
डॉक्टर – जहर क्वीक रिएक्शन करने वाला था, इसका नेचर पूरी तरह से साइनाइड जैसा ही था। नौकरी में पहली बार ऐसा देखा है जिसमें मौत इतनी तेज हुई है। रिपोर्टर – जहर कितनी देर में एक्शन किया है?
डॉक्टर – जहर कंज्यूम करने के कुछ ही सेकेंड के बाद चारों बेहोश हो गए और देखते ही देखते मौत हो गई। लैब की रिपोर्ट आने के बाद ही केमिकल का पता चल पाएगा जो शराब में मिक्स होते ही साइनाइड की तरह जहरीला हो गया। 4 डेड बॉडी का पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर से बातचीत के दौरान ही सामने आया कि घटना के समय सबसे पहले गांव का राहुल मौके पर पहुंचा था। एक साथ 4 मौतों से गांव में लोग काफी डरे हुए थे। इस बीच काफी पड़ताल के बाद रिपोर्टर राहुल तक पहुंचा। राहुल ने शराब पार्टी में मौत की पूरी कहानी बताई। राहुल ने बताया कि चार लोग विकास, शशि, पंकज और निशू गांव में शराब पी रहे थे। शराब का पहला पैग लेते ही चारो गिर गए। वहां मौजूद लाली ने शोर मचाना शुरू किया तो मैं पहुंचा। देखा निशु जमीन पर गिरा था जिसको लाली उठाने की कोशिश कर रहा था। पंकज चौकी पर गिरा पड़ा था। उसका शरीर चौकी पर था लेकिन सिर नीचे लटक गया था। एक तरफ विकास गिरा था। वहीं दूसरी तरफ शशि भी पड़ा था। चौकी पर प्लेट रखी थी, जिसमें रोटी और मछली थी। चारों ने जिस ग्लास में शराब पी थी वह भी वैसे ही पड़े थे। रिपोर्टर- जब पांच लोग एक साथ शराब पी रहे थे तो सिर्फ चार लोगों की मौत क्यों हुई? इसमें लाली कैसे बच गया?
राहुल – लाली ने शराब मुंह में ली तो उसे उल्टी हो गई, एक घूंट भी अंदर नहीं गई, इसलिए वह बच गया। रिपोर्टर- जब आप पहुंचे तो आपको उन चारों ने क्या बताया कि कैसे क्या-क्या हुआ है?
राहुल- कोई भी बोलने की स्थिति में नहीं था। मैं पहुंचा तो सबकी मरने जैसी स्थिति हो गई थी। रिपोर्टर – कितनी देर में मौत हुई?
राहुल – मौत तो शराब पेट में जाते ही हो गई थी, लेकिन हॉस्पिटल ले जाया गया। रिपोर्टर- शराब कहां से आई थी? क्या यहां शराब पैकिंग भी की जाती है?
राहुल- यह नहीं पता है, लेकिन शराब पर बंगाल लिखा था। यहां बंगाल से लोग शराब लाते हैं फिर उसे डबल करने के लिए केमिकल मिलाते हैं। रिपोर्टर – कौन करता है?
राहुल – यह पूरा इलाका शराब के धंधे का हब है। मलाही गांव में सभी तरह की शराब बनती है, अंग्रेजी की खाली बोतल में पैक होती है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन के दौरान गांव का कोई भी व्यक्ति मुंह खोलने को तैयार नहीं था। हर कोई पुलिस केस से डर रहा था। लोगों को पता भी है कि शराब कहां से आई और कौन लाया लेकिन कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं। काफी कोशिश के बाद भास्कर रिपोर्टर मृतक शशि के भतीजे आयुष से बातचीत में खुफिया कैमरा पर कुछ क्लू निकाल पाया। आयुष ने बताया कि अंग्रेजी शराब की बोतल गांव में ही मिलती है। इसे पेपर में लपेटकर बेचा जाता है। बंगाल से शराब की बोतल आती है, इसके बाद इसे डबल करने के लिए इसमें केमिकल मिलाया जाता है। चाचा जब पेपर में लपेटी हुई बोतल लेकर आए तो मैं समझ गया था कि अंग्रेजी शराब है। आयुष की बातों से लग रहा था कि जब उसने बोतल देखी तो उसे किसी अनहोनी की आशंका हो गई थी क्योंकि गांव में बहुत दिनों से अंग्रेजी शराब में मिलावट की चर्चा सुनी थी। रिपोर्टर- आपने क्या-क्या देखा और उनकी क्या बातें सुनी हैं?
