सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर और मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने शुक्रवार को गंगटोक में ‘तिरंगा पदयात्रा’ का नेतृत्व किया। राष्ट्रीय ध्वज हाथों में लेकर और देशभक्ति के नारे लगाते हुए राज्य के मंत्रियों, विधायकों, सरकारी एवं पुलिस अधिकारियों तथा छात्रों ने इस पदयात्रा में हिस्सा लिया। यह पदयात्रा एमजी मार्ग से शुरू होकर मनन केंद्र के पास समाप्त हुई।
मनन केंद्र में राज्य के संस्कृति, गृह तथा सूचना एवं जनसंपर्क विभागों ने संयुक्त रूप से एक कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें विभाजन पर आधारित एक वृत्तचित्र प्रदर्शित किया गया। इस दौरान उपस्थित समूह को संबोधित करते हुए राज्यपाल माथुर ने ‘वंदे मातरम्’ को ऐसा गीत बताया जो राष्ट्र की चेतना और देशभक्ति की भावना को अभिव्यक्त करता है। उन्होंने कहा, ‘‘आज का दिन हमें अपने देश की अखंडता और एकता की याद दिलाता है।
जहां ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष हमें उस मंत्र की ऊर्जा की याद दिलाते हैं, जिसने स्वतंत्रता संग्राम को प्रेरित किया, वहीं ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ हमें इतिहास के एक दर्दनाक अध्याय की याद दिलाता है और शांति एवं सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा देता है।’’
माथुर ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल स्मरण का अवसर नहीं है, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की विरासत, देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता को याद करने का अवसर भी है, जिसने देश को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। माथुर ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज भारत के स्वतंत्रता संग्राम का अभिन्न हिस्सा रहा है और यह गौरव के साथ-साथ जिम्मेदारी का भी प्रतीक है। सिक्किम को राष्ट्रीय एकता का उदाहरण बताते हुए माथुर ने मंत्रियों और विधायकों से अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को और मजबूत करने का आग्रह किया।
राज्यपाल ने कहा कि और संस्कृति की विविधता कभी भी देश की साझा पहचान को कमजोर नहीं कर सकती। मुख्यमंत्री तमांग ने इस अभियान को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘‘दूरदर्शी पहल’’ बताया। रैली के बाद तमांग ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित एक प्रदर्शनी का अवलोकन किया।


