सीवान में 5 साल बाद मर्डर के बदले मर्डर:12 अगस्त 2021 में लड़ाई, 15 को मर्डर; 12 अगस्त 2026 में नामजद की गोली मारकर हत्या

सीवान में 5 साल बाद मर्डर के बदले मर्डर:12 अगस्त 2021 में लड़ाई, 15 को मर्डर; 12 अगस्त 2026 में नामजद की गोली मारकर हत्या

सीवान के जीबी नगर थाना क्षेत्र में 12 अगस्त 2026 को दिनदहाड़े फाइनेंसकर्मी नीतीश कुमार उर्फ पिकलू की हत्या ने पांच साल पुरानी एक खूनी कहानी को फिर से सामने ला दिया है। तरवारा नहर के पास दो बाइक पर सवार चार अपराधियों ने नीतीश को घेरकर बेहद करीब से कई गोलियां मारीं। नीतीश जमीन पर गिर पड़ा तो अपराधी कुछ दूर गए, फिर वापस लौटे और उसे हिलाकर देखा। जब उन्हें उसके जिंदा होने की कोई उम्मीद नहीं दिखी तो सभी मौके से फरार हो गए। नीतीश को गंभीर हालत में पुलिस सदर अस्पताल लेकर पहुंची, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम में शरीर में कई गोली लगने की पुष्टि हुई है। सिर, कान के ऊपर, गर्दन, गाल और सीने के हिस्से में गोली के निशान मिले हैं। परिजन के अनुसार शरीर के अंदर चार गोलियां फंसी थीं। डॉक्टरों ने भी बताया कि हमलावरों ने बेहद करीब से निशाना बनाकर फायरिंग की थी, लेकिन इस हत्या की कहानी सिर्फ 12 अगस्त 2026 की घटना तक सीमित नहीं दिख रही। पुलिस के सामने अब पांच साल पुराना 2021 का हत्याकांड भी सामने आया है, जिसमें नीतीश कुमार उर्फ पिकलू खुद नामजद आरोपी था। पहले घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए पांच साल बाद हत्यारे की हत्या 12 अगस्त 2021 को गांव में नीतीश उर्फ पिकलू और बबलू सिंह के बेटे अंकित कुमार सिंह के बीच वर्चस्व को लेकर विवाद हुआ था। अगले दिन 13 अगस्त को अंकित अपने कुछ परिचितों के साथ नीतीश के घर पहुंचा। वहां दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई। स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप के बाद तत्काल मामला शांत हो गया। इसके बाद अंकित की मां की तरफ से नीतीश समेत अन्य लोगों के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसी विवाद के बीच अंकित की तरफ से आए अमलोरी निवासी हैप्पी चौबे के लापता होने की बात सामने आई। परिजन ने हैप्पी की तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बावजूद उसका कोई पता नहीं चला। तीन दिन बाद 15 अगस्त 2021 को जीबी नगर थाना क्षेत्र में जिन बाबा के पास पानी में हैप्पी का शव तैरता हुआ मिला। शव मिलने के बाद मामला हत्या में बदल गया। जांच के दौरान हैप्पी के गर्दन के पास गोली लगने की बात सामने आई थी। इसके बाद नीतीश उर्फ पिकलू समेत करीब 12-13 लोगों को नामजद करते हुए हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। आखिर कैसे हुई थी हैप्पी की हत्या पांच साल पुराने मामले की सबसे अहम कड़ी हैप्पी चौबे की आखिरी गतिविधियां हैं। सामने आई जानकारी के अनुसार 13 अगस्त 2021 को हैप्पी चौबे अंकित कुमार सिंह के घर जाने के लिए निकला था। उसके साथ रातुल चौबे भी था। दोनों को उनके ममेरे भाई राहुल चौबे ने भेजा था। इसके बाद हैप्पी वापस नहीं लौटा। परिवार उसकी तलाश करता रहा और दो दिन बाद उसका शव पानी में मिला। गर्दन में गोली लगने की बात सामने आने के बाद पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया था। अब 12 अगस्त 2026 को उसी पुराने हत्याकांड के नामजद आरोपी नीतीश की हत्या हो गई। यही वजह है कि गांव में पांच साल पुराने विवाद और वर्तमान हत्या को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, पुलिस जांच में अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि नीतीश की हत्या 2021 के हैप्पी चौबे हत्याकांड से जुड़ी हुई है। यह महज संयोग है या पुरानी हत्या का बदला लेने की कोई कड़ी है, इसका जवाब पुलिस अनुसंधान