नीतीश की विरासत का असली वारिस कौन?:निशांत, सम्राट या कुशवाहा; 3 दावेदार, किसके पास कितनी ताकत, जानें

नीतीश की विरासत का असली वारिस कौन?:निशांत, सम्राट या कुशवाहा; 3 दावेदार, किसके पास कितनी ताकत, जानें

नीतीश कुमार की विरासत का असली उत्तराधिकारी कौन है- निशांत कुमार, सम्राट चौधरी या उपेंद्र कुशवाहा। आज इसी सवाल का जवाब बूझे की नाही में समझेंगे…। सवाल-1ः नीतीश कुमार की विरासत और उत्तराधिकारी की चर्चा कैसे शुरू हो गई? जवाबः इस चर्चा की शुरुआत उपेंद्र कुशवाहा ने की है। सबसे पहले 20 अगस्त को उन्होंने नीतीश की विरासत पर अपना दांवा ठोका। उसके बाद अलग-अलग नेताओं के बयान सामने आए। सिलसिलेवार तरीके से जानिए… BJP ने विरासत की बहस से किया किनारा BJP ने न तो कुशवाहा के दावे का समर्थन किया और न ही निशांत के नाम पर खुलकर हामी भरी। पार्टी ने सिर्फ इतना कहा कि नीतीश कुमार अभी सक्रिय हैं, ऐसे में उत्तराधिकारी की चर्चा फिलहाल जल्दबाजी है। सवाल-2ः आखिर नीतीश की विरासत है क्या? जवाबः पिछले 30 सालों की बिहार की राजनीति को देखें तो यहां हमेशा तीसरी धुरी रही है। तीसरी धुरी का नेतृत्व नीतीश कुमार करते हैं। 16% से ज्यादा वोट बैंक हमेशा नीतीश कुमार के साथ रहा है। उनके वोटरों पर उनके पाला बदलने का कोई फर्क नहीं पड़ता। वह बिहार में कुर्मी, EBC और महिलाओं के सबसे बड़े नेता हैं। इस समुदाय के लोगों के लिए नीतीश कुमार प्राइड इश्यू हैं। यही वजह है कि बिहार की सभी पार्टियां नीतीश कुमार को अपने साथ रखना चाहती है। वोट बैंक ही नहीं, नीतीश के साथ जुड़ती है ये 3 चीजें 1. ‘सुशासन बाबू’ की छवि 2. महिलाओं को दी ताकत 3. विकास मॉडल और सीमाएं सवाल-3ः फिर असली उत्तराधिकारी कौन? जवाबः इसका सीधा जवाब देना अभी जल्दीबाजी होगी। क्योंकि JDU अब नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को धीरे-धीरे आगे कर रही है। वहीं, सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार खुद मुख्यमंत्री बनवाकर आगे कर चुके हैं। जबकि, उपेंद्र कुशवाहा लगातार अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। तीनों नेताओं में कौन असली उत्तराधिकारी हो सकता है, इसे उनकी मेरिट के आधार पर समझिए… निशांत कुमारः JDU धीरे-धीरे ब्रांडिंग में जुटी, दावा सबसे मजबूत नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार JDU में एक्टिव हो गए हैं। 8 मार्च 2026 को पार्टी जॉइन की और 8 मई को सम्राट कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री बने। वह लगातार सरकारी हॉस्पिटलों का दौरा कर रहे हैं और सरकार की योजनाओं को जमीन पर उतारने में जुटे हैं। निशांत कुमार के पीछे धीरे-धीरे पार्टी एकजुट होती दिख रही है। पार्टी ने हाल में उनके मंत्री बनने के 100 दिन पूरा होने पर जश्न मनाया और उनके कामकाज की रिपोर्ट पेश की। यह एक तरह से लोगों को मैसेज था कि JDU के भविष्य निशांत कुमार ही हैं। सम्राट चौधरीः नीतीश, संजय-ललन का समर्थन, BJP का पूरा सपोर्ट 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री बने। उनको CM बनाने में नीतीश कुमार का अहम हाथ माना जाता है। इसकी तस्दीक केंद्रीय मंत्री और JDU के सीनियर नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के 16 मई के बयान से भी मिलती है। ललन सिंह ने कहा था, ‘जब नीतीश कुमार ने कमान छोड़ने का फैसला किया, तो उन्होंने खुद तय किया कि सम्राट चौधरी उनके उत्तराधिकारी होंगे। वह सिर्फ भाजपा की पसंद नहीं थे, बल्कि उन्हें खुद नीतीश कुमार ने आशीर्वाद दिया था।’ ललन सिंह के बयानों को डिकोड करें तो साफ है कि नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी सम्राट चौधरी ही हैं। हालांकि, नीतीश कुमार ने अब तक ऐसा कुछ कहा नहीं है, लेकिन मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से पहले जब वह बिहार भ्रमण पर थे तो उनकी बॉडी लैंग्वेज ऐसी ही इशारा करती थी। नीतीश कुमार हर सभा में सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखकर लोगों से आशीर्वाद दिलवाते थे। उनकी इस तरह की फोटो को सम्राट के उत्तराधिकारी के तौर पर ही देखा गया था। उपेंद्र कुशवाहाः खुद से दावा करते हैं, बार-बार पाला बदलने से निगेटिव इम्पैक्ट कुशवाहा खुद से अपने को नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी बताते हैं। वैसे उनका यह दावा पूरी तरह हवा में नहीं है। उनका नीतीश के साथ संबंध काफी पुराना है। वे JDU में रहे, अलग हुए, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी बनाई, फिर 2021 में उसका JDU में विलय किया। JDU के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष बने और बाद में फिर नीतीश से अलग हो गए। यही उनकी ताकत और कमजोरी दोनों है। सवाल-4: कुशवाहा खुद को नीतीश का उत्तराधिकारी क्यों बता रहे? जवाबः उपेंद्र कुशवाहा की राजनीति का मुख्य आधार ‘कुशवाहा/कोइरी’ वोट बैंक है। भाजपा ने उसी समाज से आने वाले सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बना दिया है। इससे उपेंद्र कुशवाहा को सबसे बड़ा खतरा अपनी राजनैतिक प्रासंगिकता खोने का है। अब तक कुशवाहा समाज नीतीश कुमार के विरोध में या अपने स्वतंत्र नेतृत्व के लिए उपेंद्र कुशवाहा के पीछे लामबंद होता था। लेकिन जब भाजपा ने इसी समाज के सम्राट चौधरी को सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप दी, तो आम कुशवाहा वोटर स्वाभाविक रूप से सत्ता और बड़ी पार्टी (भाजपा) की तरफ शिफ्ट हो जाएगा। एक ही जातिगत समीकरण से दो बड़े नेता NDA में नहीं चल सकते। सम्राट चौधरी के CM बनने के बाद भाजपा को उपेंद्र कुशवाहा की ‘बैसाखी’ या उनकी छोटी पार्टी (राष्ट्रीय लोक मोर्चा) की वैसी जरूरत नहीं रह जाएगी, जैसी पहले थी। नीतीश कुमार की विरासत का असली उत्तराधिकारी कौन है- निशांत कुमार, सम्राट चौधरी या उपेंद्र कुशवाहा। आज इसी सवाल का जवाब बूझे की नाही में समझेंगे…। सवाल-1ः नीतीश कुमार की विरासत और उत्तराधिकारी की चर्चा कैसे शुरू हो गई? जवाबः इस चर्चा की शुरुआत उपेंद्र कुशवाहा ने की है। सबसे पहले 20 अगस्त को उन्होंने नीतीश की विरासत पर अपना दांवा ठोका। उसके बाद अलग-अलग नेताओं के बयान सामने आए। सिलसिलेवार तरीके से जानिए… BJP ने विरासत की बहस से किया किनारा BJP ने न तो कुशवाहा के दावे का समर्थन किया और न ही निशांत के नाम पर खुलकर हामी भरी। पार्टी ने सिर्फ इतना कहा कि नीतीश कुमार अभी सक्रिय हैं, ऐसे में उत्तराधिकारी की चर्चा फिलहाल जल्दबाजी है। सवाल-2ः आखिर नीतीश की विरासत है क्या? जवाबः पिछले 30 सालों की बिहार की राजनीति को देखें तो यहां हमेशा तीसरी धुरी रही है। तीसरी धुरी का नेतृत्व नीतीश कुमार करते हैं। 16% से ज्यादा वोट बैंक हमेशा नीतीश कुमार के साथ रहा है। उनके वोटरों पर उनके पाला बदलने का कोई फर्क नहीं पड़ता। वह बिहार में कुर्मी, EBC और महिलाओं के सबसे बड़े नेता हैं। इस समुदाय के लोगों के लिए नीतीश कुमार प्राइड इश्यू हैं। यही वजह है कि बिहार की सभी पार्टियां नीतीश कुमार को अपने साथ रखना चाहती है। वोट बैंक ही नहीं, नीतीश के साथ जुड़ती है ये 3 चीजें 1. ‘सुशासन बाबू’ की छवि 2. महिलाओं को दी ताकत 3. विकास मॉडल और सीमाएं सवाल-3ः फिर असली उत्तराधिकारी कौन? जवाबः इसका सीधा जवाब देना अभी जल्दीबाजी होगी। क्योंकि JDU अब नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को धीरे-धीरे आगे कर रही है। वहीं, सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार खुद मुख्यमंत्री बनवाकर आगे कर चुके हैं। जबकि, उपेंद्र कुशवाहा लगातार अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। तीनों नेताओं में कौन असली उत्तराधिकारी हो सकता है, इसे उनकी मेरिट के आधार पर समझिए… निशांत कुमारः JDU धीरे-धीरे ब्रांडिंग में जुटी, दावा सबसे मजबूत नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार JDU में एक्टिव हो गए हैं। 