आयुष- दोपहर में मंदिर से पूजा कर वापस घर लौट रहा था। इस दौरान देखा कि चाचा स्कूटी से शराब की बोतल लेकर आए। उन्होंने बोतल झोपड़ी में ले जाकर रख दी। रिपोर्टर – आपने और क्या देखा?
आयुष – बोतल के ऊपर पेपर लपेटा गया था, मैंने देखा कि निशु ने पेपर को हटाया तो अंदर से अंग्रेजी शराब की बोतल दिखी। चाचा घर से रोटी ले गए और चार लोग वहां पीने की तैयारी में जुट गए। थोड़ी देर में तो पूरा कांड ही हो गया। रिपोर्टर- आपके चाचा शराब कहां से लेकर आए थे?
आयुष- यह जानकारी मुझे नहीं है। बाद में देखा तो शराब की बोतल पर ओनली सेल फॉल बंगाल का रैपर था। यानी बंगाल की बनी शराब की बोतल थी। रिपोर्टर – कैसे लग रहा था, नकली या असली?
आयुष – पटना से फॉरेंसिक टीम आई थी, उन्होंने देखते ही बोला कि बोतल वाली शराब में जहर है। उसका कलर एकदम लाल था, देखने से शराब जैसी लग ही नहीं रही थी। रिपोर्टर- यहां आसपास में भी शराब की पैकिंग होती है क्या? कहा जा रहा है कि ओरिजनल शराब की जगह नकली जहरीली शराब भर दी गई थी।
आयुष- यहां गांव में बहुत सारे लोग चुलाई हुई शराब बेचते हैं। आसपास के इलाके में ब्रांडेड शराब की बोतल में भी नकली शराब भर देते हैं। मद्य निषेध विभाग वाले बता रहे थे कि बोतल का मुंह गर्म पानी में रखने के बाद बोतल के सील वाला ढक्कन खुल जाता है। फिर उसमें कुछ भी भर के दोबारा सील कर देते हैं। रिपोर्टर- ऐसा तो नहीं है न कि यहां किसी ने शराब में जहर डाल दिया हो।
आयुष- यहां सबके सामने सील बोतल में कोई कैसे मिला सकते हैं। शशि खुद लेकर आए थे, उन्होंने खुद पी है और उनकी भी मौत हुई है, तो ऐसा भी नहीं कहा जा सकता है कि बाहर से वह खुद कुछ मिलाकर लाए थे। जिसने शराब दी है वहीं से शराब में कुछ मिला है। शराब की कहीं बाहर से पैकिंग की गई है। इन्वेस्टिगेशन के दौरान सबसे बड़ा चैलेंज शराब कहां से आई यह पता लगाना था। काफी पड़ताल के बाद भटगांव के संजय का नाम सामने आया। भास्कर रिपोर्टर गांव में दर्जनों से लोगों से बात की सभी ने संजय का नाम लिया। पड़ताल के दौरान ही गांव के सहजानंद का पता चला। वह काफी दिनों से शराब के धंधेबाजों का विरोध कर रहे हैं। बातचीत के दौरान सहजानंद ने संजय का नाम लिया और बताया कि पुलिस से लेकर गांव के बच्चे बच्चे को पता है कि भटगांव का संजय बंगाल से अंग्रेजी शराब की पूरी खेप मंगवाता है। इसे डबल करने के लिए उसमें केमिकल मिलाता है। उसके पास खाली बोतलें होती हैं, जिसमें शराब की रीपैकिंंग कराकर बेचता है। घटना के पीछे भी संजय का हाथ है। रिपोर्टर- शशि को शराब किसने दी थी?
