हत्या के मामले में 11 महीने बाद उम्रकैद की सजा:बुलंदशहर में चाकू से अभिषेक की हत्या से गोदकर की थी हत्या, 51 हजार रुपए जुर्माना

हत्या के मामले में 11 महीने बाद उम्रकैद की सजा:बुलंदशहर में चाकू से अभिषेक की हत्या से गोदकर की थी हत्या, 51 हजार रुपए जुर्माना

बुलंदशहर में हत्या के एक मामले में अदालत ने करीब 11 महीने बाद दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोतवाली नगर क्षेत्र के नयां गांव धमेडा में 14 अक्टूबर 2024 को अभिषेक की चाकू से हत्या कर दी गई थी। इस मामले में बुधवार देर शाम करीब 7 बजे विशेष गैंगस्टर/एडीजे-03 की अदालत ने आरोपी बिट्टू पुत्र श्योराज सिंह को दोषी ठहराते हुए आजीवन सश्रम कारावास और 51 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। मामला नयां गांव धमेडा का है। 14 अक्टूबर 2024 को बिट्टू ने गांव के ही रहने वाले अभिषेक पर चाकू से हमला कर दिया था। हमले में अभिषेक गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में उसकी मौत हो गई। हत्या की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने बिट्टू के खिलाफ धारा 103(1) बीएनएस और 4/25 शस्त्र अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया था। हत्या के मामले में साक्ष्य जुटाने और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने का काम शुरू हुआ। एक महीने में चार्जशीट, ऑपरेशन कन्विक्शन में केस चिह्नित पुलिस ने मामले में तेजी दिखाते हुए 15 नवंबर 2024 को न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर इस केस को ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ अभियान के तहत चिह्नित किया गया।अभियान के तहत मुकदमे की लगातार मॉनिटरिंग की गई। बुलंदशहर पुलिस की मॉनिटरिंग सेल ने अदालत में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के साथ मुकदमे से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य समय पर पेश कराने पर जोर दिया। पुलिस की कोशिश रही कि केस की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को मजबूत तरीके से अपना पक्ष रखने का मौका मिले। बुधवार शाम 7 बजे कोर्ट में सुनवाई, बिट्टू को दोषी करार मामले की सुनवाई बुधवार देर शाम करीब 7 बजे विशेष गैंगस्टर/एडीजे-03 न्यायालय में हुई। न्यायाधीश तबरेज अहमद की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बिट्टू को हत्या के मामले में दोषी ठहराया। अदालत ने दोषी बिट्टू को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही उस पर 51 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया। फैसले के बाद पुलिस के ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत की गई पैरवी को अहम सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। अभियोजन से मॉनिटरिंग सेल तक, इनकी रही अहम भूमिका मामले में प्रभावी पैरवी के लिए अभियोजक ध्रुव कुमार वर्मा और प्रवीण कुमार राणा की भूमिका महत्वपूर्ण रही। इसके अलावा मॉनिटरिंग सेल प्रभारी निरीक्षक पंकज राय, पैरोकार कांस्टेबल ओमकार, कोर्ट महर्रिर हेड कांस्टेबल हरिओम और महिला हेड कांस्टेबल रीना ने भी केस की पैरवी और न्यायालय से संबंधित प्रक्रिया में योगदान दिया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ऑपरेशन कन्विक्शन का उद्देश्य गंभीर अपराधों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए मुकदमों की प्रभावी पैरवी और लगातार मॉनिटरिंग करना है। अभिषेक हत्याकांड में अदालत का फैसला इसी अभियान के तहत पुलिस की पैरवी के बाद आया है।

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