के बाद ही मिलेगा। बच्चे को स्कूल छोड़ने के बाद बाजार गया था नीतीश परिजनों के अनुसार घटना के दिन नीतीश अपने बच्चे को स्कूल छोड़ने के बाद बाजार गया था। वहां उसने दाढ़ी बनवाई और फिर बाइक से घर लौट रहा था। उसे शायद अंदाजा भी नहीं था कि रास्ते में हमलावर उसका इंतजार कर रहे हैं। तरवारा नहर के पास पहुंचते ही दो बाइक पर सवार चार अपराधियों ने उसे घेर लिया। अपराधियों ने बाइक रोककर बेहद नजदीक से फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई गोलीबारी से आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। नीतीश को कई गोलियां लगीं और वह सड़क पर गिर पड़ा। इसके बाद अपराधी कुछ दूरी तक गए। फिर वापस लौटे और नीतीश के शरीर को हिलाकर देखा। जब उन्हें लगा कि वह जवाब नहीं दे रहा है, तो चारों अपराधी बाइक से फरार हो गए। घटना की यह पूरी शैली पुलिस के लिए भी जांच का अहम बिंदु बनी हुई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अपराधियों को नीतीश की गतिविधियों की जानकारी कैसे मिली और उन्होंने वारदात के लिए तरवारा नहर के पास की जगह को ही क्यों चुना। जीबी नगर थाने से सिर्फ 500 मीटर दूर हुई वारदात सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस जगह नीतीश की हत्या की गई, वह जीबी नगर थाना से महज करीब 500 मीटर की दूरी पर है। यानी थाना क्षेत्र के बीचोंबीच अपराधियों ने दिनदहाड़े हत्या की वारदात को अंजाम दिया और आसानी से फरार हो गए। गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। पुलिस और परिजनों को घटना की जानकारी दी गई। जीबी नगर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और घायल नीतीश को इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर गई, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। हत्या के बाद मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल की जांच की। वहां से साक्ष्य जुटाए गए हैं। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है, ताकि दोनों बाइक और उनमें सवार चारों अपराधियों की पहचान हो सके। सिर, गर्दन और सीने पर निशाना, बेहद करीब से चली गोलियां नीतीश की हत्या में हमलावरों ने शरीर के संवेदनशील हिस्सों को निशाना बनाया। पोस्टमार्टम के दौरान शरीर से चार गोलियां बरामद होने की बात सामने आई है। गोली लगने के निशान सिर, कान के ऊपर, गर्दन, गाल और सीने के हिस्से में मिले हैं। परिजनों के अनुसार गोली सिर, सीना, पेट और हार्ट के हिस्से में भी लगी थी। डॉक्टरों ने बताया कि गोलियां बेहद करीब से मारी गई थीं और शरीर के जिन हिस्सों को निशाना बनाया गया, वहां गंभीर क्षति हुई। बताया गया कि हार्ट में गोली लगने से गंभीर नुकसान हुआ था। सिर की हड्डी को भी क्षति पहुंची थी। शरीर के अन्य हिस्सों में गोली लगने से भी अंदरूनी अंगों को गंभीर नुकसान हुआ। इससे पुलिस को यह भी आशंका है कि यह अचानक हुआ हमला नहीं, बल्कि टारगेट किलिंग हो सकती है। हालांकि हत्या के मकसद की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। आवेदन में अंकित-रितिक समेत कई लोगों पर आरोप नीतीश की हत्या के बाद उसके पिता ने जीबी नगर थाने में आवेदन दिया है। इसमें अंकित कुमार सिंह, रितिक सिंह समेत अन्य लोगों पर गोली चलाने का आरोप लगाया गया है। आवेदन के अनुसार गोली चलने की आवाज सुनकर पिता मौके पर पहुंचे तो उन्होंने अपने बेटे को खून से लथपथ पाया। आवेदन में बबलू सिंह पर भी अपने बेटों और अन्य लोगों के साथ मिलकर हत्या कराने तथा पहले धमकी देने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने आवेदन के आधार पर लगाए गए आरोपों को जांच में शामिल कर लिया है। हालांकि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों को फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है। पुलिस