सजदानंद- पास के ही भटगांव गांव का संजय नाम का लड़का है उसने शराब दी है। रिपोर्टर- क्या वह खुद पहुंचाने आया था?
सजदानंद- वह खुद नहीं आया था, उसको इन लोगों ने फोन किया था, उसने किसी लड़के से इनके पास भिजवाई थी। रिपोर्टर- आपको कैसे पता चला?
सजदानंद- चारो तरफ लोगों को पता है। भटगांव का संजय ही इन लोगों को शराब देता था। जब से घटना हुई है संजय फरार है। पुलिस भी उसे ढूंढ रही है। शराबबंदी के बाद पहली बार साइनाइड वाले जहर की तरह मौत बिहार में साल 2016 में पूर्ण शराबबंदी हुई है। शराबबंदी के बाद से कई बड़ी घटनाएं हुई हैं जिसमें देसी शराब पीने से लोगों की मौत हुई है। ऐसा पहली बार हुआ है जब अंग्रेजी शराब से एक साथ 30 सेकेंड में चार लोगों की मौत हुई है। पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर भी शराब से हुई मौत से हैरान हैं, वह भी समझ नहीं पा रहे हैं कि इतनी तेजी से मौत कैसे हो गई। हालांकि वह इसे केमिकल का बड़ा रिएक्शन मान रहे हैं जिससे साइनाइड जहर जैसे तेजी से मौत हुई है। बिहार में अबतक जहरीली शराब पीने से 354 लोगों की मौत हो चुकी है। बिहार में अब तक शराब से होने वाली मौतों का पैटर्न अलग रहा है। शराब पीने के कुछ देर बाद लोगों की आंखों की रोशनी कम होने लगती है। जिन लोगों पर इसका ज्यादा असर होता है, उनकी आंखों की रोशनी पूरी तरह चली जाती है। कई लोगों को सांस लेने में भी परेशानी होती है। जहरीली शराब पीने के असर के तुरंत बाद किसी की मौत नहीं हुई है। उन्हें इतना समय जरूर मिला कि उन्हें अस्पताल तक ले जाया जा सके। हालांकि, पहली बार ऐसा हुआ है कि बिहार में अंग्रेजी शराब पीने से मौत हुई है। इस मामले में मौत का पैटर्न भी बिल्कुल अलग रहा है। शराब गले के अंदर जाते ही मौत हो गई। जहर का नेचर साइनाइड के जैसा रहा है। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि शराबबंदी से अब तक बिहार में 354 लोगों की जहरीली शराब से मौत हो चुकी है। 30 सेकेंड में डेथ की मिस्ट्री चौकाने वाली है। ऐसा लगा कि शराब नहीं साइनाड है। पेट में चीरा लगाने के बाद चारो डेड बॉडी से स्मेल भी केमिकल मिक्स शराब की आ रही थी। ऐसा कौन सा केमिकल था जो शराब में मिक्स होते ही साइनाइड की तरह खतरनाक जहर बन गया, इसकी जांच के लिए सैंपल फॉरेंसिक डिपार्टमेंट को भेजा गया है। यह खुलासा जहरीली अंग्रेजी शराब से 4 मौतों का पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर का है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में सामने आया है कि शराबबंदी के 10 साल में पहली बार बिहार में अंग्रेजी शराब से साइनाइड की तरह 30 सेकेंड में 4 मौतें हुई हैं। पढ़िए और देखिए बंगाल से आई अंग्रेजी शराब को डबल करने में केमिकल मिलाने के ट्रेंड ने कैसे ली 4 जानें..। पटना के बाढ़ थाना क्षेत्र के बढ़या गांव में 30 अगस्त को पार्टी में अंग्रेजी शराब पीते ही 4 लोगों की मौत हो गई। मामला इसलिए बड़ा था क्योंकि शराबबंदी के 10 साल में पहली बार अंग्रेजी शराब जहरीली हुई और साइनाइड की तरह 4 लोगों की मौत हो गई। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम इन मौतों की तह तक पहुंचने के लिए चारों डेड बॉडी का पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर से मिली। पटन के बाढ़ अनुमंडल अस्पताल में तैनात डॉक्टर अजय ने कई बड़े खुलासे किए। रिपोर्टर- आपने चारो डेडबॉडी का पोस्टमॉर्टम किया है, क्या फाइंडिंग है आपकी?
