नालंदा में निजी बस संचालकों की दबंगई, मारपीट और विभागीय उदासीनता के खिलाफ सरकारी बसों के ड्राइवर और संवाहक मंगलवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। बिहारशरीफ सरकारी बस स्टैंड से पटना रूट पर चलने वाली करीब 39-40 बसों का चक्का जाम हो गया है। कर्मचारियों ने साफ कह दिया है कि जब तक विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तब तक बसों का परिचालन ठप रहेगा। अचानक हुई इस हड़ताल से पटना जाने वाले दैनिक यात्रियों, छात्रों और मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। निजी बस संचालकों पर गुंडागर्दी और मारपीट का आरोप हड़ताल पर बैठे बस ड्राइवरों-संवाहकों का मुख्य आरोप पटना के कुम्हरार और अन्य इलाकों के निजी बस संचालकों (मुख्य रूप से मनोज कुमार नामक मालिक का जिक्र) पर है। चालक राम कुमार और गुड्डू कुमार ने बताया कि पिछले 15-20 दिनों से उन्हें पटना के तय रूटों पर गाड़ियां नहीं चलाने दी जा रही है। जब सरकारी बसें मल्टीमॉडल हब या गांधी मैदान की ओर से आती हैं, तो निजी बस संचालक उन्हें कुम्हरार, राजेंद्र नगर या भूतनाथ रोड से जबरन वापस घुमा देते हैं। बीच रास्ते में बसों को रोककर चालकों और संवाहकों के साथ गाली-गलौज और मारपीट की जाती है। यात्रियों को रास्ते में उतारने की दबंगई चालकों ने बताया कि निजी बस मालिक अपनी दबंगई के बल पर सरकारी बसों में बैठी सवारियों को बीच रास्ते (जैसे पहाड़ी के पास) जबरन उतार देते हैं, जिससे यात्रियों को भी भारी परेशानी होती है। चालक गुड्डू कुमार ने कहा कि हम लोग यहां सरकारी ड्यूटी करने और रोजी-रोटी कमाने आए हैं, किसी की गालियां सुनने या मार खाने नहीं आए हैं। विभाग हमें जिस रूट पर जाने का आदेश देता है, हम उसी पर जाएंगे। किसी प्राइवेट मालिक के कहने पर हम रूट क्यों बदलें? लेकिन इस मामले में हमारा विभाग पिछले 15 दिनों से कोई एक्शन नहीं ले रहा है। वेतन में देरी और 16 घंटे की ड्यूटी से आक्रोश हड़ताली कर्मचारियों में विभागीय कुव्यवस्था को लेकर भी भारी आक्रोश है। संवाहक राजेश कुमार ने बताया कि उन लोगों से 8 घंटे के बजाय 12 से 16 घंटे तक की ड्यूटी ली जा रही है। सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक काम करने के बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं मिलता। उन्होंने आरोप लगाया कि जब से ‘मौर्या कंपनी’ या ‘जय माता दी’ जैसी एजेंसियों के हाथों में संचालन गया है, तब से वेतन की स्थिति और खराब हो गई है। महीने की 1 तारीख के बजाय वेतन 28 या 30 तारीख को दिया जा रहा है। राजेश ने सवाल उठाया, “बिना समय पर पैसे मिले हम लोग अपने बाल-बच्चों का पेट कैसे पालें?” किराए का असंतुलन भी बनी बड़ी समस्या एक अन्य कर्मचारी लक्ष्मण कुमार ने बताया कि सरकारी बसों और प्राइवेट बसों के किराये में भारी अंतर है, जिसके कारण सरकारी बसों में सवारियां नहीं मिलतीं। प्राइवेट बसों का किराया 100 से 120 रुपए है, जबकि सरकारी बसों का किराया बढ़ाकर 148 से 172 रुपए (लगभग 150 रुपए) कर दिया गया है। महंगा किराया होने के कारण यात्री प्राइवेट