देश की ‘मिलिनियम सिटी’ की पहचान रखने वाले गुरुग्राम में इस बार भी मानसून की बारिश आफत बनकर बरसी है। सड़कों पर घुटनों तक भरा पानी, घंटों लंबा ट्रैफिक जाम और थम चुकी रफ्तार ने प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है। लेकिन इस बार यह गुस्सा सिर्फ आम जनता तक सीमित नहीं है। गुरुग्राम को ग्लोबल बिजनेस हब बनाने वाले इंटरप्रन्योर और स्टार्टअप फाउंडर का दर्द भी अब सोशल मीडिया पर छलकने लगा है। हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश के बाद गोल्फ कोर्स रोड, सुभाष चौक, सोहना रोड और साइबर सिटी जैसे प्रमुख व्यावसायिक इलाकों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। सड़कों पर तैरती गाड़ियां और जलमग्न दफ्तरों को देखकर टेक और स्टार्टअप जगत के कई बड़े चेहरों ने अपनी भड़ास निकाली है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ और लिंक्डइन पर उद्यमियों ने लिखा कि जो शहर देश को सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले क्षेत्रों में से एक है, जहां दुनिया की दिग्गज फॉर्च्यून 500 कंपनियां मौजूद हैं, वहां की ड्रेनेज व्यवस्था इतनी लाचार क्यों है? ब्रांड इमेज और अर्थव्यवस्था को नुकसान उद्यमियों का कहना है कि गुरुग्राम में जलभराव केवल एक नागरिक समस्या नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा आर्थिक नुकसान भी है। बारिश के दिनों में कंपनियों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ घोषित करना पड़ता है, जिससे उत्पादकता प्रभावित होती है। इसके अलावा, जलभराव के कारण लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी सेवाएं पूरी तरह ठप हो जाती हैं। बिजनेस लीडर्स ने चेतावनी दी है कि यदि बुनियादी सुविधाएं ही दुरुस्त नहीं होंगी, तो नए स्टार्टअप और बहुराष्ट्रीय कंपनियां गुरुग्राम के बजाय दूसरे शहरों का रुख करने पर मजबूर होंगी। विदेशी निवेशकों के सामने भी शहर की छवि धूमिल हो रही है। एक प्रमुख स्टार्टअप अंकल मैथ लैब के फाउंडर सौरभ जैन ने अपनी पोस्ट में लिखा: “मैं एक साल पहले दिल्ली से गुरुग्राम शिफ्ट हुआ हूं, भले ही सिविक समस्याओं की वजह से गुरुग्राम का मज़ाक उड़ाया जाता हो, लेकिन मैं वापस दिल्ली नहीं जाना चाहता। सर, दुर्भाग्य से डबल इंजन फेल हो गया है। सीलिंग और कंस्ट्रक्शन तोड़ने से समस्या हल नहीं होगी। गुरुग्राम एक दिन ज़रूर बेहतर होगा। पिछले 4 दशकों में इसमें काफी सुधार हुआ है।” इस पोस्ट पर सैकड़ों अन्य बिजनेस लीडर्स, सीईओ और स्थानीय नागरिकों ने अपनी सहमति जताई और इसे रीपोस्ट किया है। सपने देखना बंद करें मणिपाल हॉस्पिटल के जनरल, लैप्रोस्कोपिक, बैरिएट्रिक और रोबोटिक सर्जरी के चेयरमैन डॉ. सुमित शाह ने सौरभ जैन की पोस्ट पर रिप्लाई करते हुए लिखा कि ‘डबल इंजन’ इथेनॉल पर चल रहा है। यह कोई जादू नहीं कर सकता। आइए, सपने देखना बंद करें!! दिल्ली गुरुग्राम से कहीं बेहतर यूएस स्टॉक्स इक्विटी निवेशक, म्यूचुअल फंड्स प्रोडक्ट और बिज़नेस लीडर राजन मिश्रा ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर, हरियाली, कनेक्टिविटी, मॉल, बेहतर और सस्ते स्कूल, सड़कें और डोमेस्टिक हेल्प के मामले में दिल्ली गुरुग्राम से कहीं बेहतर है; साथ ही, यहां रहना सस्ता भी है। गुरुग्राम में करियर के मौके ज़्यादा हैं, लेकिन आप दिल्ली से भी वहां आ-जा सकते हैं। गुरुग्राम में कम से कम अगले 10 सालों तक कोई सुधार नहीं होगा। वहां ड्रेनेज सिस्टम बिल्कुल भी नहीं है। इसे बेहतर बनाने के लिए सरकार को 20-30% घर गिराकर ड्रेनेज सिस्टम बनाना होगा। बेहतर शहर, लेकिन इन्फ्रास्ट्रक्चर सब बर्बाद कर देता है देश की पहली इंटीग्रेटेड ग्रीनफील्ड ऑरेंज स्मार्ट सिटी डेवलप करने वाली कंपनी के सीओओ अनुभव मित्तल ने बीजेपी हरियाणा की एक पोस्ट के जवाब में कहते हैं कि गुरुग्राम को बेहतर और विश्वस्तरीय बनाने की बजाय औसत दर्जे के शहरों से तुलना करते रहें। गुड़गांव के पास वैश्विक कंपनियां, विश्व स्तरीय विनिर्माण कंपनियां, प्रवासियों का रहना, विश्व स्तरीय आवासीय, शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं हैं.. लेकिन शहर का बुनियादी ढांचा यह सब बर्बाद कर देता है। फोकस घर पर करें।