डॉक्टर- बॉडी के एक्सटर्नल लुक और पोस्टमॉर्टम करने के बाद यह कन्फर्म है कि मौत साइनाइड के नेचर वाले पॉइजन से हुई है। रिपोर्टर – शराब में साइनाइड का नेचर?
डॉक्टर – बॉडी में शराब और केमिकल मिक्स पॉइजन मिला है। पेट खोलने पर शराब की काफी तेज गंध आ रही थी, लेकिन डेथ का जो पैटर्न दिखा वह पूरी तरह से साइनाइड के जहर वाला था। रिपोर्टर – कौन सा केमिकल था जिससे शराब साइनाइड की तरह तेज जहरीली हो गई?
डॉक्टर – शराब बनाने में जिस केमिकल का इस्तेमाल किया गया होगा, वह रिएक्शन कर के ही साइनाइड की तरह जहरीला हुआ है। रिपोर्टर – पहली बार ऐसा देखने में आया है कि अंग्रेजी शराब से इतनी तेज मौत हुई?
डॉक्टर – जहर क्वीक रिएक्शन करने वाला था, इसका नेचर पूरी तरह से साइनाइड जैसा ही था। नौकरी में पहली बार ऐसा देखा है जिसमें मौत इतनी तेज हुई है। रिपोर्टर – जहर कितनी देर में एक्शन किया है?
डॉक्टर – जहर कंज्यूम करने के कुछ ही सेकेंड के बाद चारों बेहोश हो गए और देखते ही देखते मौत हो गई। लैब की रिपोर्ट आने के बाद ही केमिकल का पता चल पाएगा जो शराब में मिक्स होते ही साइनाइड की तरह जहरीला हो गया। 4 डेड बॉडी का पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर से बातचीत के दौरान ही सामने आया कि घटना के समय सबसे पहले गांव का राहुल मौके पर पहुंचा था। एक साथ 4 मौतों से गांव में लोग काफी डरे हुए थे। इस बीच काफी पड़ताल के बाद रिपोर्टर राहुल तक पहुंचा। राहुल ने शराब पार्टी में मौत की पूरी कहानी बताई। राहुल ने बताया कि चार लोग विकास, शशि, पंकज और निशू गांव में शराब पी रहे थे। शराब का पहला पैग लेते ही चारो गिर गए। वहां मौजूद लाली ने शोर मचाना शुरू किया तो मैं पहुंचा। देखा निशु जमीन पर गिरा था जिसको लाली उठाने की कोशिश कर रहा था। पंकज चौकी पर गिरा पड़ा था। उसका शरीर चौकी पर था लेकिन सिर नीचे लटक गया था। एक तरफ विकास गिरा था। वहीं दूसरी तरफ शशि भी पड़ा था। चौकी पर प्लेट रखी थी, जिसमें रोटी और मछली थी। चारों ने जिस ग्लास में शराब पी थी वह भी वैसे ही पड़े थे। रिपोर्टर- जब पांच लोग एक साथ शराब पी रहे थे तो सिर्फ चार लोगों की मौत क्यों हुई? इसमें लाली कैसे बच गया?
राहुल – लाली ने शराब मुंह में ली तो उसे उल्टी हो गई, एक घूंट भी अंदर नहीं गई, इसलिए वह बच गया। रिपोर्टर- जब आप पहुंचे तो आपको उन चारों ने क्या बताया कि कैसे क्या-क्या हुआ है?
राहुल- कोई भी बोलने की स्थिति में नहीं था। मैं पहुंचा तो सबकी मरने जैसी स्थिति हो गई थी। रिपोर्टर – कितनी देर में मौत हुई?
