कटिहार कभी अपनी जूट की पैदावार और मिलों के कारण ‘जूट नगरी’ के रूप में जाना जाता था, अब अपनी इस पहचान को फिर से स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है। इस बार रक्षाबंधन के अवसर पर कृषि आधारित संस्था ‘आत्मा किसान’ और स्थानीय महिलाएं मिलकर जूट से बनी राखियां तैयार कर रही हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है। इस पहल के तहत लगभग सौ महिलाओं को जूट के अन्य उत्पादों के साथ-साथ राखी बनाने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। ये महिलाएं अब जूट की राखियों को स्थानीय बाजारों तक पहुंचा रही हैं। यह कदम आने वाले समय में जूट से बने उत्पादों को घर-घर तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जूट से बनी ये राखियां न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि कटिहार की पारंपरिक ‘जूट नगरी’ वाली पहचान को भी नई दिशा दे रही हैं। यह प्रयास स्थानीय किसानों और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के साथ-साथ जिले की पुरानी पहचान को मजबूत कर रहा है। पर्यावरण को शुद्ध रखना उद्देश्य स्थानीय जूट किसान रवि शंकर ने इस पहल पर बात करते हुए कहा कि महिलाएं पर्यावरण को शुद्ध रखने के उद्देश्य से जूट की राखियां बना रही हैं, ताकि लोग प्लास्टिक से बनी राखियों का इस्तेमाल न करें। उन्होंने सभी बहनों से अपील की कि वे अपने भाइयों की कलाई पर प्राकृतिक जूट की राखी ही बांधें। राखी बनाने वाली पूजा ने भी इस बात पर जोर दिया कि इस रक्षाबंधन पर सभी जूट की राखियां बांधें, जो पूरी तरह प्राकृतिक हैं और इससे जूट उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। कटिहार कभी अपनी जूट की पैदावार और मिलों के कारण ‘जूट नगरी’ के रूप में जाना जाता था, अब अपनी इस पहचान को फिर से स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है। इस बार रक्षाबंधन के अवसर पर कृषि आधारित संस्था ‘आत्मा किसान’ और स्थानीय महिलाएं मिलकर जूट से बनी राखियां तैयार कर रही हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है। इस पहल के तहत लगभग सौ महिलाओं को जूट के अन्य उत्पादों के साथ-साथ राखी बनाने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। ये महिलाएं अब जूट की राखियों को स्थानीय बाजारों तक पहुंचा रही हैं। यह कदम आने वाले समय में जूट से बने उत्पादों को घर-घर तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जूट से बनी ये राखियां न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि कटिहार की पारंपरिक ‘जूट नगरी’ वाली पहचान को भी नई दिशा दे रही हैं। यह प्रयास स्थानीय किसानों और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के साथ-साथ जिले की पुरानी पहचान को मजबूत कर रहा है। पर्यावरण को शुद्ध रखना उद्देश्य स्थानीय जूट किसान रवि शंकर ने इस पहल पर बात करते हुए कहा कि महिलाएं पर्यावरण को शुद्ध रखने के उद्देश्य से जूट की राखियां बना रही हैं, ताकि लोग प्लास्टिक से बनी राखियों का इस्तेमाल न करें। उन्होंने सभी बहनों से अपील की कि वे अपने भाइयों की कलाई पर प्राकृतिक जूट की राखी ही बांधें। राखी बनाने वाली पूजा ने भी इस बात पर जोर दिया कि इस रक्षाबंधन पर सभी जूट की राखियां बांधें, जो पूरी तरह प्राकृतिक हैं और इससे जूट उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।

