सहरसा के काशनगर पंचायत के बराही वार्ड नंबर-11 के करीब 50 भूमिहीन परिवारों को वर्ष 1991 में भू-हदबंदी के तहत जमीन का पर्चा तो मिल गया, लेकिन करीब 35 साल बाद भी उन्हें आवंटित जमीन पर दखल-कब्जा नहीं मिल सका है। इससे आक्रोशित परचाधारियों ने मंगलवार को सहरसा कलेक्ट्रेट के समीप प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में इंदल पासवान, सजन देवी, शिबू पासवान समेत दर्जनों परचाधारी परिवार शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन से पर्चे में आवंटित जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराकर जल्द से जल्द लाभुकों को दखल-कब्जा दिलाने की मांग की। 1991 में मिला था जमीन का पर्चा, 35 साल बाद भी इंतजार परचाधारियों ने बताया कि वर्ष 1991 में भू-हदबंदी के तहत करीब 50 भूमिहीन परिवारों को जमीन का पर्चा दिया गया था। उस समय परिवारों को उम्मीद थी कि अब उनके पास अपना घर बनाने और रहने के लिए जमीन होगी। लेकिन पर्चा मिलने के करीब 35 वर्ष बाद भी जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कागज पर जमीन आवंटित होने के बावजूद वे आज भी भूमिहीनों की तरह जीवन जीने को मजबूर हैं। कई बार अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। पर्चे वाली जमीन पर दबंगों के कब्जे का आरोप परचाधारियों ने आरोप लगाया कि पर्चे में आवंटित जमीन के कई भूखंडों पर दबंग लोगों ने कथित रूप से कब्जा कर रखा है। वहीं, कुछ जमीन के भूखंडों को फर्जी तरीके से हस्तांतरित किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। लाभुकों ने प्रशासन से मांग की कि पर्चे में दर्ज जमीन की दोबारा जांच कराई जाए। इसके बाद जमीन की वास्तविक स्थिति की पहचान करते हुए यदि कहीं अवैध कब्जा है तो उसे हटाया जाए। पोखर किनारे घर बनाकर रहने को मजबूर परिवार प्रदर्शनकारियों ने बताया कि आवंटित जमीन पर कब्जा नहीं मिलने के कारण कई परिवार बिहार सरकार की जमीन पर स्थित पोखर के किनारे घर बनाकर रहने को मजबूर हैं। अब प्रशासन की ओर से पोखर की जमीन खाली करने के लिए लगातार नोटिस दिया जा रहा है। लाभुकों का कहना है कि वे सरकारी जमीन पर स्थायी रूप से कब्जा बनाए रखने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन जब तक उन्हें सरकार की ओर से पहले से आवंटित जमीन पर कब्जा नहीं मिलता, तब तक वे कहां जाएंगे। ‘पहले पर्चे वाली जमीन पर कब्जा दिलाएं’ परचाधारियों ने कहा कि प्रशासन को पोखर की जमीन खाली कराने से पहले उन परिवारों की समस्या का समाधान करना चाहिए, जिनके नाम पहले से जमीन का पर्चा जारी किया जा चुका है। उन्होंने मांग की कि पर्चे वाली जमीन की पैमाइश और जांच कराकर उसे अतिक्रमणमुक्त कराया जाए और सभी लाभुकों को मौके पर दखल-कब्जा दिलाया जाए। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक आवंटित जमीन पर कब्जा नहीं दिलाया जाता, तब तक वे पोखर की जमीन खाली नहीं करेंगे। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को बताई समस्या प्रदर्शन के बाद परचाधारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन को अपनी मांगों से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों से मामले की गंभीरता से जांच कर करीब 35 वर्षों से लंबित समस्या का समाधान कराने की मांग की। लाभुकों ने कहा कि उनके पास जमीन आवंटित होने का दस्तावेज है, लेकिन जमीन पर कब्जा नहीं होने के कारण वे अपने अधिकार से वंचित हैं। ऐसे में प्रशासन को मामले में हस्तक्षेप कर उन्हें उनका अधिकार दिलाना चाहिए। समाधान नहीं हुआ तो अनशन की चेतावनी परचाधारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्या का जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वे अनशन और भूख हड़ताल करने के लिए मजबूर होंगे। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि मामले में संबंधित विभागों के अधिकारियों की टीम गठित कर जमीन की जांच कराई जाए और जल्द कार्रवाई करते हुए वर्षों से लंबित दखल-कब्जे की समस्या का समाधान किया जाए। सहरसा के काशनगर पंचायत के बराही वार्ड नंबर-11 के करीब 50 भूमिहीन परिवारों को वर्ष 1991 में भू-हदबंदी के तहत जमीन का पर्चा तो मिल गया, लेकिन करीब 35 साल बाद भी उन्हें आवंटित जमीन पर दखल-कब्जा नहीं मिल सका है। इससे आक्रोशित परचाधारियों ने मंगलवार को सहरसा कलेक्ट्रेट के समीप प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में इंदल पासवान, सजन देवी, शिबू पासवान समेत दर्जनों परचाधारी परिवार शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन से पर्चे में आवंटित जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराकर जल्द से जल्द लाभुकों को दखल-कब्जा दिलाने की मांग की। 1991 में मिला था जमीन का पर्चा, 35 साल बाद भी इंतजार परचाधारियों ने बताया कि वर्ष 1991 में भू-हदबंदी के तहत करीब 50 भूमिहीन परिवारों को जमीन का पर्चा दिया गया था। उस समय परिवारों को उम्मीद थी कि अब उनके पास अपना घर बनाने और रहने के लिए जमीन होगी। लेकिन पर्चा मिलने के करीब 35 वर्ष बाद भी जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कागज पर जमीन आवंटित होने के बावजूद वे आज भी भूमिहीनों की तरह जीवन जीने को मजबूर हैं। कई बार अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। पर्चे वाली जमीन पर दबंगों के कब्जे का आरोप परचाधारियों ने आरोप लगाया कि पर्चे में आवंटित जमीन के कई भूखंडों पर दबंग लोगों ने कथित रूप से कब्जा कर रखा है। वहीं, कुछ जमीन के भूखंडों को फर्जी तरीके से हस्तांतरित किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। लाभुकों ने प्रशासन से मांग की कि पर्चे में दर्ज जमीन की दोबारा जांच कराई जाए। इसके बाद जमीन की वास्तविक स्थिति की पहचान करते हुए यदि कहीं अवैध कब्जा है तो उसे हटाया जाए। पोखर किनारे घर बनाकर रहने को मजबूर परिवार प्रदर्शनकारियों ने बताया कि आवंटित जमीन पर कब्जा नहीं मिलने के कारण कई परिवार बिहार सरकार की जमीन पर स्थित पोखर के किनारे घर बनाकर रहने को मजबूर हैं। अब प्रशासन की ओर से पोखर की जमीन खाली करने के लिए लगातार नोटिस दिया जा रहा है। लाभुकों का कहना है कि वे सरकारी जमीन पर स्थायी रूप से कब्जा बनाए रखने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन जब तक उन्हें सरकार की ओर से पहले से आवंटित जमीन पर कब्जा नहीं मिलता, तब तक वे कहां जाएंगे। ‘पहले पर्चे वाली जमीन पर कब्जा दिलाएं’ परचाधारियों ने कहा कि प्रशासन को पोखर की जमीन खाली कराने से पहले उन परिवारों की समस्या का समाधान करना चाहिए, जिनके नाम पहले से जमीन का पर्चा जारी किया जा चुका है। उन्होंने मांग की कि पर्चे वाली जमीन की पैमाइश और जांच कराकर उसे अतिक्रमणमुक्त कराया जाए और सभी लाभुकों को मौके पर दखल-कब्जा दिलाया जाए। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक आवंटित जमीन पर कब्जा नहीं दिलाया जाता, तब तक वे पोखर की जमीन खाली नहीं करेंगे। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को बताई समस्या प्रदर्शन के बाद परचाधारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन को अपनी मांगों से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों से मामले की गंभीरता से जांच कर करीब 35 वर्षों से लंबित समस्या का समाधान कराने की मांग की। लाभुकों ने कहा कि उनके पास जमीन आवंटित होने का दस्तावेज है, लेकिन जमीन पर कब्जा नहीं होने के कारण वे अपने अधिकार से वंचित हैं। ऐसे में प्रशासन को मामले में हस्तक्षेप कर उन्हें उनका अधिकार दिलाना चाहिए। समाधान नहीं हुआ तो अनशन की चेतावनी परचाधारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्या का जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वे अनशन और भूख हड़ताल करने के लिए मजबूर होंगे। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि मामले में संबंधित विभागों के अधिकारियों की टीम गठित कर जमीन की जांच कराई जाए और जल्द कार्रवाई करते हुए वर्षों से लंबित दखल-कब्जे की समस्या का समाधान किया जाए।