राहुल – मौत तो शराब पेट में जाते ही हो गई थी, लेकिन हॉस्पिटल ले जाया गया। रिपोर्टर- शराब कहां से आई थी? क्या यहां शराब पैकिंग भी की जाती है?
राहुल- यह नहीं पता है, लेकिन शराब पर बंगाल लिखा था। यहां बंगाल से लोग शराब लाते हैं फिर उसे डबल करने के लिए केमिकल मिलाते हैं। रिपोर्टर – कौन करता है?
राहुल – यह पूरा इलाका शराब के धंधे का हब है। मलाही गांव में सभी तरह की शराब बनती है, अंग्रेजी की खाली बोतल में पैक होती है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन के दौरान गांव का कोई भी व्यक्ति मुंह खोलने को तैयार नहीं था। हर कोई पुलिस केस से डर रहा था। लोगों को पता भी है कि शराब कहां से आई और कौन लाया लेकिन कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं। काफी कोशिश के बाद भास्कर रिपोर्टर मृतक शशि के भतीजे आयुष से बातचीत में खुफिया कैमरा पर कुछ क्लू निकाल पाया। आयुष ने बताया कि अंग्रेजी शराब की बोतल गांव में ही मिलती है। इसे पेपर में लपेटकर बेचा जाता है। बंगाल से शराब की बोतल आती है, इसके बाद इसे डबल करने के लिए इसमें केमिकल मिलाया जाता है। चाचा जब पेपर में लपेटी हुई बोतल लेकर आए तो मैं समझ गया था कि अंग्रेजी शराब है। आयुष की बातों से लग रहा था कि जब उसने बोतल देखी तो उसे किसी अनहोनी की आशंका हो गई थी क्योंकि गांव में बहुत दिनों से अंग्रेजी शराब में मिलावट की चर्चा सुनी थी। रिपोर्टर- आपने क्या-क्या देखा और उनकी क्या बातें सुनी हैं?
आयुष- दोपहर में मंदिर से पूजा कर वापस घर लौट रहा था। इस दौरान देखा कि चाचा स्कूटी से शराब की बोतल लेकर आए। उन्होंने बोतल झोपड़ी में ले जाकर रख दी। रिपोर्टर – आपने और क्या देखा?
आयुष – बोतल के ऊपर पेपर लपेटा गया था, मैंने देखा कि निशु ने पेपर को हटाया तो अंदर से अंग्रेजी शराब की बोतल दिखी। चाचा घर से रोटी ले गए और चार लोग वहां पीने की तैयारी में जुट गए। थोड़ी देर में तो पूरा कांड ही हो गया। रिपोर्टर- आपके चाचा शराब कहां से लेकर आए थे?
आयुष- यह जानकारी मुझे नहीं है। बाद में देखा तो शराब की बोतल पर ओनली सेल फॉल बंगाल का रैपर था। यानी बंगाल की बनी शराब की बोतल थी। रिपोर्टर – कैसे लग रहा था, नकली या असली?
