अगस्त की बारिश ने 10 साल का रिकॉर्ड तोड़ा:सतना में 26 दिनों में 22 इंच बरसात; मानसून सीजन में 36 इंच बरस चुके बदरा

अगस्त की बारिश ने 10 साल का रिकॉर्ड तोड़ा:सतना में 26 दिनों में 22 इंच बरसात; मानसून सीजन में 36 इंच बरस चुके बदरा

सतना जिले में अगस्त माह की बारिश ने पिछले 10 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस वर्ष 26 अगस्त तक 22 इंच वर्षा दर्ज की गई है, जबकि पूरे अगस्त 2016 में लगभग 21 इंच बारिश हुई थी। अगस्त के अभी चार दिन शेष हैं, जिससे बारिश का आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है। चालू मानसून सीजन में 1 जून से 26 अगस्त तक जिले में कुल 36 इंच बारिश दर्ज हुई है। इस अवधि तक औसत 29 इंच बारिश होनी चाहिए थी, इस प्रकार सामान्य से लगभग 7 इंच अधिक वर्षा हो चुकी है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी बारिश की संभावना जताई है। चालू मानसून की शुरुआत कमजोर रही थी। प्री-मानसून बारिश कम होने के साथ ही सतना समेत रीवा संभाग में मानसून ने 15 दिन की देरी से दस्तक दी थी। इस कारण जून में 2.8 इंच और जुलाई में केवल 12 इंच ही बारिश हो पाई थी, जो सामान्य से कम थी। जून-जुलाई की कमी पूरी हुई
हालांकि, 4 अगस्त से बंगाल की खाड़ी में एक के बाद एक तीन कम दबाव के क्षेत्र बनने और मानसून ट्रफ लाइन के पूर्वी मध्य प्रदेश में सक्रिय रहने से मानसून लगातार सक्रिय रहा। इसके परिणामस्वरूप कभी हल्की तो कभी मध्यम व तेज बारिश का दौर जारी रहा। सावन मास में हुई झमाझम बरसात ने जून-जुलाई की कमी को पूरा कर दिया और अब तक सामान्य से 7 इंच अधिक बारिश हो चुकी है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016 में भी भारी बारिश हुई थी। उस साल 9 जुलाई और 17 अगस्त को 24 घंटे के दौरान क्रमशः लगभग 10 और 9 इंच बारिश दर्ज की गई थी। 2016 की भारी बारिश के कारण शहर में जलभराव और नदी-नालों में उफान की स्थिति बन गई थी। भरहुत नगर में नाव चलानी पड़ी थी, और माधवगढ़ के सरिया टोला में सेना के जवानों ने हेलीकॉप्टर से कई लोगों को बचाया था। भारी बारिश के चलते जिला मुख्यालय का सड़क मार्ग से संपर्क पूरी तरह टूट गया था। बारिश का दौर जारी रहने की संभावना
मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि कम दबाव का क्षेत्र पूर्वी मप्र में बना हुआ है। वहीं मानसून ट्रफ लाइन भी बंगाल की खाड़ी से होकर पूर्वी मप्र होते हुए पंजाब तक जा रही है। इसी के प्रभाव के कारण कहीं हल्की से मध्यम तो कहीं तेज बारशि हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में एक और कम दवाब का क्षेत्र बनने जा रहा है। इसी के प्रभाव के कारण आगे भी इसी तरह से बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है।

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