बिहार दौरे पर संसदीय स्थायी समिति के सदस्य:महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना, भगवान बुद्ध के किए दर्शन; बिहार की कला, संस्कृति को जाना

बिहार दौरे पर संसदीय स्थायी समिति के सदस्य:महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना, भगवान बुद्ध के किए दर्शन; बिहार की कला, संस्कृति को जाना

बोधगया की धरती पर देश की संसदीय स्थायी समिति के सदस्यों ने भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली के दर्शन किए। परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति के अध्ययन भ्रमण के दौरान सांसदों ने विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर का दौरा किया। मंदिर में भगवान बुद्ध की प्रतिमा के दर्शन किए। इसके बाद पवित्र बोधि वृक्ष का अवलोकन किया। मंगलवार को समिति के सदस्य विष्णुपद मंदिर जाएंगे और भगवान श्री हरि विष्णु चरण का दर्शन करेंगे। समिति के सदस्यों ने बोधगया की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को करीब से जाना। उन्हें उस स्थल के बारे में जानकारी दी गई, जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इस दौरान बोधगया की वैश्विक पहचान और यहां हर साल आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बारे में भी जानकारी ली गई। डीएम ने किया स्वागत संसदीय स्थायी समिति के सभापति संजय कुमार झा के नेतृत्व में सांसदों का दल बोधगया पहुंचा। समिति में राजीव प्रताप रूडी, सुधा मूर्ति, गोला बाबूराव, नदीमुल हक, जग्गेश, के श्रीदेवसिंह झाला, एस कल्याणसुंदरम, एस फांगनोन कोन्याक, सुरेंद्र सिंह नागर, इमरान प्रतापगढ़ी, मियां अल्ताफ अहमद, प्रदान बरुआह, आरके चौधरी, अनिल फिरोजिया, तापिर गाओ, विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी, राहुल कस्वां सहित कई सांसद शामिल रहे। महाबोधि मंदिर परिसर में डीएम शशांक शुभंकर ने समिति के सदस्यों का स्वागत किया। उन्होंने सभापति और सांसदों को भगवान बुद्ध की प्रतिमा और स्मृति चिह्न भेंट किया। अधिकारियों ने समिति को महाबोधि मंदिर की ऐतिहासिकता और बोधगया की धार्मिक महत्ता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
बुद्ध की ज्ञानस्थली और बोधि वृक्ष बना आकर्षण महाबोधि मंदिर परिसर में संसदीय समिति के सदस्यों के लिए बोधि वृक्ष खास आकर्षण का केंद्र रहा। सदस्यों ने पवित्र वृक्ष का अवलोकन किया और इसके धार्मिक महत्व को जाना। अधिकारियों ने बताया कि बोधगया सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए महत्वपूर्ण आस्था का केंद्र है। यहां श्रीलंका, थाईलैंड, जापान, म्यांमार, भूटान, तिब्बत सहित कई देशों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। महाबोधि मंदिर परिसर इसी वैश्विक बौद्ध विरासत का प्रमुख केंद्र है।
बिहार की संस्कृति से भी रूबरू हुए सांसद महाबोधि मंदिर के दर्शन के बाद संसदीय समिति के सदस्यों और अतिथियों के सम्मान में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। बिहार की कला, संस्कृति और लोक परंपरा को मंच पर उतारा गया। कार्यक्रम की शुरुआत और प्रस्तुतियों में बिहार गौरव गान ने खास प्रभाव छोड़ा। इसके साथ ही बिहार की लोक परंपराओं पर आधारित गायन और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां पेश की गईं। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए बिहार की विविध लोक संस्कृति और समृद्ध विरासत की झलक दिखाई। सांसदों और अतिथियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की जमकर सराहना की। कलाकारों का उत्साहवर्धन भी किया गया। कार्यक्रम के जरिए समिति के सदस्यों को बिहार की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान के साथ उसकी सांस्कृतिक विविधता से भी परिचित कराया गया। संसदीय समिति का यह अध्ययन भ्रमण केवल महाबोधि मंदिर के दर्शन तक सीमित नहीं रहा। इसके जरिए गयाजी और बोधगया की पर्यटन क्षमता, धार्मिक महत्व और सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने का मौका मिला। बोधगया