सोमवार को कानपुर आरटीओ ऑफिस में जिला प्रशासन और क्राइम ब्रांच की संयुक्त छापेमारी के बाद पुलिस के पास आरटीओ विभाग की काली कमाई के स्त्रोत सामने आने लगे हैं। छापेमारी के बाद मंगलवार को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के एडीसीपी सुमित सुधाकर रामटेके के पास शिकायतकर्ता पहुंचे, जहां उन्होंने आरटीओ विभाग की काली कमाई के कुछ सबूत सौंपे है। शिकायतकर्ता ने बताया कि कुछ चुनिंदा एजेंट और अधिकारी, बाबू के सांठ-गांठ से पूरा गोरखधंधा चल रहा है। उन्होंने छापेमारी के बाद से फरार आरोपी हरेंद्र के दस्तख्त किए हुए कुछ एप्लीकेशन फार्म पुलिस को दिए। जिसमें बताया गया कि, एप्लीकेशन फार्म में हरेंद्र के साइन मात्र से बिना टेस्ट दिए लाइसेंस बन जाता था। वहीं पूछताछ में एजेंटों ने बताया कि रोजाना करीब 60 से 70 वाहन स्वामियों का ट्रायल लिया जाता है, जिसमें तकरीबन 50 लोगों के लाइसेंस रोजाना बनते हैं, बनने वाले लाइसेंस से औसतन वसूली 3 लाख रुपए की थी। जबकि परमिट, रिन्यूअल, वाहन पंजीकरण, ट्रांसफर समेत अन्य कार्यों की अलग–अलग रेट लिस्ट अलग है। परमानेंट लाइसेंस का वसूला जाता था 6 हजार पुलिस ने जब एजेंटों से पूछताछ की तो सामने आया कि बिना टेस्ट दिए प्रत्येक परमानेंट लाइसेंस मुहैया कराने का वाहन स्वामी से 6 हजार रुपए में टेंडर लेते थे, जिसमें एक हजार रुपए लर्निंग लाइसेंस बनाने के लिए वसूला जाता था। डील तय होने के बाद वाहन स्वामी को हरेंद्र और संजय के पास भेजा जाता था। जानकारी के अनुसार हरेंद्र पनकी स्थित ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक का टेंडर लेने वाली वॉरटेक इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का कर्मचारी है। हरेंद्र के संपर्क में आरटीओ का एजेंट संजय है, जो आरटीओ में काम कराने वाले एजेंटों का सरगना है। पकड़े गए सभी एजेंटों के मोबाइल में पुलिस को 100 से 150 गाड़ियों की फोटो, रजिस्ट्रेशन, लोगों के आधार कार्ड, पैनकार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस बरामद हुए है। मुकदमें में सात साल से कम सजा होने के कारण मंगलवार सुबह सभी 11 एजेंटों को थाने से जमानत मिल गई। अब जानिए किस तरह काम करता है सिंडिकेट पूछताछ में पकड़े गए एजेंटों ने बताया कि आरटीओ के अधिकारी और कर्मचारी किसी भी एजेंट से डील तय करने से बचते हैं। वह अपने भरोसेमंद एजेंटों के जरिए लाइसेंस, परमिट, गाड़ियों के रिन्यूअल, वाहन पंजीकरण, वाहन ट्रांसफर कराने के लिए सबकी अलग–अलग रेट लिस्ट तय है। लाइट व्हीकल लाइसेंस के लिए वाहन स्वामी से 6 हजार रुपए लिए जाते थे। कानपुर आरटीओ में कुछ चुनिंदा एजेंट है, जो सीधे अधिकारियों और बाबूओं के संपर्क में हैं। आरटीओ में सक्रिय एजेंट उन्हीं के पास वाहन स्वामी को लेकर जाते हैं। पुलिस हिरासत में एजेंटों ने बताया कि वह ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए हरेंद्र और संजय के बाद वाहन स्वामी को भेजते थे। प्रत्येक वाहन स्वामी