गया में सरकारी जमीन पर 230 लोगों के नाम जमाबंदी:जिला परिषद अध्यक्ष ने म्यूटेशन रद्द करने की मांग की, बोली- भूमाफिया, अधिकारियों की मिलीभगत

गया में सरकारी जमीन पर 230 लोगों के नाम जमाबंदी:जिला परिषद अध्यक्ष ने म्यूटेशन रद्द करने की मांग की, बोली- भूमाफिया, अधिकारियों की मिलीभगत

गया जिला परिषद की बेशकीमती जमीन पर अवैध रूप से 230 लोगों के नाम जमाबंदी कायम होने का गंभीर मामला सामने आया है। जिला परिषद अध्यक्ष नैना कुमारी ने इस पूरे प्रकरण में बड़े भू-माफिया और अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताई है। उन्होंने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता में इसका खुलासा किया। अध्यक्ष नैना कुमारी ने बताया कि जिला परिषद की जमीन को गलत तरीके से बेचने के बाद करीब 230 व्यक्तियों के नाम जमाबंदी कर दी गई। इस संबंध में उन्होंने मगध प्रमंडल के आयुक्त, आईजी, जिलाधिकारी और अपर समाहर्ता सहित संबंधित अधिकारियों को लिखित आवेदन देकर पूरे मामले से अवगत कराया है। नैना कुमारी ने अधिकारियों से मांग की है कि जिला परिषद की जमीन पर किए गए गलत म्यूटेशन और जमाबंदी को तत्काल रद्द किया जाए। साथ ही, जमीन का दखल-कब्जा जिला परिषद को वापस दिलाया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी है और जिला परिषद की जमीन को किसी भी परिस्थिति में निजी हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा। ऐसे खुला पूरा मामला यह मामला तब सामने आया जब गया सदर अंचल के मौजा कंडी नवादा में स्थित जिला परिषद की भूमि पर आधुनिक बस स्टैंड के निर्माण का प्रस्ताव पारित होने के बाद जमीन की पैमाइश और सीमांकन के लिए अमीन को भेजा गया। राजस्व अभिलेखों की जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। जांच में पता चला कि खाता नंबर-505 और विभिन्न खेसरा नंबरों में स्थित इस महत्वपूर्ण भूमि पर करीब 230 लोगों के नाम जमाबंदियां दर्ज हैं। जिला परिषद अध्यक्ष के अनुसार, जिस जमीन को जिला परिषद की संपत्ति बताया जा रहा है, उस पर इतनी बड़ी संख्या में निजी व्यक्तियों के नाम जमाबंदी कायम होना गंभीर सवाल खड़े करता है। तत्कालीन अंचलाधिकारी पर भी उठाए सवाल जिला परिषद अध्यक्ष नैना कुमारी ने आरोप लगाया कि तत्कालीन नगर प्रखंड चंदौती के अंचलाधिकारी की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि नियम-कानून और राजस्व प्रावधानों की अनदेखी करते हुए जिला परिषद की जमीन पर निजी लोगों के नाम जमाबंदी कायम किए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। जिला परिषद अध्यक्ष नैना कुमारी ने कहा कि यह सिर्फ जमीन के स्वामित्व से जुड़ा सामान्य विवाद नहीं है। यदि सरकारी अथवा जिला परिषद की सार्वजनिक संपत्ति के राजस्व रिकॉर्ड में गलत तरीके से बदलाव किया गया है, तो यह गंभीर प्रशासनिक और कानूनी मामला है। इसलिए जमीन के मूल दस्तावेजों से लेकर नामांतरण, जमाबंदी और कथित खरीद-बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया की जांच जरूरी है। अधिकारियों को लिखित आवेदन, म्यूटेशन रद्द करने की मांग नैना कुमारी ने बताया कि मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों को लिखित आवेदन दिया गया है। आवेदन के माध्यम से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने, कथित अवैध म्यूटेशन को रद्द करने और जिला परिषद की जमीन को सुरक्षित कराने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में म्यूटेशन और जमाबंदी नियम विरुद्ध पाए जाते हैं तो उन्हें नियमानुसार रद्द किया जाना चाहिए। साथ ही जमीन पर जिला परिषद का दखल-कब्जा सुनिश्चित कराया जाए, ताकि भविष्य में कोई व्यक्ति इस संपत्ति पर अवैध दावा या खरीद-बिक्री नहीं कर सके। भू-माफिया के साथ मिलीभगत का लगाया आरोप जिला परिषद अध्यक्ष ने मामले में बड़े भू-माफिया की संलिप्तता की संभावना जताते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के नाम जमीन की जमाबंदी होना अपने आप में गंभीर जांच का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला परिषद की जमीन को गलत तरीके से बेचकर उसका म्यूटेशन कराया गया है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि राजस्व रिकॉर्ड में