साक्ष्यों के आधार पर यह तय करेगी कि हत्या में किसकी भूमिका थी। एक महीने पहले जमीन को लेकर भी हुआ था विवाद जांच में पांच साल पुराने हत्या कांड के अलावा एक नया विवाद भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि हत्या से करीब एक महीने पहले नीतीश का शंकर रेस्टोरेंट के संचालक लालबहादुर सिंह से जमीन को लेकर विवाद हुआ था। जमीन की रजिस्ट्री को लेकर दोनों के बीच कहासुनी होने की बात सामने आई है। पुलिस इस विवाद को भी जांच के दायरे में रख रही है। यानी नीतीश की हत्या के पीछे पुलिस के सामने फिलहाल एक नहीं, बल्कि कई संभावित एंगल हैं। एक तरफ 2021 का हैप्पी चौबे हत्याकांड है, जिसमें नीतीश नामजद आरोपी था। दूसरी तरफ 2026 में हत्या से करीब एक महीने पहले हुआ जमीन विवाद है। इसके अलावा हत्या से पहले धमकी दिए जाने का आरोप भी सामने आया है। परिजनों ने पहले दुश्मनी की जानकारी से किया था इनकार घटना के शुरुआती दौर में परिजनों की ओर से ऐसी किसी बड़ी दुश्मनी की जानकारी नहीं होने की बात कही गई थी। लेकिन हत्या के बाद थाने में दिए गए आवेदन में पुराने विवाद और धमकी का जिक्र सामने आया। यही वजह है कि पुलिस अब नीतीश के पिछले पांच वर्षों के विवादों और संपर्कों को खंगाल रही है। पुराने हत्या कांड में शामिल लोगों से लेकर हाल के जमीन विवाद तक, सभी बिंदुओं को जोड़कर जांच की जा रही है। पांच साल और एक तारीख ने बढ़ाए सवाल इस पूरे मामले का सबसे बड़ा संयोग 12 अगस्त की तारीख है। 12 अगस्त 2021 को नीतीश और अंकित के बीच वर्चस्व को लेकर विवाद शुरू हुआ था। इसके अगले दिन मारपीट हुई। 15 अगस्त को हैप्पी चौबे का शव मिला और बाद में हत्या के मामले में नीतीश समेत कई लोगों को नामजद किया गया। इसके ठीक पांच साल बाद 12 अगस्त 2026 को नीतीश की गोली मारकर हत्या कर दी गई। संयोग यहीं खत्म नहीं होता। 2021 के मामले में हैप्पी चौबे के गर्दन में गोली लगने की बात सामने आई थी और पांच साल बाद नीतीश की हत्या में भी गर्दन को निशाना बनाया गया। अब सवाल यही है कि क्या दोनों घटनाओं के बीच वास्तव में कोई कड़ी है? क्या 2021 के हत्याकांड का बदला लेने के लिए पांच साल बाद नीतीश को निशाना बनाया गया? क्या हत्या के पीछे 2021 के मामले से जुड़े लोगों की भूमिका है? या फिर जमीन विवाद और कोई दूसरा कारण इस हत्या की वजह बना? इन सवालों का जवाब अभी पुलिस जांच में तलाशा जा रहा है। FSL और SIT ने शुरू की जांच पुलिस ने हत्या की गंभीरता को देखते हुए वैज्ञानिक तरीके से जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए हैं। FSL की टीम ने भी मौके से जरूरी नमूने लिए हैं। आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस नीतीश के मोबाइल की कॉल डिटेल और घटना से पहले उसके संपर्क में रहे लोगों की जानकारी भी जुटा रही है। हत्या से पहले उसकी गतिविधियां क्या थीं, किससे बातचीत हुई और कौन-कौन लोग उसके संपर्क में थे, इन सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। वहीं, 2021 के हैप्पी चौबे हत्याकांड की पुरानी प्राथमिकी और उसमें नामजद आरोपियों की भूमिका भी पुलिस दोबारा देख सकती है। दोनों मामलों के बीच कोई सीधा संबंध सामने आता है या नहीं, यह जांच के दौरान मिले साक्ष्यों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इतना जरूर है कि पांच साल बाद 12 अगस्त की तारीख ने जीबी नगर क्षेत्र की एक पुरानी खूनी कहानी को फिर जिंदा कर दिया है। 