से लर्निंग लाइसेंस बनवाने का एक हजार और परमानेंट लाइसेंस बनवाने का 6 हजार रुपया वसूला जाता था। डील तय होने के बाद हरेंद्र लाल पेन से अपना नाम लिखकर एप्लीकेशन फॉर्म पर साइन कर देता था। हरेंद्र का साइन किया हुआ एप्लीकेशन लेकर टेस्टिंग ट्रैक पर पहुंचने पर वाहन स्वामी की जगह सिंडिकेट में शामिल मेंबर टेस्ट देकर पास करा देते थे। इसके इतर डील तय न होने या रुपए कम देने पर हरेंद्र एप्लीकेशन फॉर्म पर ट्रायल लिख देता था। जिसके बाद वाहन स्वामी का फेल होना तय था। पुलिस के हाथ हरेंद्र के साइन किए हुए कुछ एप्लीकेशन फॉर्म भी हाथ लगे है। आरटीओ में छापेमारी के बाद से हरेंद्र और संजय फरार है, उनका मोबाइल स्विच ऑफ है। जिसके बाद आरोपियों की तलाश में टीमें लगी हुई हैं। मुकदमा दर्ज होने के बाद काम करते मिले कैश बाबू व सीनियर क्लर्क वहीं छापेमारी के बाद आरटीओ कार्यालय के कैश बाबू विपिन कुमार व सीनियर क्लर्क मधुर मिश्रा, एजेंट संजय और हरेंद्र समेत 15 लोगों के खिलाफ सर्वोदय नगर चौकी प्रभारी डालचंद्र की तहरीर पर काकादेव थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। हरेंद्र और संजय के अतिरिक्त 11 दलालों की गिरफ्तारी भी हो गई थी। नामजद बाबूओं को पुलिस खोजने में जुटी थी। वहीं दोनों नामजद बाबू आरटीओ कार्यालय में दिनभर विभागीय कार्य निपटाते रहे। काकादेव थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ पुलिस कार्य में बाधा उत्पन्न करना, धोखाधड़ी और संगठित होकर अपराध करने के आरोप में एफआईआर है। कैश बाबू विपिन कुमार छापेमारी के दौरान 7.50 हजार रुपए का कम पाए गए थे। जबकि चालान सेक्शन के सीनियर क्लर्क मधुर मिश्रा के पास से मिले एक लाख रुपए का हिसाब नहीं दे सके थे। टेस्टिंग ट्रैक पर लगे कैमरों की फुटेज जब्त की जाएगी पूरे मामले एडीसीपी सुमित सुधाकर रामटेके ने बताया कि लाइसेंस बनवाने में बड़े घपले की बात सामने आई है। जिसके कुछ प्रमाण भी मिले हैं। एक दिन में कितने लोग टेस्टिंग ट्रैक पर टेस्ट देने जाते थे ?, कितने पास होते थे ? और कितने लोगों का प्रतिदिन लाइसेंस बनता था ? इन सब की जांच के लिए टेस्टिंग ट्रैक में लगे सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर हासिल की जाएगी। इसके साथ ही छापेमारी में सामने आया है कि आरटीओ परिसर में बाहर की ओर तो सीसीटीवी फुटेज लगे हैं, लेकिन कार्यालय के अंदर सीसीटीवी नहीं है। परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज की भी डीवीआर जब्त की जाएगी। इसके साथ ही अधिकारियों, कर्मचारियों और एजेंटों की सांठ–गांठ का पता लगाने के लिए पकड़े गए एजेंटों के मोबाइल नंबरों की सीडीआर निकाली जा रही है, जिससे पता चल सके कि कौन अधिकारी, कर्मचारी इस गोरखधंधे में शामिल है। यह एजेंट पकड़े गए थे बृजमोहन, वीरेंद्र बहादुर सिंह, सौरभ तिवारी, धर्मेंद्र दिवाकर, आदेश कुमार बाजपेई, रामचंद्र शुक्ला, विपिन गुप्ता, दिलीप कुमार सिंह, विशाल अवस्थी, कमल धारियां, मनीष गौतम