8 मार्च 2026 को पार्टी जॉइन की और 8 मई को सम्राट कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री बने। वह लगातार सरकारी हॉस्पिटलों का दौरा कर रहे हैं और सरकार की योजनाओं को जमीन पर उतारने में जुटे हैं। निशांत कुमार के पीछे धीरे-धीरे पार्टी एकजुट होती दिख रही है। पार्टी ने हाल में उनके मंत्री बनने के 100 दिन पूरा होने पर जश्न मनाया और उनके कामकाज की रिपोर्ट पेश की। यह एक तरह से लोगों को मैसेज था कि JDU के भविष्य निशांत कुमार ही हैं। सम्राट चौधरीः नीतीश, संजय-ललन का समर्थन, BJP का पूरा सपोर्ट 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री बने। उनको CM बनाने में नीतीश कुमार का अहम हाथ माना जाता है। इसकी तस्दीक केंद्रीय मंत्री और JDU के सीनियर नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के 16 मई के बयान से भी मिलती है। ललन सिंह ने कहा था, ‘जब नीतीश कुमार ने कमान छोड़ने का फैसला किया, तो उन्होंने खुद तय किया कि सम्राट चौधरी उनके उत्तराधिकारी होंगे। वह सिर्फ भाजपा की पसंद नहीं थे, बल्कि उन्हें खुद नीतीश कुमार ने आशीर्वाद दिया था।’ ललन सिंह के बयानों को डिकोड करें तो साफ है कि नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी सम्राट चौधरी ही हैं। हालांकि, नीतीश कुमार ने अब तक ऐसा कुछ कहा नहीं है, लेकिन मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से पहले जब वह बिहार भ्रमण पर थे तो उनकी बॉडी लैंग्वेज ऐसी ही इशारा करती थी। नीतीश कुमार हर सभा में सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखकर लोगों से आशीर्वाद दिलवाते थे। उनकी इस तरह की फोटो को सम्राट के उत्तराधिकारी के तौर पर ही देखा गया था। उपेंद्र कुशवाहाः खुद से दावा करते हैं, बार-बार पाला बदलने से निगेटिव इम्पैक्ट कुशवाहा खुद से अपने को नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी बताते हैं। वैसे उनका यह दावा पूरी तरह हवा में नहीं है। उनका नीतीश के साथ संबंध काफी पुराना है। वे JDU में रहे, अलग हुए, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी बनाई, फिर 2021 में उसका JDU में विलय किया। JDU के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष बने और बाद में फिर नीतीश से अलग हो गए। यही उनकी ताकत और कमजोरी दोनों है। सवाल-4: कुशवाहा खुद को नीतीश का उत्तराधिकारी क्यों बता रहे? जवाबः उपेंद्र कुशवाहा की राजनीति का मुख्य आधार ‘कुशवाहा/कोइरी’ वोट बैंक है। भाजपा ने उसी समाज से आने वाले सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बना दिया है। इससे उपेंद्र कुशवाहा को सबसे बड़ा खतरा अपनी राजनैतिक प्रासंगिकता खोने का है। अब तक कुशवाहा समाज नीतीश कुमार के विरोध में या अपने स्वतंत्र नेतृत्व के लिए उपेंद्र कुशवाहा के पीछे लामबंद होता था। लेकिन जब भाजपा ने इसी समाज के सम्राट चौधरी को सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप दी, तो आम कुशवाहा वोटर स्वाभाविक रूप से सत्ता और बड़ी पार्टी (भाजपा) की तरफ शिफ्ट हो जाएगा। एक ही जातिगत समीकरण से दो बड़े नेता NDA में नहीं चल सकते। सम्राट चौधरी के CM बनने के बाद भाजपा को उपेंद्र कुशवाहा की ‘बैसाखी’ या उनकी छोटी पार्टी (राष्ट्रीय लोक मोर्चा) की वैसी जरूरत नहीं रह जाएगी, जैसी पहले थी।  

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