गोंडा शहर को गंदगी से निजात दिलाने के लिए प्रस्तावित ‘म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट’ परियोजना जमीन की अनुपलब्धता के कारण अधर में लटक गई है। इस परियोजना के लिए शासन से पहली किस्त के रूप में 3 करोड़ रुपये जारी हुए काफी समय हो चुका है, लेकिन धरातल पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। इसके परिणामस्वरूप, शहर के प्रमुख मार्गों, चौराहों और रोडवेज डिपो के आसपास कचरे का अंबार लगा हुआ है, जहां लावारिस मवेशी मुंह मारते देखे जा सकते हैं। शहर को जगह-जगह फैली गंदगी और सड़कों पर बजबजाते कचरे के ढेरों से मुक्ति नहीं मिल पा रही है। गोंडा नगर पालिका अध्यक्ष उजमा राशिद ने आज रविवार दोपहर 3 बजे दैनिक भास्कर संवाददाता से बताया कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार 3 एकड़ जमीन की तलाश जारी है। नियमों के तहत, यह जमीन आबादी और जलस्रोतों से 1 किलोमीटर की दूरी पर होनी अनिवार्य है। कूड़े का निस्तारण लगातार कराया जा रहा उन्होंने आगे बताया कि भूमि आवंटन के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा जा चुका है। प्रशासन द्वारा भूमि उपलब्ध होते ही निर्माण कार्य तुरंत शुरू करा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले महीने एक जमीन देखी गई थी, लेकिन वह उपयुक्त नहीं थी। कूड़े का निस्तारण लगातार कराया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर के ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए कुल 10 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। योजना के अनुसार, शहर से निकलने वाले कचरे को एकत्रित कर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाना है। इसमें से उपयोगी कचरे को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा, जबकि गीले और जैविक कचरे से जैविक खाद या ऊर्जा का निर्माण किया जाना है। नगर पालिका की आय भी बढ़ाई जा सकेगी इस परियोजना से न केवल पर्यावरण प्रदूषण पर रोक लगेगी, बल्कि कचरे को एक संसाधन के रूप में उपयोग कर नगर पालिका की आय भी बढ़ाई जा सकेगी। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, प्लांट स्थापित करने के लिए लगभग 3 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। एनजीटी और केंद्रीय गाइडलाइन के अनुसार, यह भूमि रिहायशी आबादी और किसी भी जल निकाय (तालाब, नदी आदि) से कम से कम एक किलोमीटर दूर होनी चाहिए। पिछले माह एक स्थान पर जमीन चिह्नित की गई थी, लेकिन गाइडलाइन के मानकों पर खरा न उतरने के कारण उसे खारिज कर दिया गया। अब नए सिरे से उपयुक्त जमीन की तलाश की जा रही है।