2021 में वर्चस्व के विवाद से शुरू हुई कहानी हैप्पी चौबे की हत्या तक पहुंची थी। अब उसी पुराने मामले के नामजद आरोपी नीतीश की 2026 में उसी तारीख को हत्या ने कई अनसुलझे सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ नीतीश के हत्यारों तक पहुंचने की नहीं, बल्कि इस बात का पता लगाने की भी है कि कहीं इस हत्या की जड़ पांच साल पुराने उस विवाद में तो नहीं छिपी है। सीवान के जीबी नगर थाना क्षेत्र में 12 अगस्त 2026 को दिनदहाड़े फाइनेंसकर्मी नीतीश कुमार उर्फ पिकलू की हत्या ने पांच साल पुरानी एक खूनी कहानी को फिर से सामने ला दिया है। तरवारा नहर के पास दो बाइक पर सवार चार अपराधियों ने नीतीश को घेरकर बेहद करीब से कई गोलियां मारीं। नीतीश जमीन पर गिर पड़ा तो अपराधी कुछ दूर गए, फिर वापस लौटे और उसे हिलाकर देखा। जब उन्हें उसके जिंदा होने की कोई उम्मीद नहीं दिखी तो सभी मौके से फरार हो गए। नीतीश को गंभीर हालत में पुलिस सदर अस्पताल लेकर पहुंची, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम में शरीर में कई गोली लगने की पुष्टि हुई है। सिर, कान के ऊपर, गर्दन, गाल और सीने के हिस्से में गोली के निशान मिले हैं। परिजन के अनुसार शरीर के अंदर चार गोलियां फंसी थीं। डॉक्टरों ने भी बताया कि हमलावरों ने बेहद करीब से निशाना बनाकर फायरिंग की थी, लेकिन इस हत्या की कहानी सिर्फ 12 अगस्त 2026 की घटना तक सीमित नहीं दिख रही। पुलिस के सामने अब पांच साल पुराना 2021 का हत्याकांड भी सामने आया है, जिसमें नीतीश कुमार उर्फ पिकलू खुद नामजद आरोपी था। पहले घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए पांच साल बाद हत्यारे की हत्या 12 अगस्त 2021 को गांव में नीतीश उर्फ पिकलू और बबलू सिंह के बेटे अंकित कुमार सिंह के बीच वर्चस्व को लेकर विवाद हुआ था। अगले दिन 13 अगस्त को अंकित अपने कुछ परिचितों के साथ नीतीश के घर पहुंचा। वहां दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई। स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप के बाद तत्काल मामला शांत हो गया। इसके बाद अंकित की मां की तरफ से नीतीश समेत अन्य लोगों के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसी विवाद के बीच अंकित की तरफ से आए अमलोरी निवासी हैप्पी चौबे के लापता होने की बात सामने आई। परिजन ने हैप्पी की तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बावजूद उसका कोई पता नहीं चला। तीन दिन बाद 15 अगस्त 2021 को जीबी नगर थाना क्षेत्र में जिन बाबा के पास पानी में हैप्पी का शव तैरता हुआ मिला। शव मिलने के बाद मामला हत्या में बदल गया। जांच के दौरान हैप्पी के गर्दन के पास गोली लगने की बात सामने आई थी। इसके बाद नीतीश उर्फ पिकलू समेत करीब 12-13 लोगों को नामजद करते हुए हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। आखिर कैसे हुई थी हैप्पी की हत्या पांच साल पुराने मामले की सबसे अहम कड़ी हैप्पी चौबे की आखिरी गतिविधियां हैं। सामने आई जानकारी के अनुसार 13 अगस्त 2021 को हैप्पी चौबे अंकित कुमार सिंह के घर जाने के लिए निकला था। उसके साथ रातुल चौबे भी था। दोनों को उनके ममेरे भाई राहुल चौबे ने भेजा था। इसके बाद हैप्पी वापस नहीं लौटा। परिवार उसकी तलाश करता रहा और दो दिन बाद उसका शव पानी में मिला। गर्दन में गोली लगने की बात सामने आने के बाद पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया था। अब 12 अगस्त 2026 को उसी पुराने हत्याकांड के नामजद आरोपी नीतीश की हत्या हो गई। यही वजह है कि गांव में पांच साल पुराने विवाद और वर्तमान हत्या को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, पुलिस जांच में अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि नीतीश की हत्या 2021 के हैप्पी चौबे हत्याकांड से जुड़ी हुई है। यह महज संयोग है या पुरानी हत्या का बदला लेने की कोई कड़ी है, इसका जवाब पुलिस अनुसंधान के बाद ही मिलेगा। बच्चे को स्कूल छोड़ने के बाद बाजार गया था नीतीश परिजनों के अनुसार घटना के दिन नीतीश अपने बच्चे को स्कूल छोड़ने के बाद बाजार गया था। वहां