जमीन का मूल स्वरूप और स्वामित्व स्पष्ट किया जाए तथा यह पता लगाया जाए कि जमीन की खरीद-बिक्री के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। साथ ही म्यूटेशन और जमाबंदी की प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाए। वर्षों से अतिक्रमण और अवैध कब्जे की शिकायत जिला परिषद अध्यक्ष नैना कुमारी ने कहा कि गया जिले में जिला परिषद की कई जमीनों पर वर्षों से अतिक्रमण, अवैध कब्जे और खरीद-बिक्री की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में 230 लोगों के नाम जमाबंदी का मामला बेहद गंभीर है और इसे सामान्य राजस्व विवाद मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जिला परिषद की जमीन सार्वजनिक संपत्ति है। इसकी रक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही, अनियमितता या मिलीभगत साबित होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सुसंगत धाराओं के तहत कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उच्चस्तरीय जांच की मांग, दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद जिला परिषद अध्यक्ष ने मगध प्रमंडल के आयुक्त, आईजी, गया जिलाधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों से मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के बाद जो भी लोग दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और जिला परिषद की जमीन को तत्काल सुरक्षित कराया जाना चाहिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सार्वजनिक संपत्ति की कथित लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिला परिषद की जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा, अतिक्रमण या गलत तरीके से किया गया म्यूटेशन स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब इस मामले में प्रशासनिक जांच और कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिला परिषद की बताई जा रही जमीन पर करीब 230 लोगों के नाम जमाबंदी किस आधार पर कायम हुई, म्यूटेशन की प्रक्रिया में कौन-कौन से दस्तावेज इस्तेमाल किए गए और इस पूरी प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही। इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। गया जिला परिषद की बेशकीमती जमीन पर अवैध रूप से 230 लोगों के नाम जमाबंदी कायम होने का गंभीर मामला सामने आया है। जिला परिषद अध्यक्ष नैना कुमारी ने इस पूरे प्रकरण में बड़े भू-माफिया और अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताई है। उन्होंने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता में इसका खुलासा किया। अध्यक्ष नैना कुमारी ने बताया कि जिला परिषद की जमीन को गलत तरीके से बेचने के बाद करीब 230 व्यक्तियों के नाम जमाबंदी कर दी गई। इस संबंध में उन्होंने मगध प्रमंडल के आयुक्त, आईजी, जिलाधिकारी और अपर समाहर्ता सहित संबंधित अधिकारियों को लिखित आवेदन देकर पूरे मामले से अवगत कराया है। नैना कुमारी ने अधिकारियों से मांग की है कि जिला परिषद की जमीन पर किए गए गलत म्यूटेशन और जमाबंदी को तत्काल रद्द किया जाए। साथ ही, जमीन का दखल-कब्जा जिला परिषद को वापस दिलाया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी है और जिला परिषद की जमीन को किसी भी परिस्थिति में निजी हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा। ऐसे खुला पूरा मामला यह मामला तब सामने आया जब गया सदर अंचल के मौजा कंडी नवादा में स्थित जिला परिषद की भूमि पर आधुनिक बस स्टैंड के निर्माण का प्रस्ताव पारित होने के बाद जमीन की पैमाइश और सीमांकन के लिए अमीन को भेजा गया। राजस्व अभिलेखों की जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। जांच में पता चला कि खाता नंबर-505 और विभिन्न खेसरा नंबरों में स्थित इस महत्वपूर्ण भूमि पर करीब 230 लोगों के नाम जमाबंदियां दर्ज हैं। जिला परिषद अध्यक्ष के अनुसार, जिस जमीन को जिला परिषद की संपत्ति बताया जा रहा है, उस पर इतनी बड़ी संख्या में निजी व्यक्तियों के नाम जमाबंदी कायम होना गंभीर सवाल खड़े करता है। तत्कालीन अंचलाधिकारी पर भी उठाए सवाल जिला परिषद अध्यक्ष नैना कुमारी ने आरोप लगाया कि तत्कालीन नगर प्रखंड चंदौती के अंचलाधिकारी