बसों की ओर आकर्षित होते हैं। इसके बावजूद, विभाग कर्मचारियों पर निर्धारित टारगेट (टिकट काटने) का दबाव बनाता है, जो ऐसी परिस्थितियों में संभव नहीं है। यात्रियों की फजीहत, विभाग ने साधी चुप्पी अचानक हुई इस हड़ताल के कारण बस स्टैंड पहुंचे दर्जनों यात्रियों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ा। अपनी बेटी के साथ दिल्ली जाने के लिए पटना एयरपोर्ट जा रहे यात्री सुरेश कुमार ने बताया कि हमें यहां आकर पता चला कि हड़ताल है। अब हमें फ्लाइट पकड़नी है, इसलिए मजबूरी में किसी प्राइवेट साधन से जाना पड़ेगा। सरकार को इस मामले को जल्द सुलझाना चाहिए। पटना जाने वाले एक अन्य यात्री रणधीर दयाल ने भी अपनी परेशानी जाहिर की। वरीय अधिकारियों को सूचना दी गई है इस पूरे घटनाक्रम पर जब बिहारशरीफ बस स्टैंड के स्टेटिस्टिकल क्लर्क अरुण कुमार से बात की गई, तो उन्होंने हड़ताल की पुष्टि की। बताया कि पटना से आने वाली बसों के चालकों और संवाहकों के साथ मारपीट की घटनाएं हो रही हैं। कर्मचारियों का साफ कहना है कि वे मार खाने के लिए ड्यूटी नहीं करेंगे। इस पूरी स्थिति से वरीय पदाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। जब तक ऊपर से कोई निर्णय या पहल नहीं होती, तब तक हड़ताल और बसों का संचालन बंद रहेगा। विभाग की ओर से फिलहाल यात्रियों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण बनी हुई है। प्रशासन की ओर से भी अब तक इस विवाद को सुलझाने के लिए कोई पुलिसिया या प्रशासनिक पहल नजर नहीं आई है। नालंदा में निजी बस संचालकों की दबंगई, मारपीट और विभागीय उदासीनता के खिलाफ सरकारी बसों के ड्राइवर और संवाहक मंगलवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। बिहारशरीफ सरकारी बस स्टैंड से पटना रूट पर चलने वाली करीब 39-40 बसों का चक्का जाम हो गया है। कर्मचारियों ने साफ कह दिया है कि जब तक विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तब तक बसों का परिचालन ठप रहेगा। अचानक हुई इस हड़ताल से पटना जाने वाले दैनिक यात्रियों, छात्रों और मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। निजी बस संचालकों पर गुंडागर्दी और मारपीट का आरोप हड़ताल पर बैठे बस ड्राइवरों-संवाहकों का मुख्य आरोप पटना के कुम्हरार और अन्य इलाकों के निजी बस संचालकों (मुख्य रूप से मनोज कुमार नामक मालिक का जिक्र) पर है। चालक राम कुमार और गुड्डू कुमार ने बताया कि पिछले 15-20 दिनों से उन्हें पटना के तय रूटों पर गाड़ियां नहीं चलाने दी जा रही है। जब सरकारी बसें मल्टीमॉडल हब या गांधी मैदान की ओर से आती हैं, तो निजी बस संचालक उन्हें कुम्हरार, राजेंद्र नगर या भूतनाथ रोड से जबरन वापस घुमा देते हैं। बीच रास्ते में बसों को रोककर चालकों और संवाहकों के साथ गाली-गलौज और मारपीट की जाती है। यात्रियों को रास्ते में उतारने की दबंगई चालकों ने बताया कि निजी बस मालिक अपनी दबंगई के बल पर सरकारी बसों में बैठी सवारियों को बीच रास्ते (जैसे पहाड़ी के पास) जबरन उतार देते हैं, जिससे यात्रियों को भी भारी परेशानी होती है। चालक