7 मरीजों की आंखों में इन्फेक्शन बना पहेली:ऑपरेशन थिएटर में भी बैक्टीरिया मिले; रिपोर्ट में दावा- आंख खराब करने वाले खतरनाक बैक्टीरिया इनसे अलग

7 मरीजों की आंखों में इन्फेक्शन बना पहेली:ऑपरेशन थिएटर में भी बैक्टीरिया मिले; रिपोर्ट में दावा- आंख खराब करने वाले खतरनाक बैक्टीरिया इनसे अलग

डीडवाना-कुचामन जिले के कुचामन के सरकारी अस्पताल में ऑपरेशन के बाद 7 बुजुर्ग मरीजों की आंखों में इन्फेक्शन पहेली बन गया है। इस मामले में गठित जांच कमेटी 20 दिन बाद भी इन्फेक्शन का कारण नहीं ढूंढ पाई है। जांच कमेटी को अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में भी बैक्टीरिया तो मिले हैं। लेकिन ये वो बैक्टीरिया नहीं हैं, जिनसे बुजुर्गों की आंखों में इन्फेक्शन फैला था। हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि मरीजों की आंखों में जो बैक्टीरिया मिले, वो बेहद खतरनाक हैं। जरा-सी लापरवाही में आंखों की रोशनी तक जा सकती है। पढ़िए- एक्सक्लूसिव रिपोर्ट सबसे पहले जानते हैं क्या है पूरा मामला? कुचामन के राजकीय जिला अस्पताल में 28 जुलाई को 7 मरीजों की आंखों में मोतियाबिंद (कैटरेक्ट) का ऑपरेशन किया गया था। सभी की उम्र 60 वर्ष से ज्यादा है। ऑपरेशन के 24 घंटे बाद फॉलोअप में सामने आया कि सभी मरीजों की आंखों में गंभीर इन्फेक्शन हो गया है। आनन-फानन में 5 मरीजों को जयपुर के SMS और 2 को अजमेर के JLN अस्पताल में रेफर किया गया था। SMS अस्पताल के डॉक्टर्स ने पांचों मरीजों की विट्रैक्टॉमी सर्जरी (आंख की रेटिना के नीचे की तरफ इन्फेक्शन होने पर) की। इस ऑपरेशन के बाद दो मरीजों की रोशनी में कुछ सुधार हुआ। तीन मरीजों में इन्फेक्शन को आगे और बढ़ने से रोकने में मदद मिली। इन बैक्टीरिया की वजह से हुआ था इन्फेक्शन एसएमएस अस्पताल में मरीजों की कल्चर जांच में खुलासा हुआ कि मरीजों में एंटरोबैक्टर और सुडोमोनास जैसे इन्फेक्शन हुए हैं। इन इन्फेक्शन को ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया कहा जाता है। दो मरीजों में एंटरोबैक्टर क्लोएसी (Enterobacter cloacae), दो में सिट्रोबैक्टर ब्राकी (Citrobacter braakii) और एक में सुडोमोनास एरुगिनोसा (Pseudomonas aeruginosa) व एंटरोबैक्टर बैक्टीरिया मिला है। ऑपरेशन थिएटर में मिले दूसरे बैक्टीरिया, बड़ा सवाल- कैसे फैला इन्फेक्शन? जांच के लिहाज से अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को सील कर दिया गया था। एसएमएस अस्पताल के चार डॉक्टर्स की टीम जांच करने पहुंची। ऑपरेशन थिएटर में अलग-अलग जगहों, इक्विपमेंट्स से सैंपल जुटाकर उनमें बैक्टीरिया की जांच की गई। सैंपलों की जांच रिपोर्ट में ऐसा कोई बैक्टीरिया नहीं मिला, जिनसे मरीजों की आंख में इन्फेक्शन फैला था। हालांकि, सूत्रों के अनुसार ऑपरेशन थिएटर और इक्विपमेंट के सैंपल में ग्राम-पॉजिटिव बैक्टीरिया मिले हैं। लेकिन मरीजों की कल्चर रिपोर्ट में एंटरोबैक्टर और सुडोमोनास जैसे ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया पाए गए थे। मरीजों की आंखों में इन्फेक्शन कहां से फैला, इसके सोर्स का अब तक पता नहीं चल पाया है। मरीजों की आंख में मिले बैक्टीरिया बेहद खतरनाक- एक्सपर्ट एक्सपर्ट का कहना है- आंख बहुत ही सेंसेटिव पार्ट है। कल्चर रिपोर्ट में जो ग्राम-नेगेटिव एंटरोबैक्टर क्लोएसी बैक्टीरिया मिले हैं, आई सर्जरी के बाद आंख के अंदर चले जाएं, तो खतरनाक इन्फेक्शन कर सकते हैं। इससे आंख के अंदर सूजन और मवाद तक हो सकता है। साथ ही सही समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह आंखों की रोशनी भी छीन सकता है। इसी तरह सिट्रोबैक्टर ब्राकी बैक्टीरिया कॉर्निया, रेटिना में गंभीर इन्फेक्शन फैला सकता है। इससे आंखों में दर्द, धुंधलापन और रोशनी हमेशा के लिए जाने का खतरा रहता है। इसी तरह सुडोमोनास ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया में सबसे खतरनाक माना जाता है। यह कॉर्निया को कुछ ही घंटों या दिनों में गला सकता है। यह इतनी तेजी से डैमेज करता है कि कई बार आंख को बचाना भी मुश्किल हो जाता है। क्या आईड्रॉप या सर्जिकल आइटम से फैला इन्फेक्शन, असली वजह नहीं आई सामने इस मामले में ड्रग डिपार्टमेंट ने भी अपने स्तर पर जांच के लिए सैंपल जुटाए हैं। मोतियाबिंद सर्जरी के दौरान एड्रेनालाइन इंजेक्शन, कंपाउंड सोडियम लैक्टेट इंजेक्शन, सिरिंज, लेंस और आई ड्रॉप का इस्तेमाल हुआ था, उन सभी के सैंपल लिए हैं। हालांकि 15 दिन से ज्यादा गुजर जाने के बाद भी अब तक सैंपल की रिपोर्ट सामने नहीं आ पाई है। जिन 5 आइटम के ड्रग डिपार्टमेंट ने सैंपल लिए हैं, उनमें से एक ही राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आरएमएससीएल) द्वारा सप्लाई किया गया था, जबकि शेष चार आइटम लोकल स्तर पर खरीदे गए थे। 7 महीने में 700 से ज्यादा ऑपरेशन कुचामन अस्पताल में इस साल जनवरी से लेकर जुलाई तक 700 से अधिक मोतियाबिंद के ऑपरेशन हुए हैं। जुलाई में ही 122 ऑपरेशन हो चुके हैं। लेकिन इस तरह का कोई मामला पहले कभी सामने नहीं आया था। सीनियर आई स्पेशलिस्ट डॉ. सोनू गोयल ने बताया- ऑपरेशन थिएटर में सप्लाई होने वाले सभी सर्जिकल आइटम, दवाइयों की सप्लाई विश्वसनीय एजेंसी से होनी चाहिए। अन्यथा इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। … यह खबर भी पढ़ें… मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद सफेद हुईं आंखें, ऑपरेशन थिएटर सील:रोशनी जाने का खतरा; गंभीर हालत में 5 मरीज जयपुर और 2 अजमेर रेफर

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