उसने दाढ़ी बनवाई और फिर बाइक से घर लौट रहा था। उसे शायद अंदाजा भी नहीं था कि रास्ते में हमलावर उसका इंतजार कर रहे हैं। तरवारा नहर के पास पहुंचते ही दो बाइक पर सवार चार अपराधियों ने उसे घेर लिया। अपराधियों ने बाइक रोककर बेहद नजदीक से फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई गोलीबारी से आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। नीतीश को कई गोलियां लगीं और वह सड़क पर गिर पड़ा। इसके बाद अपराधी कुछ दूरी तक गए। फिर वापस लौटे और नीतीश के शरीर को हिलाकर देखा। जब उन्हें लगा कि वह जवाब नहीं दे रहा है, तो चारों अपराधी बाइक से फरार हो गए। घटना की यह पूरी शैली पुलिस के लिए भी जांच का अहम बिंदु बनी हुई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अपराधियों को नीतीश की गतिविधियों की जानकारी कैसे मिली और उन्होंने वारदात के लिए तरवारा नहर के पास की जगह को ही क्यों चुना। जीबी नगर थाने से सिर्फ 500 मीटर दूर हुई वारदात सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस जगह नीतीश की हत्या की गई, वह जीबी नगर थाना से महज करीब 500 मीटर की दूरी पर है। यानी थाना क्षेत्र के बीचोंबीच अपराधियों ने दिनदहाड़े हत्या की वारदात को अंजाम दिया और आसानी से फरार हो गए। गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। पुलिस और परिजनों को घटना की जानकारी दी गई। जीबी नगर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और घायल नीतीश को इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर गई, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। हत्या के बाद मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल की जांच की। वहां से साक्ष्य जुटाए गए हैं। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है, ताकि दोनों बाइक और उनमें सवार चारों अपराधियों की पहचान हो सके। सिर, गर्दन और सीने पर निशाना, बेहद करीब से चली गोलियां नीतीश की हत्या में हमलावरों ने शरीर के संवेदनशील हिस्सों को निशाना बनाया। पोस्टमार्टम के दौरान शरीर से चार गोलियां बरामद होने की बात सामने आई है। गोली लगने के निशान सिर, कान के ऊपर, गर्दन, गाल और सीने के हिस्से में मिले हैं। परिजनों के अनुसार गोली सिर, सीना, पेट और हार्ट के हिस्से में भी लगी थी। डॉक्टरों ने बताया कि गोलियां बेहद करीब से मारी गई थीं और शरीर के जिन हिस्सों को निशाना बनाया गया, वहां गंभीर क्षति हुई। बताया गया कि हार्ट में गोली लगने से गंभीर नुकसान हुआ था। सिर की हड्डी को भी क्षति पहुंची थी। शरीर के अन्य हिस्सों में गोली लगने से भी अंदरूनी अंगों को गंभीर नुकसान हुआ। इससे पुलिस को यह भी आशंका है कि यह अचानक हुआ हमला नहीं, बल्कि टारगेट किलिंग हो सकती है। हालांकि हत्या के मकसद की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। आवेदन में अंकित-रितिक समेत कई लोगों पर आरोप नीतीश की हत्या के बाद उसके पिता ने जीबी नगर थाने में आवेदन दिया है। इसमें अंकित कुमार सिंह, रितिक सिंह समेत अन्य लोगों पर गोली चलाने का आरोप लगाया गया है। आवेदन के अनुसार गोली चलने की आवाज सुनकर पिता मौके पर पहुंचे तो उन्होंने अपने बेटे को खून से लथपथ पाया। आवेदन में बबलू सिंह पर भी अपने बेटों और अन्य लोगों के साथ मिलकर हत्या कराने तथा पहले धमकी देने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने आवेदन के आधार पर लगाए गए आरोपों को जांच में शामिल कर लिया है। हालांकि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों को फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है। पुलिस साक्ष्यों के आधार पर यह तय करेगी कि हत्या में किसकी भूमिका थी। एक महीने पहले जमीन को लेकर भी हुआ था विवाद जांच में पांच साल