ग्रामीण बुनियादी ढांचे के दावों की पोल खुलने का सिलसिला जारी है। ताजा मामला पटना और बेगूसराय जिले के सीमावर्ती दियारा क्षेत्र का है। जहां मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत महज 3 महीने पहले बनी सड़क बाढ़ के पानी के तेज बहाव में ढह गई। सड़क का बड़ा हिस्सा बीच से कटकर बह चुका है, जिससे सड़क पर गहरे गड्ढे और मलबा जमा हो गया है। इसके कारण वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों को जान जोखिम में डालकर पैदल या साइकिल से निकलना पड़ रहा है। मौके पर लगे सरकारी सूचना बोर्ड के अनुसार योजना का नाम नया कसहा से पुराना कसहा डुमरा जंजीरा पथ है। जिसकी लंबाई 5.249 किलोमीटर (बिटुमिनस- 4.93 किमी, पीसीसी- 300 मीटर) है। संवेदक सुन्दर निर्माण और कार्यकारी एजेंसी कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल- बाढ़ है। हालांकि बोर्ड पर यह नहीं लिखा हुआ है कि यह सड़क कितने की लागत से बनी है, कब बनी है। बेगूसराय से संपर्क कटा निर्माण के महज कुछ ही महीनों भीतर सड़क के जमींदोज होने से निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सड़क के कटाव के कारण सड़क किनारे लगा बिजली विभाग का सीमेंटेड पोल पूरी तरह पानी की धार के मुहाने पर आ गया है और कभी भी कटकर नदी में गिर सकता है। इससे पूरे इलाके में बिजली आपूर्ति ठप होने और हादसे की आशंका बनी हुई है। यहां से गांवों की ओर बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा है। इस सड़क के ध्वस्त होने के कारण सिमरिया घाट से कसहा, डुमरा जंजीरा, सीतारामपुर, रचियाही, उलाव होते हुए बेगूसराय जाने का सड़क संपर्क भंग हो गया है। ग्रामीणों ने उठाए सवाल स्थानीय समाजिक कार्यकर्ता रौदी कुमार ने बताया कि 3 महीने पहले बनी सड़क पहली ही बाढ़ में पूरी तरह ध्वस्त हो गई। बिजली का पोल गिरने की कगार पर है और किसानों की फसलें डूब चुकी हैं। मोकामा सीओ और RWD के जेई आए थे, लेकिन कोई ठोस राहत कार्य शुरू नहीं हुआ। प्रशासन तुरंत इस पर कार्रवाई किया जाए। रामरतन निषाद ने बताया सड़क हर बार बनती है और हर साल बह जाती है। समझ नहीं आता कि कैसा निर्माण होता है। हमारे खेत-खलिहान डूब चुके हैं, मवेशियों के लिए चारा लाना भी मुश्किल हो गया है। देवन राय ने बताया कि खेती-किसानी ही हमारी आजीविका है। इस बार भी गंगा के पानी में पूरी फसल डूब गई। सिर पर सामान लादकर ले जाने की मजबूरी राजदीप कुमार ने बताया कि हम डुमरा दियारा में सामान सप्लाई करने जाते हैं। सड़क टूटने से गाड़ियां बंद हो गई हैं। अब सिर पर सामान लादकर पैदल जाना पड़ रहा है, जिससे व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार जहां सड़क ध्वस्त हुई, वह पटना जिला में पड़ता है। मोकामा ब्लॉक के CO और ग्रामीण कार्य विभाग के अभियंताओं ने स्थिति का जायजा तो लिया, लेकिन राहत या मरम्मत का काम शुरू नहीं कराया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत कार्य चलाए जाए, किसानों को फसल क्षतिपूर्ति का मुआवजा मिले, घटिया निर्माण करने वाले ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीण बुनियादी ढांचे के दावों की पोल खुलने का सिलसिला जारी है। ताजा मामला पटना और बेगूसराय जिले के सीमावर्ती दियारा क्षेत्र का है। जहां मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत महज 3 महीने पहले बनी सड़क बाढ़ के पानी के तेज बहाव में ढह गई। सड़क का बड़ा हिस्सा बीच से कटकर बह चुका है, जिससे सड़क पर गहरे गड्ढे और मलबा जमा हो गया है। इसके कारण वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों को जान जोखिम में डालकर पैदल या साइकिल से निकलना पड़ रहा है। मौके पर लगे सरकारी सूचना बोर्ड के अनुसार योजना का नाम नया कसहा से पुराना कसहा डुमरा जंजीरा पथ है। जिसकी लंबाई 5.249 किलोमीटर (बिटुमिनस- 4.93 किमी, पीसीसी- 300 मीटर) है। संवेदक सुन्दर निर्माण और कार्यकारी एजेंसी कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल- बाढ़ है। हालांकि बोर्ड पर यह नहीं लिखा हुआ है कि यह सड़क कितने की लागत से बनी है, कब बनी है। बेगूसराय से संपर्क कटा निर्माण के महज कुछ ही महीनों भीतर सड़क के जमींदोज होने से निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सड़क के कटाव के कारण सड़क किनारे लगा बिजली विभाग का सीमेंटेड पोल पूरी तरह पानी की धार के मुहाने पर आ गया है और कभी भी कटकर नदी में गिर सकता है। इससे पूरे इलाके में बिजली आपूर्ति ठप होने और हादसे की आशंका बनी हुई है। यहां से गांवों की ओर बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा है। इस सड़क के ध्वस्त होने के कारण सिमरिया घाट से कसहा, डुमरा जंजीरा, सीतारामपुर, रचियाही, उलाव होते हुए बेगूसराय जाने का सड़क संपर्क भंग हो गया है। ग्रामीणों ने उठाए सवाल स्थानीय समाजिक कार्यकर्ता रौदी कुमार ने बताया कि 3 महीने पहले बनी सड़क पहली ही बाढ़ में पूरी तरह ध्वस्त हो गई। बिजली का पोल गिरने की कगार पर है और किसानों की फसलें डूब चुकी हैं। मोकामा सीओ और RWD के जेई आए थे, लेकिन कोई ठोस राहत कार्य शुरू नहीं हुआ। प्रशासन तुरंत इस पर कार्रवाई किया जाए। रामरतन निषाद ने बताया सड़क हर बार बनती है और हर साल बह जाती है। समझ नहीं आता कि कैसा निर्माण होता है। हमारे खेत-खलिहान डूब चुके हैं, मवेशियों के लिए चारा लाना भी मुश्किल हो गया है। देवन राय ने बताया कि खेती-किसानी ही हमारी आजीविका है। इस बार भी गंगा के पानी में पूरी फसल डूब गई। सिर पर सामान लादकर ले जाने की मजबूरी राजदीप कुमार ने बताया कि हम डुमरा दियारा में सामान सप्लाई करने जाते हैं। सड़क टूटने से गाड़ियां बंद हो गई हैं। अब सिर पर सामान लादकर पैदल जाना पड़ रहा है, जिससे व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार जहां सड़क ध्वस्त हुई, वह पटना जिला में पड़ता है। मोकामा ब्लॉक के CO और ग्रामीण कार्य विभाग के अभियंताओं ने स्थिति का जायजा तो लिया, लेकिन राहत या मरम्मत का काम शुरू नहीं कराया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत कार्य चलाए जाए, किसानों को फसल क्षतिपूर्ति का मुआवजा मिले, घटिया निर्माण करने वाले ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई की जाए।