गुड्डू कुमार ने कहा कि हम लोग यहां सरकारी ड्यूटी करने और रोजी-रोटी कमाने आए हैं, किसी की गालियां सुनने या मार खाने नहीं आए हैं। विभाग हमें जिस रूट पर जाने का आदेश देता है, हम उसी पर जाएंगे। किसी प्राइवेट मालिक के कहने पर हम रूट क्यों बदलें? लेकिन इस मामले में हमारा विभाग पिछले 15 दिनों से कोई एक्शन नहीं ले रहा है। वेतन में देरी और 16 घंटे की ड्यूटी से आक्रोश हड़ताली कर्मचारियों में विभागीय कुव्यवस्था को लेकर भी भारी आक्रोश है। संवाहक राजेश कुमार ने बताया कि उन लोगों से 8 घंटे के बजाय 12 से 16 घंटे तक की ड्यूटी ली जा रही है। सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक काम करने के बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं मिलता। उन्होंने आरोप लगाया कि जब से ‘मौर्या कंपनी’ या ‘जय माता दी’ जैसी एजेंसियों के हाथों में संचालन गया है, तब से वेतन की स्थिति और खराब हो गई है। महीने की 1 तारीख के बजाय वेतन 28 या 30 तारीख को दिया जा रहा है। राजेश ने सवाल उठाया, “बिना समय पर पैसे मिले हम लोग अपने बाल-बच्चों का पेट कैसे पालें?” किराए का असंतुलन भी बनी बड़ी समस्या एक अन्य कर्मचारी लक्ष्मण कुमार ने बताया कि सरकारी बसों और प्राइवेट बसों के किराये में भारी अंतर है, जिसके कारण सरकारी बसों में सवारियां नहीं मिलतीं। प्राइवेट बसों का किराया 100 से 120 रुपए है, जबकि सरकारी बसों का किराया बढ़ाकर 148 से 172 रुपए (लगभग 150 रुपए) कर दिया गया है। महंगा किराया होने के कारण यात्री प्राइवेट बसों की ओर आकर्षित होते हैं। इसके बावजूद, विभाग कर्मचारियों पर निर्धारित टारगेट (टिकट काटने) का दबाव बनाता है, जो ऐसी परिस्थितियों में संभव नहीं है। यात्रियों की फजीहत, विभाग ने साधी चुप्पी अचानक हुई इस हड़ताल के कारण बस स्टैंड पहुंचे दर्जनों यात्रियों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ा। अपनी बेटी के साथ दिल्ली जाने के लिए पटना एयरपोर्ट जा रहे यात्री सुरेश कुमार ने बताया कि हमें यहां आकर पता चला कि हड़ताल है। अब हमें फ्लाइट पकड़नी है, इसलिए मजबूरी में किसी प्राइवेट साधन से जाना पड़ेगा। सरकार को इस मामले को जल्द सुलझाना चाहिए। पटना जाने वाले एक अन्य यात्री रणधीर दयाल ने भी अपनी परेशानी जाहिर की। वरीय अधिकारियों को सूचना दी गई है इस पूरे घटनाक्रम पर जब बिहारशरीफ बस स्टैंड के स्टेटिस्टिकल क्लर्क अरुण कुमार से बात की गई, तो उन्होंने हड़ताल की पुष्टि की। बताया कि पटना से आने वाली बसों के चालकों और संवाहकों के साथ मारपीट की घटनाएं हो रही हैं। कर्मचारियों का साफ कहना है कि वे मार खाने के लिए ड्यूटी नहीं करेंगे। इस पूरी स्थिति से वरीय पदाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। जब तक ऊपर से कोई निर्णय या पहल नहीं होती, तब तक हड़ताल और बसों का संचालन बंद रहेगा। विभाग की ओर से फिलहाल यात्रियों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण बनी हुई है। प्रशासन की ओर से भी अब तक इस विवाद को सुलझाने के लिए कोई पुलिसिया या प्रशासनिक पहल नजर नहीं आई है।