की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि नियम-कानून और राजस्व प्रावधानों की अनदेखी करते हुए जिला परिषद की जमीन पर निजी लोगों के नाम जमाबंदी कायम किए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। जिला परिषद अध्यक्ष नैना कुमारी ने कहा कि यह सिर्फ जमीन के स्वामित्व से जुड़ा सामान्य विवाद नहीं है। यदि सरकारी अथवा जिला परिषद की सार्वजनिक संपत्ति के राजस्व रिकॉर्ड में गलत तरीके से बदलाव किया गया है, तो यह गंभीर प्रशासनिक और कानूनी मामला है। इसलिए जमीन के मूल दस्तावेजों से लेकर नामांतरण, जमाबंदी और कथित खरीद-बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया की जांच जरूरी है। अधिकारियों को लिखित आवेदन, म्यूटेशन रद्द करने की मांग नैना कुमारी ने बताया कि मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों को लिखित आवेदन दिया गया है। आवेदन के माध्यम से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने, कथित अवैध म्यूटेशन को रद्द करने और जिला परिषद की जमीन को सुरक्षित कराने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में म्यूटेशन और जमाबंदी नियम विरुद्ध पाए जाते हैं तो उन्हें नियमानुसार रद्द किया जाना चाहिए। साथ ही जमीन पर जिला परिषद का दखल-कब्जा सुनिश्चित कराया जाए, ताकि भविष्य में कोई व्यक्ति इस संपत्ति पर अवैध दावा या खरीद-बिक्री नहीं कर सके। भू-माफिया के साथ मिलीभगत का लगाया आरोप जिला परिषद अध्यक्ष ने मामले में बड़े भू-माफिया की संलिप्तता की संभावना जताते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के नाम जमीन की जमाबंदी होना अपने आप में गंभीर जांच का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला परिषद की जमीन को गलत तरीके से बेचकर उसका म्यूटेशन कराया गया है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि राजस्व रिकॉर्ड में जमीन का मूल स्वरूप और स्वामित्व स्पष्ट किया जाए तथा यह पता लगाया जाए कि जमीन की खरीद-बिक्री के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। साथ ही म्यूटेशन और जमाबंदी की प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाए। वर्षों से अतिक्रमण और अवैध कब्जे की शिकायत जिला परिषद अध्यक्ष नैना कुमारी ने कहा कि गया जिले में जिला परिषद की कई जमीनों पर वर्षों से अतिक्रमण, अवैध कब्जे और खरीद-बिक्री की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में 230 लोगों के नाम जमाबंदी का मामला बेहद गंभीर है और इसे सामान्य राजस्व विवाद मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जिला परिषद की जमीन सार्वजनिक संपत्ति है। इसकी रक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही, अनियमितता या मिलीभगत साबित होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सुसंगत धाराओं के तहत कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उच्चस्तरीय जांच की मांग, दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद जिला परिषद अध्यक्ष ने मगध प्रमंडल के आयुक्त, आईजी, गया जिलाधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों से मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के बाद जो भी लोग दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और जिला परिषद की जमीन को तत्काल सुरक्षित कराया जाना चाहिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सार्वजनिक संपत्ति की कथित लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिला परिषद की जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा, अतिक्रमण या गलत तरीके से किया गया म्यूटेशन स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब इस मामले में प्रशासनिक जांच और कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिला परिषद की बताई जा रही जमीन पर करीब 230 लोगों के नाम जमाबंदी किस आधार पर कायम हुई, म्यूटेशन की प्रक्रिया में कौन-कौन से दस्तावेज इस्तेमाल किए गए और इस पूरी प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही। इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।  

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