युगांडा में हरियाणवियों ने डाले पेड़ों पर झूले:कंपाला में गूंजा हरियाली तीज का उत्सव, घेवर भी बनाकर खाए, जीवंत रखी हरियाणवी संस्कृति

युगांडा में हरियाणवियों ने डाले पेड़ों पर झूले:कंपाला में गूंजा हरियाली तीज का उत्सव, घेवर भी बनाकर खाए, जीवंत रखी हरियाणवी संस्कृति

अफ्रीकी देश युगांडा की राजधानी कंपाला में रह रहे हरियाणा के प्रवासी परिवारों ने हरियाली तीज का पर्व पूरे उत्साह, पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाया। हजारों किलोमीटर अपने वतन से दूर रहने के बावजूद प्रवासी हरियाणवियों ने तीज के माध्यम से अपनी संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखा। इस दौरान महिलाओं ने झूला झूलकर तीज का आनंद लिया, वहीं सभी ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं। जानकारी के अनुसार, कंपाला में हरियाणा के करीब 38 से 40 लोग विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं। इनमें से करीब 15 से 20 लोग एक स्थान पर एकत्र हुए और हरियाली तीज का सामूहिक आयोजन किया। कार्यक्रम के दौरान हरियाणवी संस्कृति की झलक देखने को मिली। महिलाओं ने पारंपरिक अंदाज में तीज का उत्सव मनाया, जबकि पुरुषों ने भी आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। झूला रहा आकर्षण का केंद्र आयोजन में विशेष रूप से झूले की व्यवस्था की गई, जो हरियाली तीज का प्रमुख आकर्षण रहा। सभी ने पारंपरिक गीत-संगीत के बीच झूला झूलकर अपने बचपन और गांव की यादें ताजा कीं। प्रवासी परिवारों ने कहा कि विदेश में रहकर भारतीय और विशेष रूप से हरियाणवी संस्कृति के पर्व मनाने से अपनापन महसूस होता है और नई पीढ़ी भी अपनी संस्कृति से जुड़ी रहती है। गांव की याद आई इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने बताया कि तीज मनाते समय उन्हें अपने गांव, परिवार और दोस्तों की बहुत याद आई। हालांकि वे अपने देश से दूर हैं, लेकिन सभी ने मिलकर ऐसा माहौल बनाया कि उन्हें अपने घर जैसा अनुभव हुआ। उनका कहना था कि इस तरह के आयोजन प्रवासी भारतीयों को एक-दूसरे के करीब लाने का काम करते हैं और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये लोग रहे मुख्य रूप से कार्यक्रम में रोहतक के बारू राम, धर्मदेव आर्य, शुभा और सिद्धार्थ, नारनौल के रामपुरा निवासी सुमित यादव, रॉबिन यादव, बबीता यादव, भाव्या राव और गीत, हिसार के टिंकू और ममता सहित कई प्रवासी हरियाणवी परिवार मौजूद रहे। सभी ने भविष्य में भी हरियाणा के पारंपरिक त्योहारों को इसी तरह मिल-जुलकर मनाने का संकल्प लिया। वहीं महिलाओं ने पारंपरिक मिठाई घेवर भी बनाकर खाए। भावनात्मक जुड़ाव प्रवासी हरियाणवियों का कहना है कि विदेश में रहकर भी अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं से जुड़े रहना उनकी पहचान है। ऐसे आयोजन न केवल त्योहार की खुशियां साझा करते हैं, बल्कि अपने प्रदेश और देश के प्रति भावनात्मक जुड़ाव को भी मजबूत बनाते हैं।

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