समस्तीपुर- 36 वायल एंटी-स्नेक वेनम देकर बुजुर्ग की बचाई जान:आलू निकालने गई तो कोबरा ने डंसा; डॉक्टरों ने रेफर किया, कर्मियों ने सीपीआर, ऑक्सीजन सपोर्ट देकर किया इलाज

समस्तीपुर- 36 वायल एंटी-स्नेक वेनम देकर बुजुर्ग की बचाई जान:आलू निकालने गई तो कोबरा ने डंसा; डॉक्टरों ने रेफर किया, कर्मियों ने सीपीआर, ऑक्सीजन सपोर्ट देकर किया इलाज

समस्तीपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र में शुक्रवार सुबह आलू निकालने गई एक बुजुर्ग महिला को आलू के बीच छिपे कोबरा ने डंस लिया। परिजन और पड़ोसी आनन-फानन में उसे सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल पहुंचने तक महिला की हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। उसका पल्स रेट नहीं मिल रहा था और ब्लड प्रेशर भी काफी कम था। डॉक्टरों के स्तर से उसे रेफर करने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान अस्पताल के दो कर्मियों ने हिम्मत दिखाते हुए सीपीआर और ऑक्सीजन सपोर्ट देकर उपचार शुरू किया। अगले 24 घंटे में महिला को एंटी-स्नेक वेनम की कुल 36 वायल दी गईं। उपचार के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ और उसे आईसीयू में रखा गया है। आलू निकालते समय कोबरा ने डंसा कल्याणपुर थाना क्षेत्र के खजुरी वार्ड संख्या-2 निवासी ठिठर ठाकुर की पत्नी गायत्री देवी (55) अपने पति के साथ घर पर रहती हैं। उनके दोनों पुत्र दूसरे प्रदेश में रहते हैं। शुक्रवार सुबह गायत्री देवी सब्जी बनाने के लिए घर की देहरी पर रखे आलू निकालने गई थीं। इसी दौरान आलू के बीच छिपे कोबरा ने उनके दाहिने हाथ में डंस लिया। महिला के चीखने-चिल्लाने पर आसपास के लोग मौके पर जुट गए और उन्हें तत्काल समस्तीपुर सदर अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल पहुंचने तक महिला अचेत हो चुकी थीं। उनका पल्स रेट नहीं मिल रहा था और ब्लड प्रेशर भी काफी नीचे चला गया था। ऑन-ड्यूटी डॉक्टर ने महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें रेफर करने की तैयारी शुरू की। इसी दौरान गले के पास सांस चलने के संकेत मिलने पर अस्पताल कर्मी अखिलेश कुमार ने सीपीआर देना शुरू किया। कुछ देर बाद महिला के शरीर में हलचल महसूस हुई और पल्स भी मिलने लगा। 10 वायल एंटी-स्नेक वेनम देने के बाद भी नहीं आया होश इसके बाद महिला को तत्काल एंटी-स्नेक वेनम की 10 वायल दी गईं। इसके बावजूद उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। ऑक्सीजन का स्तर भी काफी कम था और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत बताई गई। परिजनों के पास तत्काल निजी अस्पताल ले जाने की व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में अस्पताल कर्मी अखिलेश कुमार और नीरज ने इमरजेंसी वार्ड में ही उपलब्ध संसाधनों से ऑक्सीजन सपोर्ट देना शुरू किया। इस दौरान महिला को एंटी-स्नेक वेनम की 13 और वायल दी गईं। धीरे-धीरे उनका पल्स रेट और ऑक्सीजन का स्तर बढ़ने लगा। लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट मिलने के बाद उनकी स्थिति स्थिर हुई। इसके बाद उन्हें आईसीयू में रेफर किया गया। उपचार के दौरान महिला को कुल 36 वायल एंटी-स्नेक वेनम दी गईं। घटना के करीब 24 घंटे बाद उनकी स्थिति में काफी सुधार बताया गया है। फिलहाल उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। डीएस बोले- समय पर अस्पताल पहुंचने से बच सकती है जान सदर अस्पताल के डीएस डॉ. गिरीश कुमार ने बताया कि डॉक्टरों और कर्मियों की मेहनत से महिला की जान बचाई जा सकी। उन्होंने कहा कि सांप के काटने के बाद मरीज को बिना देरी किए सदर अस्पताल लाया जाए तो समय पर उपचार मिलने से जान बचाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि कई बार अस्पताल पहुंचने में देरी होने के कारण मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है। अगस्त में अब तक 56 स्नेक बाइट के मामले सदर अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त महीने में अब तक सांप काटने के 56 मामले सामने आए हैं। इनमें समय पर अस्पताल पहुंचने वाले 30 मरीजों का उपचार कर उन्हें