जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा आतंकी जफर मेरठ के कोतवाली क्षेत्र के इस्माइल नगर में स्थित मदरसा दारुल उलूम अरबिक कॉलेज में तीन साल रहा। इस बात के साक्ष्य मदरसे से मिले हैं, जिनको एटीएस ने भी जुटा लिया है। फिलहाल एटीएस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि जफर उस दौरान यहां किस तरह आया और किन किन लोगों के संपर्क में रहा। उसकी किस तरह की मेजोरिटी थी और आज तक कौन उसकी फ्रेंड लिस्ट में मौजूद है। यूपी एटीएस ने सोमवार को मोहम्मद जफर नाम के आतंकी को गिरफ्तार कर पाकिस्तानी फंडिंग का भंडाफोड़ किया था। वह आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के लिए यहां काम कर रहा था। उसका काम मस्जिदों के नाम पर चंदा उगाना और उसे पाकिस्तान भेजना था ताकि जेहाद में उस पैसे का उपयोग किया जा सके। वह लंबे समय से एटीएस के रडार पर थी। एटीएस गोपनीय तरीके से उसका नेटवर्क खंगाल रही थी। सोमवार को पुष्टि होने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। मोहम्मद जफर की गिरफ्तारी के साथ ही कई चौकाने वाले खुलासे भी हुए हैं। सोशल मीडिया पर एक्टिव था जफर
एटीएस ने खुलासा किया कि जफर सोशल मीडिया के जरिए जेहाद को बढ़ावा दे रहा था। वह मसूद अजहर को अपना रोल मॉडल मानता था और उसके साहित्य के जरिए लोगों को जिहाद के लिए तैयार करता था। उसने अपनी सोशल मीडिया आईडी से मौलाना मसूद अजहर के कई भड़काऊ भाषण भी समय समय पर अपलोड किए थे। पुलिस को उसके मोबाइल फोन में पाकिस्तानी कनेक्शन भी मिले हैं। वहां के कई व्हाट्सअप ग्रुपों पर वह एक्टिव था। तीन साल मेरठ के मदरसे में रहा जफर
एटीएस ने छानबीन की तो पता चला कि मोहम्मद जफर ने लंबा समय मेरठ के कोतवाली स्थित मदरसे में भी गुजारा है। वह यहां की एक मस्जिद के नाम पर चंदा एकत्र कर रहा था। इस पैसे को वह सीधे पाकिस्तान पहुंचाता था। मदरसा दारुल उलूम अरबिक कॉलेज में वह तीन साल रहा। हालांकि मदरसे के संचालक ने उसकी संदिग्ध गतिविधि को लेकर अनभिज्ञता जताई है। मदरसे में जफर का रिकार्ड मौजूद
मदरसा दारुल उलूम अरबिक कॉलेज में मोहम्मद जफर की मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं। यहां के प्रिंसिपल मोहम्मद रिजवान ने बताया कि जफर ने वर्ष 2018-19 के सेशन में उनके मदरसे में एडमिशन लिया था। वर्ष 2019-20 के सेशन में वह दसवीं में आया। उसने बोर्ड परीक्षा दी लेकिन वह बुरी तरह फेल हो गया। दसवीं में मिले 600 में से 124 अंक
प्रिंसिपल मोहम्मद रिजवान ने बताया कि जफर पढ़ाई में बहुत कमजोर था। वर्ष 2019-20 में दी दसवीं की परीक्षा में वह 600 में से केवल 124 अंक ही अर्जित कर पाया। इसके बाद उसने वर्ष 2020-21 का पूरा सेशन ड्राप कर दिया। वर्ष 2021-22 के सेशन में वह दोबारा आया और एडमिशन लिया। तब भी वह बोर्ड के एग्जाम में अपीयर नहीं हुआ। व्यवहार में नहीं दिखी कोई संदिग्धता
मोहम्मद रिजवान बताते हैं कि उनके पास जफर का तीन सेशन का रिकार्ड उपलब्ध है जो उसकी शैक्षिक क्षमता को दर्शा रहा है। उसके व्यवहार की बात करें तो उस वक्त उसका जरा भी संदिग्ध व्यवहार नहीं प्रतीत हुआ। उसकी किसी भी गतिविधि पर कोई शक नहीं हुआ।

