वैशाली में कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्सलेन पुल के अप्रोच रोड के गोलंबर के नीचे से मिट्टी हटने की तस्वीरें सामने आई हैं। इसके बाद पुल के निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। राजद नेताओं का आरोप है कि अप्रोच रोड के नीचे से मिट्टी हटने के कारण सड़क का आधार कमजोर हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है। आरजेडी के इस आरोप पर एल एंड टी के एडमिन हेड आरके सिंह ने कहा कि पुल की मजबूती को लेकर किसी को संदेह है तो वे स्वतंत्र इंजीनियर को हायर कर इसकी तकनीकी जांच करा सकते हैं। पहले पढ़िए, आरजेडी के आरोप क्या हैं राजद ने कहा कि यह इलाका हर साल बाढ़ और जलजमाव से प्रभावित होता है। ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत थी। पार्टी ने सवाल उठाया कि आखिर हर साल अप्रोच रोड की मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ती है और निर्माण की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर की गई थी। राजद नेताओं ने सरकार और संबंधित विभाग से अप्रोच रोड की तत्काल तकनीकी जांच कराने की मांग की है। साथ ही मिट्टी के कटाव को रोकने और जरूरी मरम्मत कार्य कराने की मांग की गई है। राजद ने प्रशासन से किसी दुर्घटना का इंतजार किए बिना अभी से सुरक्षा के ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है, ताकि राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पुल की मजबूती पर LT ने दी सफाई
कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्सलेन पुल के एप्रोच रोड स्थित गोलंबर के नीचे से मिट्टी और रेत निकलने की तस्वीरें सामने आने के बाद पुल की मजबूती और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। इस पर एल एंड टी के एडमिन हेड आरके सिंह ने स्पष्टीकरण दिया है। आरके सिंह ने बताया कि गोलंबर का निर्माण वेल फाउंडेशन स्ट्रक्चर के आधार पर किया गया है। गोलंबर को बेहतर और आकर्षक दिखाने के लिए उसके आसपास रेत डाली गई थी। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति में यहां बाढ़ का पानी भी नहीं आया है। ऐसे में रेत के निकलने से पुल की संरचनात्मक मजबूती पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पुल की मजबूती को लेकर किसी को संदेह है तो वे स्वतंत्र इंजीनियर को हायर कर इसकी तकनीकी जांच करा सकते हैं। एल एंड टी के इस स्पष्टीकरण के बाद अब पुल की संरचना और एप्रोच रोड की स्थिति की स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग भी उठ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर उठ रही आशंकाओं को दूर करने के लिए संबंधित विभाग को मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वैशाली में कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्सलेन पुल के अप्रोच रोड के गोलंबर के नीचे से मिट्टी हटने की तस्वीरें सामने आई हैं। इसके बाद पुल के निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। राजद नेताओं का आरोप है कि अप्रोच रोड के नीचे से मिट्टी हटने के कारण सड़क का आधार कमजोर हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है। आरजेडी के इस आरोप पर एल एंड टी के एडमिन हेड आरके सिंह ने कहा कि पुल की मजबूती को लेकर किसी को संदेह है तो वे स्वतंत्र इंजीनियर को हायर कर इसकी तकनीकी जांच करा सकते हैं। पहले पढ़िए, आरजेडी के आरोप क्या हैं राजद ने कहा कि यह इलाका हर साल बाढ़ और जलजमाव से प्रभावित होता है। ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत थी। पार्टी ने सवाल उठाया कि आखिर हर साल अप्रोच रोड की मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ती है और निर्माण की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर की गई थी। राजद नेताओं ने सरकार और संबंधित विभाग से अप्रोच रोड की तत्काल तकनीकी जांच कराने की मांग की है। साथ ही मिट्टी के कटाव को रोकने और जरूरी मरम्मत कार्य कराने की मांग की गई है। राजद ने प्रशासन से किसी दुर्घटना का इंतजार किए बिना अभी से सुरक्षा के ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है, ताकि राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पुल की मजबूती पर LT ने दी सफाई
कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्सलेन पुल के एप्रोच रोड स्थित गोलंबर के नीचे से मिट्टी और रेत निकलने की तस्वीरें सामने आने के बाद पुल की मजबूती और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। इस पर एल एंड टी के एडमिन हेड आरके सिंह ने स्पष्टीकरण दिया है। आरके सिंह ने बताया कि गोलंबर का निर्माण वेल फाउंडेशन स्ट्रक्चर के आधार पर किया गया है। गोलंबर को बेहतर और आकर्षक दिखाने के लिए उसके आसपास रेत डाली गई थी। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति में यहां बाढ़ का पानी भी नहीं आया है। ऐसे में रेत के निकलने से पुल की संरचनात्मक मजबूती पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पुल की मजबूती को लेकर किसी को संदेह है तो वे स्वतंत्र इंजीनियर को हायर कर इसकी तकनीकी जांच करा सकते हैं। एल एंड टी के इस स्पष्टीकरण के बाद अब पुल की संरचना और एप्रोच रोड की स्थिति की स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग भी उठ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर उठ रही आशंकाओं को दूर करने के लिए संबंधित विभाग को मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