पुराने हत्या कांड के अलावा एक नया विवाद भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि हत्या से करीब एक महीने पहले नीतीश का शंकर रेस्टोरेंट के संचालक लालबहादुर सिंह से जमीन को लेकर विवाद हुआ था। जमीन की रजिस्ट्री को लेकर दोनों के बीच कहासुनी होने की बात सामने आई है। पुलिस इस विवाद को भी जांच के दायरे में रख रही है। यानी नीतीश की हत्या के पीछे पुलिस के सामने फिलहाल एक नहीं, बल्कि कई संभावित एंगल हैं। एक तरफ 2021 का हैप्पी चौबे हत्याकांड है, जिसमें नीतीश नामजद आरोपी था। दूसरी तरफ 2026 में हत्या से करीब एक महीने पहले हुआ जमीन विवाद है। इसके अलावा हत्या से पहले धमकी दिए जाने का आरोप भी सामने आया है। परिजनों ने पहले दुश्मनी की जानकारी से किया था इनकार घटना के शुरुआती दौर में परिजनों की ओर से ऐसी किसी बड़ी दुश्मनी की जानकारी नहीं होने की बात कही गई थी। लेकिन हत्या के बाद थाने में दिए गए आवेदन में पुराने विवाद और धमकी का जिक्र सामने आया। यही वजह है कि पुलिस अब नीतीश के पिछले पांच वर्षों के विवादों और संपर्कों को खंगाल रही है। पुराने हत्या कांड में शामिल लोगों से लेकर हाल के जमीन विवाद तक, सभी बिंदुओं को जोड़कर जांच की जा रही है। पांच साल और एक तारीख ने बढ़ाए सवाल इस पूरे मामले का सबसे बड़ा संयोग 12 अगस्त की तारीख है। 12 अगस्त 2021 को नीतीश और अंकित के बीच वर्चस्व को लेकर विवाद शुरू हुआ था। इसके अगले दिन मारपीट हुई। 15 अगस्त को हैप्पी चौबे का शव मिला और बाद में हत्या के मामले में नीतीश समेत कई लोगों को नामजद किया गया। इसके ठीक पांच साल बाद 12 अगस्त 2026 को नीतीश की गोली मारकर हत्या कर दी गई। संयोग यहीं खत्म नहीं होता। 2021 के मामले में हैप्पी चौबे के गर्दन में गोली लगने की बात सामने आई थी और पांच साल बाद नीतीश की हत्या में भी गर्दन को निशाना बनाया गया। अब सवाल यही है कि क्या दोनों घटनाओं के बीच वास्तव में कोई कड़ी है? क्या 2021 के हत्याकांड का बदला लेने के लिए पांच साल बाद नीतीश को निशाना बनाया गया? क्या हत्या के पीछे 2021 के मामले से जुड़े लोगों की भूमिका है? या फिर जमीन विवाद और कोई दूसरा कारण इस हत्या की वजह बना? इन सवालों का जवाब अभी पुलिस जांच में तलाशा जा रहा है। FSL और SIT ने शुरू की जांच पुलिस ने हत्या की गंभीरता को देखते हुए वैज्ञानिक तरीके से जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए हैं। FSL की टीम ने भी मौके से जरूरी नमूने लिए हैं। आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस नीतीश के मोबाइल की कॉल डिटेल और घटना से पहले उसके संपर्क में रहे लोगों की जानकारी भी जुटा रही है। हत्या से पहले उसकी गतिविधियां क्या थीं, किससे बातचीत हुई और कौन-कौन लोग उसके संपर्क में थे, इन सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। वहीं, 2021 के हैप्पी चौबे हत्याकांड की पुरानी प्राथमिकी और उसमें नामजद आरोपियों की भूमिका भी पुलिस दोबारा देख सकती है। दोनों मामलों के बीच कोई सीधा संबंध सामने आता है या नहीं, यह जांच के दौरान मिले साक्ष्यों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इतना जरूर है कि पांच साल बाद 12 अगस्त की तारीख ने जीबी नगर क्षेत्र की एक पुरानी खूनी कहानी को फिर जिंदा कर दिया है। 2021 में वर्चस्व के विवाद से शुरू हुई कहानी हैप्पी चौबे की हत्या तक पहुंची थी। अब उसी पुराने मामले के नामजद आरोपी नीतीश की 2026 में उसी तारीख को हत्या ने कई अनसुलझे सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ नीतीश के हत्यारों तक पहुंचने की नहीं, बल्कि इस बात का पता लगाने की भी है कि कहीं इस हत्या की जड़ पांच साल पुराने उस विवाद में तो नहीं छिपी है।  

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