लखीसराय के अशोकधाम में अंतिम सोमवारी पर छाया सन्नाटा:तीसरी सोमवारी की भगदड़ के बाद कम पहुंचे श्रद्धालु; फूल-प्रसाद के दुकानदारों का कारोबार भी प्रभावित

लखीसराय के अशोकधाम में अंतिम सोमवारी पर छाया सन्नाटा:तीसरी सोमवारी की भगदड़ के बाद कम पहुंचे श्रद्धालु; फूल-प्रसाद के दुकानदारों का कारोबार भी प्रभावित

लखीसराय में सावन की चौथी और अंतिम सोमवारी पर जिले का प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर इस बार असामान्य रूप से सूना नजर आया। हर वर्ष अंतिम सोमवारी पर जहां मंदिर परिसर और आसपास का इलाका श्रद्धालुओं से भरा रहता था, वहीं इस बार अपेक्षाकृत कम भीड़ ने मंदिर प्रबंधन से लेकर स्थानीय दुकानदारों तक को हैरान कर दिया। कम भीड़ को लेकर सबसे बड़ी चर्चा तीसरी सोमवारी को हुई भगदड़ की घटना के बाद पैदा हुए डर को लेकर रही। तीसरी सोमवारी की घटना में श्रद्धालुओं की मौत के बाद प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने भीड़ नियंत्रण को लेकर कई बदलाव किए थे। अरघा सिस्टम से लेकर सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव मंदिर में अरघा सिस्टम लागू किया गया। प्रवेश, निकास और जलार्पण की व्यवस्था में बदलाव के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई थी। हालांकि, अंतिम सोमवारी पर कम संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से यह सवाल खड़ा हो गया कि बदली व्यवस्था से लोगों में भरोसा बढ़ा या हादसे का खौफ अब भी उनके मन में बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने कहा- वर्षों बाद इतनी कम भीड़ देखी स्थानीय निवासी राजेश कुमार ने कहा कि अंतिम सोमवारी पर अशोकधाम में इतनी कम भीड़ उन्होंने वर्षों बाद देखी है। उन्होंने बताया कि तीसरी सोमवारी की घटना के बाद कई लोग परिवार के साथ यहां आने से डर रहे हैं। दुकानदारों की उम्मीदों पर फिरा पानी वहीं, स्थानीय दुकानदार संजय साव ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि अंतिम सोमवारी पर अच्छी बिक्री होगी। फूल-माला, प्रसाद और पूजा सामग्री पहले से अधिक मंगाकर रखी थी, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या कम रहने से कारोबार प्रभावित हुआ है। एक अन्य स्थानीय निवासी मनोज सिंह ने कहा कि हादसे के बाद लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कई श्रद्धालुओं ने भीड़ से बचने के लिए घर के आसपास ही पूजा करना बेहतर समझा। पूजा सामग्री के कारोबार पर भी पड़ा असर कम भीड़ का असर अशोकधाम के आसपास के कारोबार पर भी साफ दिखा। फूल-माला, प्रसाद, पूजा सामग्री, फल और अन्य सामान बेचने वाले दुकानदारों को लाखों रुपये के कारोबार की उम्मीद थी, लेकिन बिक्री अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुई। हादसे के बाद सुरक्षा को लेकर सवाल अंतिम सोमवारी की यह तस्वीर केवल कम भीड़ की कहानी नहीं, बल्कि हादसे के बाद श्रद्धालुओं के मन में सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर पैदा हुए सवालों की ओर भी इशारा करती है। लखीसराय में सावन की चौथी और अंतिम सोमवारी पर जिले का प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर इस बार असामान्य रूप से सूना नजर आया। हर वर्ष अंतिम सोमवारी पर जहां मंदिर परिसर और आसपास का इलाका श्रद्धालुओं से भरा रहता था, वहीं इस बार अपेक्षाकृत कम भीड़ ने मंदिर प्रबंधन से लेकर स्थानीय दुकानदारों तक को हैरान कर दिया। कम भीड़ को लेकर सबसे बड़ी चर्चा तीसरी सोमवारी को हुई भगदड़ की घटना के बाद पैदा हुए डर को लेकर रही। तीसरी सोमवारी की घटना में श्रद्धालुओं की मौत के बाद प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने भीड़ नियंत्रण को लेकर कई बदलाव किए थे। अरघा सिस्टम से लेकर सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव मंदिर में अरघा सिस्टम लागू किया गया। प्रवेश, निकास और जलार्पण की व्यवस्था में बदलाव के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई थी। हालांकि, अंतिम सोमवारी पर कम संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से यह सवाल खड़ा हो गया कि बदली व्यवस्था से लोगों में भरोसा बढ़ा या हादसे का खौफ अब भी उनके मन में बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने कहा- वर्षों बाद इतनी कम भीड़ देखी स्थानीय निवासी राजेश कुमार ने कहा कि अंतिम सोमवारी पर अशोकधाम में इतनी कम भीड़ उन्होंने वर्षों बाद देखी है। उन्होंने बताया कि तीसरी सोमवारी की घटना के बाद कई लोग परिवार के साथ यहां आने से डर रहे हैं। दुकानदारों की उम्मीदों पर फिरा पानी वहीं, स्थानीय दुकानदार संजय साव ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि अंतिम सोमवारी पर अच्छी बिक्री होगी। फूल-माला, प्रसाद और पूजा सामग्री पहले से अधिक मंगाकर रखी थी, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या कम रहने से कारोबार प्रभावित हुआ है। एक अन्य स्थानीय निवासी मनोज सिंह ने कहा कि हादसे के बाद लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कई श्रद्धालुओं ने भीड़ से बचने के लिए घर के आसपास ही पूजा करना बेहतर समझा। पूजा सामग्री के कारोबार पर भी पड़ा असर कम भीड़ का असर अशोकधाम के आसपास के कारोबार पर भी साफ दिखा। फूल-माला, प्रसाद, पूजा सामग्री, फल और अन्य सामान बेचने वाले दुकानदारों को लाखों रुपये के कारोबार की उम्मीद थी, लेकिन बिक्री अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुई। हादसे के बाद सुरक्षा को लेकर सवाल अंतिम सोमवारी की यह तस्वीर केवल कम भीड़ की कहानी नहीं, बल्कि हादसे के बाद श्रद्धालुओं के मन में सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर पैदा हुए सवालों की ओर भी इशारा करती है।  

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