हिसार में कांग्रेस में संगठन सृजन अभियान कल:4 जिलों के लिए ऑब्जर्वर नियुक्त, पीसीसी मेंबर्स में हुड्डा गुट के विधायकों का दबदबा

हिसार में कांग्रेस में संगठन सृजन अभियान कल:4 जिलों के लिए ऑब्जर्वर नियुक्त, पीसीसी मेंबर्स में हुड्डा गुट के विधायकों का दबदबा

हरियाणा कांग्रेस ने ‘संगठन सृजन अभियान’ के तहत प्रदेश के 4 प्रमुख जिलों सिरसा, हिसार, पंचकूला और फरीदाबाद के लिए एआईसीसी (AICC) और पीसीसी (PCC) ऑब्जर्वरों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में पार्टी ने संतुलन साधने के साथ-साथ पीसीसी मेंबर-1 के तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा गुट के प्रमुख विधायकों को आगे रखकर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। हिसार और हांसी के लिए कल बालसमंद रोड स्थित मिलेनियम पैलेस में बैठक होगी। पीसीसी ऑब्जर्वरों के रूप में हुड्डा गुट के कद्दावर विधायकों को तैनात किया गया है। सिरसा में देवेंद्र हंस (MLA), हिसार व हांसी में पूर्व मंत्री व विधायक गीता भुक्कल (MLA), पंचकूला में बलवान दौलतपुरिया (MLA), फरीदाबाद में पूर्व आईएएस और विधायक चंद्रप्रकाश (MLA) को लगाया गया है। AICC प्रभारी संजय दत्त, PCC अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और AICC सचिव जितेंद्र बघेल की देखरेख में तैयार इस सूची के जरिए कांग्रेस जमीन पर संगठन को मजबूत करने की कवायद में जुट गई है। ये रहेगी ऑब्जर्वरों की मुख्य भूमिका
इन ऑब्जर्वरों को कोई औपचारिक पद नहीं, बल्कि धरातल पर काम करने का बड़ा टास्क दिया गया है। जिला और ब्लॉक अध्यक्षों का चयन: ऑब्जर्वर संबंधित जिलों में जाकर स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं और दावेदारों से सीधा संवाद करेंगे और ब्लॉक से लेकर जिला कार्यकारिणी तक के नाम तय करेंगे। विभिन्न गुटों के बीच तालमेल बिठाकर किसी एक गुट का वर्चस्व खत्म करना और सर्वसम्मत नामों की सूची हाईकमान को भेजना। क्षेत्र में पार्टी की वास्तविक स्थिति, कार्यकर्ताओं के असंतोष और स्थानीय मुद्दों की रिपोर्ट एआईसीसी प्रभारी संजय दत्त और प्रदेश नेतृत्व को देना। इस अभियान से ये मिलेगा फायदा
वर्षों से बिना संगठन चल रही कांग्रेस के लिए यह कदम ‘बूस्टर डोज’ की तरह है। लंबे समय से लंबित पड़े जिला व ब्लॉक अध्यक्षों के पदों पर नियुक्तियां होने से जमीनी कार्यकर्ता सक्रिय होंगे। मजबूत संगठन तैयार होने से भाजपा के कैडर-बेस्ड सांगठनिक ढांचे का मुकाबला करने में कांग्रेस को मदद मिलेगी। एआईसीसी (AICC) ऑब्जर्वरों की मौजूदगी यह सुनिश्चित करेगी कि केवल एक ही गुट की मनमानी न चले और एआईसीसी का सीधा नियंत्रण बना रहे।

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हिसार में कांग्रेस में संगठन सृजन अभियान कल:4 जिलों के लिए ऑब्जर्वर नियुक्त, पीसीसी मेंबर्स में हुड्डा गुट के विधायकों का दबदबा

हिसार में कांग्रेस में संगठन सृजन अभियान कल:4 जिलों के लिए ऑब्जर्वर नियुक्त, पीसीसी मेंबर्स में हुड्डा गुट के विधायकों का दबदबा

हरियाणा कांग्रेस ने ‘संगठन सृजन अभियान’ के तहत प्रदेश के 4 प्रमुख जिलों सिरसा, हिसार, पंचकूला और फरीदाबाद के लिए एआईसीसी (AICC) और पीसीसी (PCC) ऑब्जर्वरों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में पार्टी ने संतुलन साधने के साथ-साथ पीसीसी मेंबर-1 के तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा गुट के प्रमुख विधायकों को आगे रखकर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। हिसार और हांसी के लिए कल बालसमंद रोड स्थित मिलेनियम पैलेस में बैठक होगी। पीसीसी ऑब्जर्वरों के रूप में हुड्डा गुट के कद्दावर विधायकों को तैनात किया गया है। सिरसा में देवेंद्र हंस (MLA), हिसार व हांसी में पूर्व मंत्री व विधायक गीता भुक्कल (MLA), पंचकूला में बलवान दौलतपुरिया (MLA), फरीदाबाद में पूर्व आईएएस और विधायक चंद्रप्रकाश (MLA) को लगाया गया है। AICC प्रभारी संजय दत्त, PCC अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और AICC सचिव जितेंद्र बघेल की देखरेख में तैयार इस सूची के जरिए कांग्रेस जमीन पर संगठन को मजबूत करने की कवायद में जुट गई है। ये रहेगी ऑब्जर्वरों की मुख्य भूमिका
इन ऑब्जर्वरों को कोई औपचारिक पद नहीं, बल्कि धरातल पर काम करने का बड़ा टास्क दिया गया है। जिला और ब्लॉक अध्यक्षों का चयन: ऑब्जर्वर संबंधित जिलों में जाकर स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं और दावेदारों से सीधा संवाद करेंगे और ब्लॉक से लेकर जिला कार्यकारिणी तक के नाम तय करेंगे। विभिन्न गुटों के बीच तालमेल बिठाकर किसी एक गुट का वर्चस्व खत्म करना और सर्वसम्मत नामों की सूची हाईकमान को भेजना। क्षेत्र में पार्टी की वास्तविक स्थिति, कार्यकर्ताओं के असंतोष और स्थानीय मुद्दों की रिपोर्ट एआईसीसी प्रभारी संजय दत्त और प्रदेश नेतृत्व को देना। इस अभियान से ये मिलेगा फायदा
वर्षों से बिना संगठन चल रही कांग्रेस के लिए यह कदम ‘बूस्टर डोज’ की तरह है। लंबे समय से लंबित पड़े जिला व ब्लॉक अध्यक्षों के पदों पर नियुक्तियां होने से जमीनी कार्यकर्ता सक्रिय होंगे। मजबूत संगठन तैयार होने से भाजपा के कैडर-बेस्ड सांगठनिक ढांचे का मुकाबला करने में कांग्रेस को मदद मिलेगी। एआईसीसी (AICC) ऑब्जर्वरों की मौजूदगी यह सुनिश्चित करेगी कि केवल एक ही गुट की मनमानी न चले और एआईसीसी का सीधा नियंत्रण बना रहे।

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