आयुष – पटना से फॉरेंसिक टीम आई थी, उन्होंने देखते ही बोला कि बोतल वाली शराब में जहर है। उसका कलर एकदम लाल था, देखने से शराब जैसी लग ही नहीं रही थी। रिपोर्टर- यहां आसपास में भी शराब की पैकिंग होती है क्या? कहा जा रहा है कि ओरिजनल शराब की जगह नकली जहरीली शराब भर दी गई थी।
आयुष- यहां गांव में बहुत सारे लोग चुलाई हुई शराब बेचते हैं। आसपास के इलाके में ब्रांडेड शराब की बोतल में भी नकली शराब भर देते हैं। मद्य निषेध विभाग वाले बता रहे थे कि बोतल का मुंह गर्म पानी में रखने के बाद बोतल के सील वाला ढक्कन खुल जाता है। फिर उसमें कुछ भी भर के दोबारा सील कर देते हैं। रिपोर्टर- ऐसा तो नहीं है न कि यहां किसी ने शराब में जहर डाल दिया हो।
आयुष- यहां सबके सामने सील बोतल में कोई कैसे मिला सकते हैं। शशि खुद लेकर आए थे, उन्होंने खुद पी है और उनकी भी मौत हुई है, तो ऐसा भी नहीं कहा जा सकता है कि बाहर से वह खुद कुछ मिलाकर लाए थे। जिसने शराब दी है वहीं से शराब में कुछ मिला है। शराब की कहीं बाहर से पैकिंग की गई है। इन्वेस्टिगेशन के दौरान सबसे बड़ा चैलेंज शराब कहां से आई यह पता लगाना था। काफी पड़ताल के बाद भटगांव के संजय का नाम सामने आया। भास्कर रिपोर्टर गांव में दर्जनों से लोगों से बात की सभी ने संजय का नाम लिया। पड़ताल के दौरान ही गांव के सहजानंद का पता चला। वह काफी दिनों से शराब के धंधेबाजों का विरोध कर रहे हैं। बातचीत के दौरान सहजानंद ने संजय का नाम लिया और बताया कि पुलिस से लेकर गांव के बच्चे बच्चे को पता है कि भटगांव का संजय बंगाल से अंग्रेजी शराब की पूरी खेप मंगवाता है। इसे डबल करने के लिए उसमें केमिकल मिलाता है। उसके पास खाली बोतलें होती हैं, जिसमें शराब की रीपैकिंंग कराकर बेचता है। घटना के पीछे भी संजय का हाथ है। रिपोर्टर- शशि को शराब किसने दी थी?
सजदानंद- पास के ही भटगांव गांव का संजय नाम का लड़का है उसने शराब दी है। रिपोर्टर- क्या वह खुद पहुंचाने आया था?
सजदानंद- वह खुद नहीं आया था, उसको इन लोगों ने फोन किया था, उसने किसी लड़के से इनके पास भिजवाई थी। रिपोर्टर- आपको कैसे पता चला?
सजदानंद- चारो तरफ लोगों को पता है। भटगांव का संजय ही इन लोगों को शराब देता था। जब से घटना हुई है संजय फरार है। पुलिस भी उसे ढूंढ रही है। शराबबंदी के बाद पहली बार साइनाइड वाले जहर की तरह मौत बिहार में साल 2016 में पूर्ण शराबबंदी हुई है। शराबबंदी के बाद से कई बड़ी घटनाएं हुई हैं जिसमें देसी शराब पीने से लोगों की मौत हुई है। ऐसा पहली बार हुआ है जब अंग्रेजी शराब से एक साथ 30 सेकेंड में चार लोगों की मौत हुई है। पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर भी शराब से हुई मौत से हैरान हैं, वह भी समझ नहीं पा रहे हैं कि इतनी तेजी से मौत कैसे हो गई। हालांकि वह इसे केमिकल का बड़ा रिएक्शन मान रहे हैं जिससे साइनाइड जहर जैसे तेजी से मौत हुई है। बिहार में अबतक जहरीली शराब पीने से 354 लोगों की मौत हो चुकी है। बिहार में अब तक शराब से होने वाली मौतों का पैटर्न अलग रहा है। शराब पीने के कुछ देर बाद लोगों की आंखों की रोशनी कम होने लगती है। जिन लोगों पर इसका ज्यादा असर होता है, उनकी आंखों की रोशनी पूरी तरह चली जाती है। कई लोगों को सांस लेने में भी परेशानी होती है। जहरीली शराब पीने के असर के तुरंत बाद किसी की मौत नहीं हुई है। उन्हें इतना समय जरूर मिला कि उन्हें अस्पताल तक ले जाया जा सके। हालांकि, पहली बार ऐसा हुआ है कि बिहार में अंग्रेजी शराब पीने से मौत हुई है। इस मामले में मौत का पैटर्न भी बिल्कुल अलग रहा है। शराब गले के अंदर जाते ही मौत हो गई। जहर का नेचर साइनाइड के जैसा रहा है। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि शराबबंदी से अब तक बिहार में 354 लोगों की जहरीली शराब से मौत हो चुकी है।

