किसी के जाने के बाद भी उसकी आंखों से किसी की जिंदगी में रोशनी लौट सकती है। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से रविवार सुबह शंकरा आई फाउंडेशन के 50वें स्थापना वर्ष के अवसर पर शंकरा आई सेंटर, इंदौर ने नेत्रदान पखवाड़े के तहत जागरूकता वॉकेथॉन आयोजित की। राजवाड़ा से रीगल चौराहा तक आयोजित वॉकेथॉन में करीब डेढ़ सौ लोगों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने नेत्रदान के महत्व से जुड़े संदेश और नारों के जरिए लोगों को मृत्यु के बाद नेत्रदान का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया। भ्रम और झिझक दूर करने का प्रयास वॉकेथॉन का उद्देश्य केवल नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि इससे जुड़े भ्रम, मिथक और लोगों की झिझक को दूर करना भी रहा। प्रतिभागियों ने लोगों से अपील की कि वे नेत्रदान के विषय में अपने परिवार के सदस्यों से भी चर्चा करें और इस मानवीय पहल का हिस्सा बनें। नेत्रदान से किसी की जिंदगी में लौट सकती है रोशनी शंकरा आई सेंटर, इंदौर के चीफ मेडिकल ऑफिसर एवं कॉर्निया ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. अंकित देवकर ने कहा कि नेत्रदान महज दान नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति के जीवन में दोबारा रोशनी लाने का माध्यम है। उन्होंने कहा मृत्यु के बाद किया गया नेत्रदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नई दृष्टि और बेहतर जीवन की उम्मीद दे सकता है। समाज में नेत्रदान को लेकर जागरूकता बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है। एक व्यक्ति का नेत्रदान दो लोगों के लिए बन सकता है रोशनी की उम्मीद यूनिट हेड डॉ. के.के. सिंह ने कहा कि नेत्रदान को लेकर आज भी समाज में कई भ्रांतियां और संकोच मौजूद हैं। जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए लोगों तक सही जानकारी पहुंचाकर उन्हें इस नेक कार्य के लिए प्रेरित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति का नेत्रदान दो लोगों के जीवन में रोशनी लाने का माध्यम बन सकता है। जाने के बाद भी किसी के जीवन में उम्मीद छोड़ जाएं कार्यक्रम में संतोष मुछाल और वी.एस. मणि ने भी नेत्रदान के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नेत्रदान ऐसा संकल्प है, जिसके जरिए व्यक्ति के दुनिया से जाने के बाद भी किसी अन्य के जीवन में उम्मीद और रोशनी कायम रह सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने परिवार और परिचितों के साथ नेत्रदान को लेकर चर्चा करें और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसके लिए प्रेरित करें। कॉर्निया के जरिए दृष्टि लौटाने में मदद एक्सपर्ट के मुताबिक मृत्यु के बाद दान किए गए कॉर्निया का उपयोग कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से जूझ रहे लोगों की दृष्टि बहाल करने में मदद के लिए किया जा सकता है। इसलिए नेत्रदान को मानवता की सेवा से जुड़ा महत्वपूर्ण संकल्प माना जाता है। सेंटर ने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे नेत्रदान के महत्व को समझें, इसका संकल्प लें और परिवार, दोस्तों तथा समाज के अन्य लोगों तक भी इसका संदेश पहुंचाएं।

