नालंदा यूनिवर्सिटी और गेट्स फाउंडेशन के बीच साझेदारी:ग्लोबल साउथ में नीति शोध को मिलेगी नई दिशा, संस्थागत मजबूती पर होगा काम

नालंदा यूनिवर्सिटी और गेट्स फाउंडेशन के बीच साझेदारी:ग्लोबल साउथ में नीति शोध को मिलेगी नई दिशा, संस्थागत मजबूती पर होगा काम

नालंदा विश्वविद्यालय और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के बीच रणनीतिक और अकादमिक साझेदारी को लेकर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह वैश्विक सहयोग नालंदा विश्वविद्यालय में स्थापित ‘कौटिल्य ग्लोबल सेंटर फॉर स्टेट कैपेसिटी’ के माध्यम से संचालित किया जाएगा। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य भारत सहित संपूर्ण ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील-उभरते देशों) में नीतिगत अनुसंधान, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और सार्वजनिक क्षमता निर्माण को नई दिशा देना है। ‘साझेदारी मील का पत्थर साबित होगी’
समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री और पीएमओ राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) रुद्रेंद्र टंडन और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ। कार्यक्रम में नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी और गेट्स फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क सुजमैन ने आधिकारिक दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि नालंदा प्राचीन काल से ही वैश्विक ज्ञान और अकादमिक उत्कृष्टता का केंद्र रहा है। यह आधुनिक साझेदारी मील का पत्थर साबित होगी। शोध कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने बताया कि यह अकादमिक सहयोग साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, प्रशासनिक नवाचार और संस्थागत नेतृत्व को मजबूत करने पर केंद्रित रहेगा। ‘कौटिल्य ग्लोबल सेंटर फॉर स्टेट कैपेसिटी’ के जरिए ऐसे प्रशिक्षण और शोध कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे जो विकासशील देशों की प्राथमिकताओं, स्वास्थ्य, सतत विकास और आर्थिक चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत कर सकें।
गेट्स फाउंडेशन के सीईओ मार्क सुजमैन ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय के साथ जुड़ना संस्थागत क्षमताओं को बढ़ाने और जन-कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को प्रभावी बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम है। नालंदा विश्वविद्यालय और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के बीच रणनीतिक और अकादमिक साझेदारी को लेकर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह वैश्विक सहयोग नालंदा विश्वविद्यालय में स्थापित ‘कौटिल्य ग्लोबल सेंटर फॉर स्टेट कैपेसिटी’ के माध्यम से संचालित किया जाएगा। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य भारत सहित संपूर्ण ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील-उभरते देशों) में नीतिगत अनुसंधान, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और सार्वजनिक क्षमता निर्माण को नई दिशा देना है। ‘साझेदारी मील का पत्थर साबित होगी’
समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री और पीएमओ राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) रुद्रेंद्र टंडन और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ। कार्यक्रम में नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी और गेट्स फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क सुजमैन ने आधिकारिक दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि नालंदा प्राचीन काल से ही वैश्विक ज्ञान और अकादमिक उत्कृष्टता का केंद्र रहा है। यह आधुनिक साझेदारी मील का पत्थर साबित होगी। शोध कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने बताया कि यह अकादमिक सहयोग साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, प्रशासनिक नवाचार और संस्थागत नेतृत्व को मजबूत करने पर केंद्रित रहेगा। ‘कौटिल्य ग्लोबल सेंटर फॉर स्टेट कैपेसिटी’ के जरिए ऐसे प्रशिक्षण और शोध कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे जो विकासशील देशों की प्राथमिकताओं, स्वास्थ्य, सतत विकास और आर्थिक चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत कर सकें।
गेट्स फाउंडेशन के सीईओ मार्क सुजमैन ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय के साथ जुड़ना संस्थागत क्षमताओं को बढ़ाने और जन-कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को प्रभावी बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम है।  

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