69000 शिक्षक भर्ती विवाद: आरक्षित वर्ग के 6800 अभ्यर्थी करेंगे आंदोलन, 29 अगस्त से लखनऊ में प्रदर्शन CM से मुलाकात की मांग

69000 शिक्षक भर्ती विवाद: आरक्षित वर्ग के 6800 अभ्यर्थी करेंगे आंदोलन, 29 अगस्त से लखनऊ में प्रदर्शन CM से मुलाकात की मांग

UP Teacher Recruitment Controversy: उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस भर्ती के आरक्षित वर्ग के 6800 अभ्यर्थी एक बार फिर राजधानी लखनऊ में बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। इन अभ्यर्थियों ने आगामी 29 अगस्त से अपना प्रदर्शन शुरू करने का ऐलान कर दिया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पिछले करीब 7 वर्षों से अपनी नियुक्ति और न्याय की उम्मीद में लगातार संघर्ष कर रहे हैं लेकिन अब तक इस गंभीर मामले का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।

6800 अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग

अभ्यर्थियों के मुताबिक 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण नियमों को लागू करने में भारी विसंगतियां हुई थीं जिसके कारण बड़ी संख्या में पात्र अभ्यर्थी चयन और नियुक्ति से वंचित रह गए थे। जब इस मामले में लगातार विरोध और आपत्तियां दर्ज कराई गईं तो बेसिक शिक्षा विभाग ने 5 जनवरी, 2022 को 6800 आरक्षित अभ्यर्थियों की एक नई सूची जारी की थी। हालांकि यह सूची जारी होने के बावजूद इसमें शामिल अभ्यर्थियों को आज तक नियुक्ति नहीं मिल सकी है। उनकी सबसे प्रमुख मांग इसी सूची में शामिल पात्र अभ्यर्थियों को तत्काल नियुक्ति देने की है।

CM योगी से मुलाकात पर अड़े अभ्यर्थी

आरक्षित वर्ग के इन अभ्यर्थियों का स्पष्ट कहना है कि उनका यह प्रदर्शन किसी अन्य अभ्यर्थी का अधिकार छीनने के लिए बिल्कुल नहीं है। वे केवल अपने संवैधानिक अधिकार निष्पक्ष चयन प्रक्रिया और अपनी रुकी हुई नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि वर्षों से यह मामला लंबित रहने के कारण सैकड़ों अभ्यर्थियों का भविष्य पूरी तरह से अधर में लटका हुआ है। इसके अलावा वे चाहते हैं कि उनके प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तत्काल मुलाकात कराई जाए ताकि वे सरकार के सामने नियुक्ति से जुड़े पूरे मामले और अपनी वास्तविक समस्याएं रख सकें।

सुप्रीम कोर्ट में चल रही है सुनवाई

आपको बता दें कि फिलहाल यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अभ्यर्थियों के अनुसार पहले ही सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉर्ज मेसी की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी और उन्हें पूरी उम्मीद थी कि जल्द ही कोई अंतिम फैसला आ सकता है। लेकिन उनका कहना है कि अब सुनवाई कर रही पीठ में बदलाव हो गया है जिसके बाद अंतिम निर्णय आने में और अधिक समय लग सकता है। बस इसी वजह से अभ्यर्थियों ने अपना हक पाने के लिए दोबारा लखनऊ की सड़कों पर उतरने का फैसला किया है।

छात्रों ने कहा- शांतिपूर्ण ढंग से होगा प्रदर्शन

अभ्यर्थियों ने साफ किया है कि वे पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपना यह आंदोलन चलाएंगे। उनका नारा है कि 6800 अभ्यर्थियों को न्याय दो, नियुक्ति दो; मुख्यमंत्री जी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर समाधान का रास्ता निकालें। अभ्यर्थियों ने कहा वे सरकार से अपेक्षा करते हैं कि शासन पूरी संवेदनशीलता के साथ इस मामले का समाधान निकालेगा। गौरतलब है कि इससे पहले भी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण नियमों की अनदेखी के विरोध में लगातार 640 दिनों तक धरना दिया था और कई मंत्रियों के आवास का घेराव भी किया था।

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