‘हाथी चले बाजार-कुत्ता भौंके हजार’ डॉयलॉग वाले राजेश को जानिए:BPSC से एंट्री , प्रमोशन पाकर बने IAS, विवादित बोल के 5 घंटे बाद हुए सस्पेंड

‘हाथी चले बाजार-कुत्ता भौंके हजार’ डॉयलॉग वाले राजेश को जानिए:BPSC से एंट्री , प्रमोशन पाकर बने IAS, विवादित बोल के 5 घंटे बाद हुए सस्पेंड

“एक कहावत आपने सुनी होगी, हाथी चले बाजार तो कुत्ते भौंके हजार।” IAS अधिकारी और BPSC (बिहार लोक सेवा आयोग) के एग्जाम कंट्रोलर रहे राजेश कुमार सिंह ने यह कहावत सोमवार दोपहर को पटना के गर्दनीबाग में धरना-प्रदर्शन कर रहे छात्रों को लेकर कही। मामले ने तूल पकड़ा तो उन्हें माफी मांगनी पड़ी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने निर्देश पर राजेश को विवादित बोल के 5 घंटे बाद सस्पेंड कर दिया गया। IAS अधिकारी राजेश कुमार सिंह कौन हैं? कहां के रहने वाले हैं? परीक्षा नियंत्रक के पद पर रहते हुए क्या किया है? पढ़िए रिपोर्ट…। कौन हैं IAS अधिकारी राजेश कुमार सिंह? 2014 बैच के IAS अधिकारी राजेश कुमार सिंह सोमवार शाम तक बिहार लोक सेवा आयोग में परीक्षा नियंत्रक के पद पर तैनात थे। 39वीं BPSC की परीक्षा पास कर बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी बने थे। नवंबर-दिसंबर 2024 में इनका प्रमोशन आईएएस में हुआ था। 20 अक्टूबर 2024 को एक्जाम कंट्रोलर की जिम्मेदारी मिली थी। भूगर्भशास्त्र (Geology) से ग्रेजुएशन किया था। मूल रूप से बिहार के सारण जिले के रहने वाले हैं। इनके पिता लाल जी सिंह साइंस कॉलेज पटना में प्रोफेसर थे। परीक्षा नियंत्रक रहते हुए 122 विज्ञापन जारी किए राजेश सिंह ने परीक्षा नियंत्रक के तौर पर 122 से अधिक विज्ञापन जारी किए। उनके कार्यकाल में BPSC की कई बड़ी भर्ती प्रक्रिया में आगे बढ़ीं। BPSC के आधिकारिक परीक्षा कैलेंडर में अक्टूबर 2024 के बाद की कई प्रमुख भर्तियों का रिकॉर्ड दर्ज है। ये हैं.. राजेश सिंह के परीक्षा नियंत्रक रहने के दौरान विवाद में आईं ये 5 परीक्षाएं 70वीं BPSC संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा: दिसंबर 2024 में परीक्षा हुई थी। इसमें पेपर लीक, बापू परीक्षा केंद्र पर गड़बड़ी और नॉर्मलाइजेशन के आरोप लगाकर छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। TRE-4: सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के लिए होने वाली यह परीक्षा विवादों में है। परीक्षा लिए जाने में देरी के खिलाफ छात्रों ने प्रदर्शन किया। सरकार दो परीक्षा लेने जा रही है। छात्रों की मांग है कि पहले की तरह एक परीक्षा ली जाए। 22 जुलाई 2024 में TRE-3 की परीक्षा ली गई थी। दो साल हो गए, अब तक TRE-4 की परीक्षा नहीं हुई है। 71वीं BPSC संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा: सितंबर 2025 में 71वीं BPSC के लिए प्रीलिम्स परीक्षा ली गई। इस दौरान कुछ केंद्रों पर बायोमेट्रिक जांच न होने और परीक्षा तिथि को लेकर अफवाहें फैली। अभी तक मेंस परीक्षा नहीं ली गई है। लोअर डिवीजन क्लर्क परीक्षा: जनवरी 2026 में टाइपिंग और कंप्यूटर टेस्ट लिया गया। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन कराया गया। बाद में BPSC ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए इसे रद्द कर दिया। AEDO परीक्षा: सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा अप्रैल 2026 में हुई थी। परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक गड़बड़ी, ब्लूटूथ के इस्तेमाल और नकल के मामलों के खुलासे के बाद BPSC ने परीक्षा रद्द कर दी। