कैमूर में बारिश का मौसम शुरू होते ही सर्पदंश की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। जून से अब तक सर्पदंश के 135 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें अस्पताल पहुंचने में देरी और समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण 6 गंभीर मरीजों की इलाज के दौरान मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद ग्रामीण इलाकों में झाड़-फूंक और अंधविश्वास के कारण मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी हो रही है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि सांप काटने की स्थिति में किसी भी तरह के झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय बर्बाद न करें। पीड़ित को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाएं। ओझा-गुनी के चक्कर में गंवा रहे कीमती समय स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सर्पदंश के बाद शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग पहले मरीज को ओझा-गुनी के पास ले जाते हैं। झाड़-फूंक में काफी समय निकल जाने के बाद जब मरीज की हालत बिगड़ती है, तब उसे अस्पताल लाया जाता है। अस्पताल पहुंचने तक कई मरीजों की स्थिति गंभीर हो जाती है। ऐसे मामलों में इलाज के बावजूद जान बचाना मुश्किल हो जाता है। स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को जागरूक कर रहा है कि सर्पदंश के बाद सीधे अस्पताल पहुंचना ही सबसे सुरक्षित कदम है। छत पर सो रहे दो भाइयों की मौत ने बढ़ाई चिंता हाल ही में कुदरा थाना क्षेत्र के अजगरा गांव में छत पर सो रहे दो सगे भाइयों की सर्पदंश से मौत हो गई थी। बताया गया कि सांप के काटने के बाद दोनों को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक में समय गंवाया गया। इलाज में देरी होने के कारण दोनों की हालत गंभीर हो गई और उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश के बाद अंधविश्वास के कारण होने वाली देरी पर सवाल खड़े किए हैं। सदर अस्पताल में 250 वायल एंटी-स्नेक वेनम का स्टॉक सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि अस्पताल में सर्पदंश के मरीजों के इलाज की पूरी व्यवस्था है। वर्तमान में अस्पताल में 250 वायल एंटी-स्नेक वेनम (एंटी-स्नेक वेनम) का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि सर्पदंश के मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल में आवश्यक दवाएं उपलब्ध रखी जा रही हैं। दवा की कमी नहीं होने दी जाएगी। ‘झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें’ सिविल सर्जन डॉ. चंदेश्वरी रजक ने आम लोगों से अपील की है कि सांप काटने के बाद झाड़-फूंक के चक्कर में पड़कर मरीज की जान जोखिम में न डालें। उन्होंने कहा कि सर्पदंश की घटना होते ही पीड़ित को बिना देरी सीधे सदर अस्पताल या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। समय पर अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सक मरीज की स्थिति के अनुसार एंटी-वेनम समेत जरूरी उपचार शुरू कर सकते हैं। बारिश में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बरसात के मौसम में सांप अपने बिलों से बाहर निकलकर सूखी और सुरक्षित जगहों की तलाश करते हैं। ऐसे में घरों, खेतों, खलिहानों और आसपास के इलाकों में सांप निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करने, जमीन पर सोने से बचने और घर के आसपास साफ-सफाई रखने की सलाह दी है। खेत या झाड़ियों में जाने के दौरान भी सावधानी बरतने को कहा गया है। समय पर अस्पताल पहुंचने से बच सकती है जान स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सर्पदंश के बाद सबसे महत्वपूर्ण है समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना। ग्रामीणों को यह समझना होगा कि झाड़-फूंक इलाज का विकल्प नहीं है। देरी होने पर मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है। जिले में सर्पदंश के 135 मामले सामने आने और 6 मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को सांप काटने की स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचाया जाए, ताकि समय रहते उपचार शुरू कर उसकी जान बचाई जा सके। कैमूर में बारिश का मौसम शुरू होते ही सर्पदंश की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। जून से अब तक सर्पदंश के 135 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें अस्पताल पहुंचने में देरी और समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण 6 गंभीर मरीजों की इलाज के दौरान मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद ग्रामीण इलाकों में झाड़-फूंक और अंधविश्वास के कारण मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी हो रही है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि सांप काटने की स्थिति में किसी भी तरह के झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय बर्बाद न करें। पीड़ित को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाएं। ओझा-गुनी के चक्कर में गंवा रहे कीमती समय स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सर्पदंश के बाद शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग पहले मरीज को ओझा-गुनी के पास ले जाते हैं। झाड़-फूंक में काफी समय निकल जाने के बाद जब मरीज की हालत बिगड़ती है, तब उसे अस्पताल लाया जाता है। अस्पताल पहुंचने तक कई मरीजों की स्थिति गंभीर हो जाती है। ऐसे मामलों में इलाज के बावजूद जान बचाना मुश्किल हो जाता है। स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को जागरूक कर रहा है कि सर्पदंश के बाद सीधे अस्पताल पहुंचना ही सबसे सुरक्षित कदम है। छत पर सो रहे दो भाइयों की मौत ने बढ़ाई चिंता हाल ही में कुदरा थाना क्षेत्र के अजगरा गांव में छत पर सो रहे दो सगे भाइयों की सर्पदंश से मौत हो गई थी। बताया गया कि सांप के काटने के बाद दोनों को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक में समय गंवाया गया। इलाज में देरी होने के कारण दोनों की हालत गंभीर हो गई और उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश के बाद अंधविश्वास के कारण होने वाली देरी पर सवाल खड़े किए हैं। सदर अस्पताल में 250 वायल एंटी-स्नेक वेनम का स्टॉक सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि अस्पताल में सर्पदंश के मरीजों के इलाज की पूरी व्यवस्था है। वर्तमान में अस्पताल में 250 वायल एंटी-स्नेक वेनम (एंटी-स्नेक वेनम) का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि सर्पदंश के मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल में आवश्यक दवाएं उपलब्ध रखी जा रही हैं। दवा की कमी नहीं होने दी जाएगी। ‘झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें’ सिविल सर्जन डॉ. चंदेश्वरी रजक ने आम लोगों से अपील की है कि सांप काटने के बाद झाड़-फूंक के चक्कर में पड़कर मरीज की जान जोखिम में न डालें। उन्होंने कहा कि सर्पदंश की घटना होते ही पीड़ित को बिना देरी सीधे सदर अस्पताल या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। समय पर अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सक मरीज की स्थिति के अनुसार एंटी-वेनम समेत जरूरी उपचार शुरू कर सकते हैं। बारिश में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बरसात के मौसम में सांप अपने बिलों से बाहर निकलकर सूखी और सुरक्षित जगहों की तलाश करते हैं। ऐसे में घरों, खेतों, खलिहानों और आसपास के इलाकों में सांप निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करने, जमीन पर सोने से बचने और घर के आसपास साफ-सफाई रखने की सलाह दी है। खेत या झाड़ियों में जाने के दौरान भी सावधानी बरतने को कहा गया है। समय पर अस्पताल पहुंचने से बच सकती है जान स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सर्पदंश के बाद सबसे महत्वपूर्ण है समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना। ग्रामीणों को यह समझना होगा कि झाड़-फूंक इलाज का विकल्प नहीं है। देरी होने पर मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है। जिले में सर्पदंश के 135 मामले सामने आने और 6 मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को सांप काटने की स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचाया जाए, ताकि समय रहते उपचार शुरू कर उसकी जान बचाई जा सके।

