नालंदा में किसानों को निर्धारित सरकारी दर पर पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को नालंदा समाहरणालय में जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित जिला उर्वरक निगरानी समिति की बैठक में उर्वरक की जमाखोरी और तय कीमत से अधिक वसूली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। बैठक में बिहार सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार मुख्य रूप से उपस्थित रहे। जिला कृषि पदाधिकारी ने बैठक में जानकारी दी कि खरीफ सत्र 2026 के दौरान अब तक जिले के 492 उर्वरक प्रतिष्ठानों पर सघन छापेमारी की गई है। जांच के दौरान अनियमितता पाए जाने पर 3 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं, जबकि 35 प्रतिष्ठानों को निलंबित किया गया है। इसके अलावा 64 प्रतिष्ठानों से स्पष्टीकरण की मांग की गई है। डीएपी की उपलब्धता बढ़ाने के निर्देश बैठक में जिले में उर्वरक के मौजूदा स्टॉक की समीक्षा की गई। वर्तमान में जिले में यूरिया: 8,208.57 मीट्रिक टन,एनपीके: 6,558.75 मीट्रिक टन,एसएसपी: 7,348.68 मीट्रिक टन,डीएपी: 1,635.25 मीट्रिक टन एवं एमओपी: 468.8 मीट्रिक टन उपलब्ध है। मंत्री श्रवण कुमार ने जिले में डीएपी के अपेक्षाकृत कम भंडार पर संज्ञान लेते हुए संबंधित निदेशालय को लक्ष्य के अनुसार अतिरिक्त मांग पत्र भेजने का निर्देश दिया, ताकि बुआई के समय किसानों को किसी प्रकार की किल्लत न हो। उन्होंने थोक एवं खुदरा विक्रेताओं को दो-टूक कहा कि सरकारी दर पर ही खाद की बिक्री सुनिश्चित की जाए। प्राकृतिक खेती और जैविक खाद पर जोर बैठक में ‘धरती माता बचाओ अभियान’ के तहत मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने पर भी विमर्श हुआ। मंत्री और जिला पदाधिकारी ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर जैविक खाद और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने पर बल दिया। इसके लिए पंचायत और प्रखंड स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश कृषि विभाग को दिया गया। बैठक में जिला व अनुमंडल स्तरीय अधिकारियों, उर्वरक कंपनियों के प्रतिनिधियों और विक्रेताओं ने समय पर व पारदर्शी तरीके से खाद वितरण सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। नालंदा में किसानों को निर्धारित सरकारी दर पर पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को नालंदा समाहरणालय में जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित जिला उर्वरक निगरानी समिति की बैठक में उर्वरक की जमाखोरी और तय कीमत से अधिक वसूली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। बैठक में बिहार सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार मुख्य रूप से उपस्थित रहे। जिला कृषि पदाधिकारी ने बैठक में जानकारी दी कि खरीफ सत्र 2026 के दौरान अब तक जिले के 492 उर्वरक प्रतिष्ठानों पर सघन छापेमारी की गई है। जांच के दौरान अनियमितता पाए जाने पर 3 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं, जबकि 35 प्रतिष्ठानों को निलंबित किया गया है। इसके अलावा 64 प्रतिष्ठानों से स्पष्टीकरण की मांग की गई है। डीएपी की उपलब्धता बढ़ाने के निर्देश बैठक में जिले में उर्वरक के मौजूदा स्टॉक की समीक्षा की गई। वर्तमान में जिले में यूरिया: 8,208.57 मीट्रिक टन,एनपीके: 6,558.75 मीट्रिक टन,एसएसपी: 7,348.68 मीट्रिक टन,डीएपी: 1,635.25 मीट्रिक टन एवं एमओपी: 468.8 मीट्रिक टन उपलब्ध है। मंत्री श्रवण कुमार ने जिले में डीएपी के अपेक्षाकृत कम भंडार पर संज्ञान लेते हुए संबंधित निदेशालय को लक्ष्य के अनुसार अतिरिक्त मांग पत्र भेजने का निर्देश दिया, ताकि बुआई के समय किसानों को किसी प्रकार की किल्लत न हो। उन्होंने थोक एवं खुदरा विक्रेताओं को दो-टूक कहा कि सरकारी दर पर ही खाद की बिक्री सुनिश्चित की जाए। प्राकृतिक खेती और जैविक खाद पर जोर बैठक में ‘धरती माता बचाओ अभियान’ के तहत मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने पर भी विमर्श हुआ। मंत्री और जिला पदाधिकारी ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर जैविक खाद और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने पर बल दिया। इसके लिए पंचायत और प्रखंड स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश कृषि विभाग को दिया गया। बैठक में जिला व अनुमंडल स्तरीय अधिकारियों, उर्वरक कंपनियों के प्रतिनिधियों और विक्रेताओं ने समय पर व पारदर्शी तरीके से खाद वितरण सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।