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) इस मामले की जांच कर रही है और कई गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं। अब जानिए वह बयान, जिसके चलते मुसीबत में फंसे राजेश कुमार सिंह राजेश कुमार सिंह सोमवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। उन्होंने कहा, “TRE-4 की परीक्षा दिसंबर या जनवरी में हो सकती है। परीक्षा दो चरणों में होगी- PT और Mains। इसमें नेगेटिव मार्किंग भी रहेगी।” छात्र दो परीक्षा लिए जाने का विरोध कर रहे हैं। उनकी मांग है कि एक ही परीक्षा ली जाए। इसको लेकर पटना के गर्दनीबाग में छात्रों का धरना-प्रदर्शन चल रहा है। पत्रकारों ने राजेश कुमार सिंह से इस संबंध में प्रश्न किया। उन्होंने जवाब दिया, “एक कहावत आपने सुनी होगी, हाथी चले बाजार तो कुत्ते भौंके हजार।” राजेश सिंह के इस बयान के बाद प्रदर्शन कर रहे छात्र भड़क गए। छात्रों ने ‘BPSC चोर है’ के नारे लगाए। छात्रों ने कहा, “यही कुत्ता एक दिन आपके आयोग का अधिकारी बनेगा। एक बार कॉकरोच बोला गया था, तो प्रधान जी चले गए। अब सचिव की नौकरी जाएगी।” प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मांग किया कि BPSC एग्जामिनेशन कंट्रोलर राजेश कुमार सिंह माफी मांगें, नहीं तो अगला आंदोलन BPSC गेट पर होगा। विवाद बढ़ने के बाद BPSC एग्जाम कंट्रोलर ने वीडियो जारी कर माफी मांगी। वीडियो जारी करके कहा, “मेरे बयान को सोशल मीडिया पर तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया। मेरा किसी व्यक्ति विशेष और समूह को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था। अगर किसी के भावना को इससे ठेस पहुंची है तो मैं इसके लिए खेद व्यक्त करता हूं।” देर शाम बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए आईएएस राजेश कुमार सिंह को सस्पेंड करने का निर्देश दिया। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए गए। शाम को राजेश सस्पेंड कर दिए गए। सोशल मीडिया पर ट्रेंड में आया ‘कुत्ता जनता पार्टी’ राजेश सिंह के बयान के बाद छात्रों और सोशल मीडिया यूजर्स में नाराजगी दिखी। आंदोलन से जुड़े अभ्यर्थियों ने व्यंग्यात्मक तरीके से ‘कुत्ता जनता पार्टी’ (KGP) नाम से सोशल मीडिया अभियान शुरू कर दिया। चंद मिनट में यह ट्रेंड करने लगा। छात्रों ने कहा कि जिन युवाओं को सरकारी नौकरी की तैयारी करते हुए वर्षों बीत जाते हैं, उनकी समस्याओं और सवालों को इस तरह की भाषा में संबोधित करना उचित नहीं है। यह विवाद ऐसे समय हुआ है जब गर्दनीबाग में BPSC और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थी लगातार आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में बदलाव और लंबित भर्तियों को समय पर पूरा करना शामिल है। छात्र आंदोलन बनाम BPSC: विवाद की नई कड़ी दरअसल, यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ दिनों से पटना में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन चल रहा है। TRE-4 के अलावा 70वीं BPSC परीक्षा, परीक्षा प्रक्रिया, कथित अनियमितताओं और अन्य भर्तियों को लेकर भी छात्र सवाल उठा रहे हैं। 18 अगस्त से गर्दनीबाग में अनिश्चितकालीन आंदोलन की घोषणा की गई थी। छात्रों ने TRE-4 की भर्ती, एक चरण में परीक्षा, पारदर्शिता और लंबित भर्तियों से जुड़े मुद्दे उठाए थे। अब परीक्षा नियंत्रक के बयान और उसके बाद सरकार की कार्रवाई ने इस आंदोलन को एक नया राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ दे दिया है। एक तरफ BPSC अपनी परीक्षा प्रक्रिया को सही बता रहा है, दूसरी तरफ छात्र आयोग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में राजेश कुमार सिंह पर कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इससे