की वैश्विक पहचान को देखते हुए समिति के सदस्यों का यह दौरा पर्यटन और संस्कृति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बोधगया की धरती पर देश की संसदीय स्थायी समिति के सदस्यों ने भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली के दर्शन किए। परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति के अध्ययन भ्रमण के दौरान सांसदों ने विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर का दौरा किया। मंदिर में भगवान बुद्ध की प्रतिमा के दर्शन किए। इसके बाद पवित्र बोधि वृक्ष का अवलोकन किया। मंगलवार को समिति के सदस्य विष्णुपद मंदिर जाएंगे और भगवान श्री हरि विष्णु चरण का दर्शन करेंगे। समिति के सदस्यों ने बोधगया की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को करीब से जाना। उन्हें उस स्थल के बारे में जानकारी दी गई, जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इस दौरान बोधगया की वैश्विक पहचान और यहां हर साल आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बारे में भी जानकारी ली गई। डीएम ने किया स्वागत संसदीय स्थायी समिति के सभापति संजय कुमार झा के नेतृत्व में सांसदों का दल बोधगया पहुंचा। समिति में राजीव प्रताप रूडी, सुधा मूर्ति, गोला बाबूराव, नदीमुल हक, जग्गेश, के श्रीदेवसिंह झाला, एस कल्याणसुंदरम, एस फांगनोन कोन्याक, सुरेंद्र सिंह नागर, इमरान प्रतापगढ़ी, मियां अल्ताफ अहमद, प्रदान बरुआह, आरके चौधरी, अनिल फिरोजिया, तापिर गाओ, विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी, राहुल कस्वां सहित कई सांसद शामिल रहे। महाबोधि मंदिर परिसर में डीएम शशांक शुभंकर ने समिति के सदस्यों का स्वागत किया। उन्होंने सभापति और सांसदों को भगवान बुद्ध की प्रतिमा और स्मृति चिह्न भेंट किया। अधिकारियों ने समिति को महाबोधि मंदिर की ऐतिहासिकता और बोधगया की धार्मिक महत्ता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
बुद्ध की ज्ञानस्थली और बोधि वृक्ष बना आकर्षण महाबोधि मंदिर परिसर में संसदीय समिति के सदस्यों के लिए बोधि वृक्ष खास आकर्षण का केंद्र रहा। सदस्यों ने पवित्र वृक्ष का अवलोकन किया और इसके धार्मिक महत्व को जाना। अधिकारियों ने बताया कि बोधगया सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए महत्वपूर्ण आस्था का केंद्र है। यहां श्रीलंका, थाईलैंड, जापान, म्यांमार, भूटान, तिब्बत सहित कई देशों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। महाबोधि मंदिर परिसर इसी वैश्विक बौद्ध विरासत का प्रमुख केंद्र है।
बिहार की संस्कृति से भी रूबरू हुए सांसद महाबोधि मंदिर के दर्शन के बाद संसदीय समिति के सदस्यों और अतिथियों के सम्मान में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। बिहार की कला, संस्कृति और लोक परंपरा को मंच पर उतारा गया। कार्यक्रम की शुरुआत और प्रस्तुतियों में बिहार गौरव गान ने खास प्रभाव छोड़ा। इसके साथ ही बिहार की लोक परंपराओं पर आधारित गायन और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां पेश की गईं। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए बिहार की विविध लोक संस्कृति और समृद्ध विरासत की झलक दिखाई। सांसदों और अतिथियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की जमकर सराहना की। कलाकारों का उत्साहवर्धन भी किया गया। कार्यक्रम के जरिए समिति के सदस्यों को बिहार की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान के साथ उसकी सांस्कृतिक विविधता से भी परिचित कराया गया। संसदीय समिति का यह अध्ययन भ्रमण केवल महाबोधि मंदिर के दर्शन तक सीमित नहीं रहा। इसके जरिए गयाजी और बोधगया की पर्यटन क्षमता, धार्मिक महत्व और सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने का मौका मिला। बोधगया की वैश्विक पहचान को देखते हुए समिति के सदस्यों का यह दौरा पर्यटन और संस्कृति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

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