जोधपुर के जिला निर्वाचन अधिकारी ने उदयपुर के मौजूदा बीजेपी सांसद मन्नालाल रावत को अफसर समझकर नोटिस जारी कर दिया। रावत को गुरुवार को भेजे गए नोटिस में अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की जानकारी ईएमएस पोर्टल पर तुरंत अपडेट करने के सख्त आदेश दिए गए हैं। जिला निर्वाचन कार्यालय ने नोटिस में चेतावनी दी कि चुनाव ड्यूटी में लापरवाही बरतना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 134 के तहत अपराध है। ऐसा नहीं करने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि सांसद मन्नालाल रावत को नौकरी छोड़े ढाई साल से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन चुनाव शाखा के रिकॉर्ड में वे आज भी सरकारी अधिकारी ही दर्ज हैं। रावत ने 1 मार्च 2024 को सरकारी सेवा से वीआरएस ले लिया था। फिर वे बीजेपी के टिकट पर उदयपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद बन गए। डिजिटल इंडिया के इस दौर में इलेक्शन कमीशन के सिस्टम की यह बड़ी प्रशासनिक चूक सामने आई है। 2023 में जोधपुर में परिवहन विभाग में थे तैनात डॉ. मन्नालाल रावत अक्टूबर 2023 में जोधपुर में परिवहन विभाग में संयुक्त यातायात कमिश्नर पद पर तैनात थे। इसके बाद उनका प्रमोशन एडिशनल कमिश्नर पद पर हुआ और ट्रांसफर जयपुर कर दिया गया था। इसके बाद 1 मार्च 2024 को रावत ने सरकारी सेवा से वीआरएस ले लिया था। फिर वे बीजेपी के टिकट पर उदयपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद हैं। निकाय चुनाव की तैयारियों को देखते हुए दिया नोटिस निकाय चुनाव 2026 की तैयारियों के बीच जोधपुर कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी इस नोटिस ने प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है। जो नेता दो साल से देश की संसद में जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। जोधपुर का चुनावी अमला उन्हें आज भी अपना पुराना अधिकारी मानकर कानूनी कार्रवाई की धमकी दे रहा है। 14 अगस्त तक जानकारी अपडेट करने की डेडलाइन दी कलेक्टर के हस्ताक्षर से जारी इस नोटिस में सांसद मन्नालाल रावत को 14 अगस्त को दोपहर 3 बजे तक कर्मचारियों की जानकारी पोर्टल पर लॉक कर हार्डकॉपी जमा कराने की डेडलाइन दी गई है। लॉटरी प्रक्रिया और निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच निर्वाचन विभाग की इस लापरवाही ने सरकारी तंत्र और उसके पुराने डाटा मैनेजमेंट पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सांसद बोले- कर्मचारी ने फोन कर दी सूचना सांसद मन्नालाल रावत ने बताया- पहले मुझे सुबह जोधपुर की निर्वाचन शाखा के एक कर्मचारी ने फोन करके नोटिस की सूचना दी। इसके बाद गुरुवार शाम 5:34 बजे मुझे वॉट्सएप पर नोटिस की कॉपी भेज दी गई। सांसद रावत ने कहा- डिजिटल दौर में भी निर्वाचन विभाग का डाटा 3 साल पुराना चल रहा है। इससे पता चलता है कि सिस्टम में बैठे अधिकारी आम आदमी और कर्मचारियों का डाटा कैसे मेंटेन कर रहे होंगे। रावत ने कहा- मैं जल्द ही निर्वाचन विभाग और कलेक्टर को पत्र लिखकर इस बड़ी चूक से अवगत कराऊंगा।