गर्दनीबाग का छात्र आंदोलन शांत होगा या भर्ती और परीक्षा से जुड़ी बाकी मांगों को लेकर आंदोलन और तेज होगा। “एक कहावत आपने सुनी होगी, हाथी चले बाजार तो कुत्ते भौंके हजार।” IAS अधिकारी और BPSC (बिहार लोक सेवा आयोग) के एग्जाम कंट्रोलर रहे राजेश कुमार सिंह ने यह कहावत सोमवार दोपहर को पटना के गर्दनीबाग में धरना-प्रदर्शन कर रहे छात्रों को लेकर कही। मामले ने तूल पकड़ा तो उन्हें माफी मांगनी पड़ी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने निर्देश पर राजेश को विवादित बोल के 5 घंटे बाद सस्पेंड कर दिया गया। IAS अधिकारी राजेश कुमार सिंह कौन हैं? कहां के रहने वाले हैं? परीक्षा नियंत्रक के पद पर रहते हुए क्या किया है? पढ़िए रिपोर्ट…। कौन हैं IAS अधिकारी राजेश कुमार सिंह? 2014 बैच के IAS अधिकारी राजेश कुमार सिंह सोमवार शाम तक बिहार लोक सेवा आयोग में परीक्षा नियंत्रक के पद पर तैनात थे। 39वीं BPSC की परीक्षा पास कर बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी बने थे। नवंबर-दिसंबर 2024 में इनका प्रमोशन आईएएस में हुआ था। 20 अक्टूबर 2024 को एक्जाम कंट्रोलर की जिम्मेदारी मिली थी। भूगर्भशास्त्र (Geology) से ग्रेजुएशन किया था। मूल रूप से बिहार के सारण जिले के रहने वाले हैं। इनके पिता लाल जी सिंह साइंस कॉलेज पटना में प्रोफेसर थे। परीक्षा नियंत्रक रहते हुए 122 विज्ञापन जारी किए राजेश सिंह ने परीक्षा नियंत्रक के तौर पर 122 से अधिक विज्ञापन जारी किए। उनके कार्यकाल में BPSC की कई बड़ी भर्ती प्रक्रिया में आगे बढ़ीं। BPSC के आधिकारिक परीक्षा कैलेंडर में अक्टूबर 2024 के बाद की कई प्रमुख भर्तियों का रिकॉर्ड दर्ज है। ये हैं.. राजेश सिंह के परीक्षा नियंत्रक रहने के दौरान विवाद में आईं ये 5 परीक्षाएं 70वीं BPSC संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा: दिसंबर 2024 में परीक्षा हुई थी। इसमें पेपर लीक, बापू परीक्षा केंद्र पर गड़बड़ी और नॉर्मलाइजेशन के आरोप लगाकर छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। TRE-4: सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के लिए होने वाली यह परीक्षा विवादों में है। परीक्षा लिए जाने में देरी के खिलाफ छात्रों ने प्रदर्शन किया। सरकार दो परीक्षा लेने जा रही है। छात्रों की मांग है कि पहले की तरह एक परीक्षा ली जाए। 22 जुलाई 2024 में TRE-3 की परीक्षा ली गई थी। दो साल हो गए, अब तक TRE-4 की परीक्षा नहीं हुई है। 71वीं BPSC संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा: सितंबर 2025 में 71वीं BPSC के लिए प्रीलिम्स परीक्षा ली गई। इस दौरान कुछ केंद्रों पर बायोमेट्रिक जांच न होने और परीक्षा तिथि को लेकर अफवाहें फैली। अभी तक मेंस परीक्षा नहीं ली गई है। लोअर डिवीजन क्लर्क परीक्षा: जनवरी 2026 में टाइपिंग और कंप्यूटर टेस्ट लिया गया। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन कराया गया। बाद में BPSC ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए इसे रद्द कर दिया। AEDO परीक्षा: सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा अप्रैल 2026 में हुई थी। परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक गड़बड़ी, ब्लूटूथ के इस्तेमाल और नकल के मामलों के खुलासे के बाद BPSC ने परीक्षा रद्द कर दी। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) इस मामले की जांच कर रही है और कई गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं। अब जानिए वह बयान, जिसके चलते मुसीबत में फंसे राजेश कुमार सिंह राजेश कुमार सिंह सोमवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। उन्होंने कहा, “TRE-4 की परीक्षा दिसंबर या जनवरी में हो सकती है। परीक्षा दो चरणों में होगी- PT और Mains। इसमें नेगेटिव मार्किंग भी रहेगी।” छात्र दो परीक्षा लिए जाने का विरोध कर रहे हैं। उनकी मांग है कि एक ही परीक्षा ली जाए। इसको लेकर पटना के गर्दनीबाग में छात्रों का धरना-प्रदर्शन चल रहा है। पत्रकारों ने राजेश कुमार सिंह से इस संबंध में प्रश्न किया। उन्होंने जवाब दिया, “एक कहावत आपने सुनी होगी, हाथी चले बाजार तो कुत्ते भौंके हजार।” राजेश सिंह के इस बयान के बाद प्रदर्शन कर रहे छात्र भड़क गए। छात्रों ने ‘BPSC चोर है’ के नारे लगाए। छात्रों ने कहा, “यही कुत्ता एक दिन आपके आयोग का अधिकारी बनेगा। एक बार कॉकरोच बोला गया था, तो प्रधान जी चले गए। अब सचिव की नौकरी जाएगी।” प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मांग किया कि BPSC एग्जामिनेशन कंट्रोलर राजेश कुमार सिंह माफी मांगें, नहीं तो अगला आंदोलन BPSC गेट पर होगा। विवाद बढ़ने के बाद BPSC एग्जाम कंट्रोलर ने वीडियो जारी कर माफी मांगी। वीडियो जारी करके कहा, “मेरे बयान को सोशल मीडिया पर तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया। मेरा किसी व्यक्ति विशेष और समूह को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था। अगर किसी के भावना को इससे ठेस पहुंची है तो मैं इसके लिए खेद व्यक्त करता हूं।” देर शाम बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए आईएएस राजेश कुमार सिंह को सस्पेंड करने का निर्देश दिया। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए गए। शाम को राजेश सस्पेंड कर दिए गए। सोशल मीडिया पर ट्रेंड में आया ‘कुत्ता जनता पार्टी’ राजेश सिंह के बयान के बाद छात्रों और सोशल मीडिया यूजर्स में नाराजगी दिखी। आंदोलन से जुड़े अभ्यर्थियों ने व्यंग्यात्मक तरीके से ‘कुत्ता जनता पार्टी’ (KGP) नाम से सोशल मीडिया अभियान शुरू कर दिया। चंद मिनट में यह ट्रेंड करने लगा। छात्रों ने कहा कि जिन युवाओं को सरकारी नौकरी की तैयारी करते हुए वर्षों बीत जाते हैं, उनकी समस्याओं और सवालों को इस तरह की भाषा में संबोधित करना उचित नहीं है। यह विवाद ऐसे समय हुआ है जब गर्दनीबाग में BPSC और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थी लगातार आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में बदलाव और लंबित भर्तियों को समय पर पूरा करना शामिल है। छात्र आंदोलन बनाम BPSC: विवाद की नई कड़ी दरअसल, यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ दिनों से पटना में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन चल रहा है। TRE-4 के अलावा 70वीं BPSC परीक्षा, परीक्षा प्रक्रिया, कथित अनियमितताओं और अन्य भर्तियों को लेकर भी छात्र सवाल उठा रहे हैं। 18 अगस्त से गर्दनीबाग में अनिश्चितकालीन आंदोलन की घोषणा की गई थी। छात्रों ने TRE-4 की भर्ती, एक चरण में परीक्षा, पारदर्शिता और लंबित भर्तियों से जुड़े मुद्दे उठाए थे। अब परीक्षा नियंत्रक के बयान और उसके बाद सरकार की कार्रवाई ने इस आंदोलन को एक नया राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ दे दिया है। एक तरफ BPSC अपनी परीक्षा प्रक्रिया को सही बता रहा है, दूसरी तरफ छात्र आयोग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में राजेश कुमार सिंह पर कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इससे गर्दनीबाग का छात्र आंदोलन शांत होगा या भर्ती और परीक्षा से जुड़ी बाकी मांगों को लेकर आंदोलन और तेज होगा।  

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