जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में शांति भंग करने की कोशिशों को लेकर लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासन और सुरक्षा बल शांति बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। सिन्हा की यह टिप्पणी विस्थापित कश्मीरी पंडितों द्वारा एक कार्यक्रम में हाल की आतंकी घटनाओं के कारण घाटी में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा की मांग के बीच आई है।
सिन्हा ने यहां कश्मीरी पंडित वॉलंटियर्स (केपीवी) के सालाना कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘कई चुनौतियां हैं, जिनमें वह भी शामिल है जिसका आपने जिक्र किया। लेकिन मेरा मानना है कि इससे भी बड़ी चुनौतियां हैं जिनसे हमें निपटना है।’’
उन्होंने कहा कि पहले सबसे बड़ी चुनौती यह सोच थी कि जम्मू-कश्मीर में कोई भी राष्ट्रीय ध्वज उठाने को तैयार नहीं होगा। सिन्हा ने कहा, ‘‘लेकिन आज आपने देखा है कि तिरंगे को उठाने के लिए कितने सारे कंधे और कितने मज़बूत कंधे तैयार हैं।
आज आपने जो देखा, वह उसी बदलाव का एक सशक्त उदाहरण है।’
उपराज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर में हाल की आतंकी घटनाओं और शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने की कोशिशों के बारे में स्वीकार किया कि ऐसी कोशिशें हो रही हैं, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। सिन्हा ने कहा, ‘‘माहौल को फिर से खराब करने की कोशिशें की जा रही हैं। लेकिन चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।
ज़रूरी मुद्दों पर ध्यान दिया जा रहा है और यह आज शुरू नहीं हुआ है, बल्कि ऐसी कोशिशें कुछ समय से चल रही हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग अफवाहें भी फैलाते हैं। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि प्रशासन और सुरक्षा बल शांति बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। जो कोई भी मौजूदा शांति को भंग करने की कोशिश करेगा, उसे अपने मंसूबों में कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।’’
कश्मीरी पंडितों द्वारा राहत राशि बढ़ाने की मांग पर उपराज्यपाल ने कहा कि सरकार समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा,‘‘मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कहना चाहूंगा कि समाधान खोजने की कोशिशें की गई हैं और ये कोशिशें जारी हैं।’’
सिन्हा ने कहा, ‘‘हालांकि कुछ मुद्दों का समाधान किया जा सकता है, लेकिन कुछ अन्य मुद्दों का तुरंत समाधान नहीं किया जा सकता। फिर भी, जिन मामलों को यथाशीघ्र सुलझाया जा सकता है, उन्हें हल करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।’’
उप राज्यपाल की यह टिप्पणी केपीवी के संस्थापक विक्रम कौल के उस भाषण के बाद सामने आई, जिसमें उन्होंने सरकार और उपराज्यपाल से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल नहीं करने की अपील की थी। कौल ने सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं और केंद्र शासित प्रदेश के सामने मौजूद चुनौतियों का हवाला देते हुए कहा कि आतंकी हमलों के मद्देनजर घाटी में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के लिए मासिक राहत बढ़ाई जाए और उनकी लंबी अवधि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।