घर भेजा जा चुका है। वहीं, आठ मरीजों की मौत हुई है, जबकि अन्य मरीजों को बेहतर उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया है। समस्तीपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र में शुक्रवार सुबह आलू निकालने गई एक बुजुर्ग महिला को आलू के बीच छिपे कोबरा ने डंस लिया। परिजन और पड़ोसी आनन-फानन में उसे सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल पहुंचने तक महिला की हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। उसका पल्स रेट नहीं मिल रहा था और ब्लड प्रेशर भी काफी कम था। डॉक्टरों के स्तर से उसे रेफर करने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान अस्पताल के दो कर्मियों ने हिम्मत दिखाते हुए सीपीआर और ऑक्सीजन सपोर्ट देकर उपचार शुरू किया। अगले 24 घंटे में महिला को एंटी-स्नेक वेनम की कुल 36 वायल दी गईं। उपचार के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ और उसे आईसीयू में रखा गया है। आलू निकालते समय कोबरा ने डंसा कल्याणपुर थाना क्षेत्र के खजुरी वार्ड संख्या-2 निवासी ठिठर ठाकुर की पत्नी गायत्री देवी (55) अपने पति के साथ घर पर रहती हैं। उनके दोनों पुत्र दूसरे प्रदेश में रहते हैं। शुक्रवार सुबह गायत्री देवी सब्जी बनाने के लिए घर की देहरी पर रखे आलू निकालने गई थीं। इसी दौरान आलू के बीच छिपे कोबरा ने उनके दाहिने हाथ में डंस लिया। महिला के चीखने-चिल्लाने पर आसपास के लोग मौके पर जुट गए और उन्हें तत्काल समस्तीपुर सदर अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल पहुंचने तक महिला अचेत हो चुकी थीं। उनका पल्स रेट नहीं मिल रहा था और ब्लड प्रेशर भी काफी नीचे चला गया था। ऑन-ड्यूटी डॉक्टर ने महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें रेफर करने की तैयारी शुरू की। इसी दौरान गले के पास सांस चलने के संकेत मिलने पर अस्पताल कर्मी अखिलेश कुमार ने सीपीआर देना शुरू किया। कुछ देर बाद महिला के शरीर में हलचल महसूस हुई और पल्स भी मिलने लगा। 10 वायल एंटी-स्नेक वेनम देने के बाद भी नहीं आया होश इसके बाद महिला को तत्काल एंटी-स्नेक वेनम की 10 वायल दी गईं। इसके बावजूद उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। ऑक्सीजन का स्तर भी काफी कम था और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत बताई गई। परिजनों के पास तत्काल निजी अस्पताल ले जाने की व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में अस्पताल कर्मी अखिलेश कुमार और नीरज ने इमरजेंसी वार्ड में ही उपलब्ध संसाधनों से ऑक्सीजन सपोर्ट देना शुरू किया। इस दौरान महिला को एंटी-स्नेक वेनम की 13 और वायल दी गईं। धीरे-धीरे उनका पल्स रेट और ऑक्सीजन का स्तर बढ़ने लगा। लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट मिलने के बाद उनकी स्थिति स्थिर हुई। इसके बाद उन्हें आईसीयू में रेफर किया गया। उपचार के दौरान महिला को कुल 36 वायल एंटी-स्नेक वेनम दी गईं। घटना के करीब 24 घंटे बाद उनकी स्थिति में काफी सुधार बताया गया है। फिलहाल उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। डीएस बोले- समय पर अस्पताल पहुंचने से बच सकती है जान सदर अस्पताल के डीएस डॉ. गिरीश कुमार ने बताया कि डॉक्टरों और कर्मियों की मेहनत से महिला की जान बचाई जा सकी। उन्होंने कहा कि सांप के काटने के बाद मरीज को बिना देरी किए सदर अस्पताल लाया जाए तो समय पर उपचार मिलने से जान बचाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि कई बार अस्पताल पहुंचने में देरी होने के कारण मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है। अगस्त में अब तक 56 स्नेक बाइट के मामले सदर अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त महीने में अब तक सांप काटने के 56 मामले सामने आए हैं। इनमें समय पर अस्पताल पहुंचने वाले 30 मरीजों का उपचार कर उन्हें घर भेजा जा चुका है। वहीं, आठ मरीजों की मौत हुई है, जबकि अन्य मरीजों को बेहतर उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया है।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *