सुपौल जिले में कोसी नदी का जलस्तर घटने के बावजूद तटवर्ती इलाकों में कटाव की रफ्तार तेज हो गई है। नेपाल में हुई भारी बारिश के कारण कोसी बराज से 1.77 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया था, जिससे तटबंध के भीतर बसे कई गांवों में अभी भी बाढ़ का पानी फैला हुआ है। जलस्तर में कमी आने से नदी का बहाव किनारों पर अधिक दबाव बना रहा है, जिससे भूमि कटाव की स्थिति गंभीर हो रही है। संभावित खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। जिलाधिकारी सावन कुमार के निर्देश पर संबंधित अंचलों के अंचलाधिकारी और जल संसाधन विभाग के अभियंता सुरक्षा तटबंधों, स्परों तथा संवेदनशील स्थलों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश अधिकारियों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। कटाव प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष नजर रखी जा रही है ताकि समय रहते आवश्यक सुरक्षात्मक कदम उठाए जा सकें। कोसी बराज से शुक्रवार शाम 8 बजे की रिपोर्ट के अनुसार, डाउन स्ट्रीम में 1,73,855 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया। पूर्वी कोसी मुख्य नहर (ईकेएमसी) में पानी का प्रवाह शून्य रहा, जबकि पश्चिमी कोसी मुख्य नहर (डब्ल्यूकेएमसी) में 3,600 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जलप्रवाह 1,19,250 क्यूसेक दर्ज इस प्रकार कुल डिस्चार्ज 1,77,455 क्यूसेक रिकॉर्ड किया गया। इसी समय बराहक्षेत्र (बीकेएस) में जलप्रवाह 1,19,250 क्यूसेक दर्ज किया गया। जलस्तर में गिरावट से बाढ़ का दबाव धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन कटाव की समस्या अब लोगों की सबसे बड़ी चिंता बन गई है। निर्मली, मरौना, सरायगढ़-भपटियाही, किशनपुर और सुपौल सदर प्रखंड के तटबंध के भीतर रहने वाले ग्रामीण अपनी जमीन और घरों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत स्थानीय प्रशासन को देने की अपील की है। जल संसाधन विभाग की टीम स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। सुपौल जिले में कोसी नदी का जलस्तर घटने के बावजूद तटवर्ती इलाकों में कटाव की रफ्तार तेज हो गई है। नेपाल में हुई भारी बारिश के कारण कोसी बराज से 1.77 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया था, जिससे तटबंध के भीतर बसे कई गांवों में अभी भी बाढ़ का पानी फैला हुआ है। जलस्तर में कमी आने से नदी का बहाव किनारों पर अधिक दबाव बना रहा है, जिससे भूमि कटाव की स्थिति गंभीर हो रही है। संभावित खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। जिलाधिकारी सावन कुमार के निर्देश पर संबंधित अंचलों के अंचलाधिकारी और जल संसाधन विभाग के अभियंता सुरक्षा तटबंधों, स्परों तथा संवेदनशील स्थलों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश अधिकारियों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। कटाव प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष नजर रखी जा रही है ताकि समय रहते आवश्यक सुरक्षात्मक कदम उठाए जा सकें। कोसी बराज से शुक्रवार शाम 8 बजे की रिपोर्ट के अनुसार, डाउन स्ट्रीम में 1,73,855 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया। पूर्वी कोसी मुख्य नहर (ईकेएमसी) में पानी का प्रवाह शून्य रहा, जबकि पश्चिमी कोसी मुख्य नहर (डब्ल्यूकेएमसी) में 3,600 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जलप्रवाह 1,19,250 क्यूसेक दर्ज इस प्रकार कुल डिस्चार्ज 1,77,455 क्यूसेक रिकॉर्ड किया गया। इसी समय बराहक्षेत्र (बीकेएस) में जलप्रवाह 1,19,250 क्यूसेक दर्ज किया गया। जलस्तर में गिरावट से बाढ़ का दबाव धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन कटाव की समस्या अब लोगों की सबसे बड़ी चिंता बन गई है। निर्मली, मरौना, सरायगढ़-भपटियाही, किशनपुर और सुपौल सदर प्रखंड के तटबंध के भीतर रहने वाले ग्रामीण अपनी जमीन और घरों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत स्थानीय प्रशासन को देने की अपील की है। जल संसाधन विभाग की टीम स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

