नालंदा में 1.25 करोड़ की डकैती का मास्टरमाइंड निकला हत्यारा:20 साल जेल भी रहा चुका है, लूट की घटना को अंजाम देकर निकला था बाबाधाम

नालंदा में 1.25 करोड़ की डकैती का मास्टरमाइंड निकला हत्यारा:20 साल जेल भी रहा चुका है, लूट की घटना को अंजाम देकर निकला था बाबाधाम

नालंदा के दीपनगर में बीज कारोबारी के घर 3 अगस्त (सोमवार) की रात 1.25 करोड़ की डकैती का मास्टरमाइंड हत्यारा निकला। मास्टरमाइंड ने कारोबारी के पूर्व ड्राइवर की मदद से वारदात को अंजाम दिया था। नालंदा पुलिस ने बुधवार को मास्टरमाइंड अजीत सिंह को अरेस्ट किया है। पुलिस ने बताया कि अजीत सिंह एक हत्या के मामले में 20 साल की सजा काट चुका है। उसने 15 साथियों के साथ डकैती की घटना को अंजाम दिया और अगले दिन देवघर में जलाभिषेक के लिए निकल गया था। देवघर में पूजा करने के बाद जामताड़ा निकल गया। पुलिस की टीम ने जामताड़ा से अजीत समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। गिरफ्तार आरोपियों के पास से 16.43 लाख कैश, 450 ग्राम सोने के आभूषण, 7 किलो चांदी के साथ-साथ डायमंड और प्लैटिनम के कीमती जेवर बरामद हुए हैं। मास्टरमाइंड की कहानी क्या है? मास्टरमाइंड ने लाइनर के साथ मिलकर कैसे वारदात को अंजाम दिया? कारोबारी के पूर्व ड्राइवर के साथ अजीत कैसे संपर्क में आया? पढ़िए इनसाइड स्टोरी। पहले डकैती की वारदात से जुड़ी दो तस्वीरे देखिए अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए पूरा मामला चार दिन पहले देवीसराय मोहल्ले में बीज कारोबारी राजीव रंजन के घर 15 अपराधियों ने परिजनों को बंधक बनाकर करीब एक घंटे तक डकैती की वारदात को अंजाम दिया था। अपराधी घर से करीब 1.25 करोड़ रुपए की संपत्ति लूटकर फरार हो गए थे। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया, जिसमें आरोपी एक-एक कर वारदात को अंजाम देने के बाद भागते दिखाई दे रहे थे। इस डकैती का मास्टरमाइंड श्याम नगर गांव का रहने वाला कुख्यात अपराधी अजीत सिंह बताया गया था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, अजीत सिंह का आपराधिक इतिहास लंबा रहा है। वह हत्या के एक मामले में 20 साल की सजा काटने के बाद फरवरी 2025 में जेल से रिहा हुआ था। अपनी सजा के दौरान अजीत सिंह कई साल बिहारशरीफ मंडल कारा में रहा। इसके बाद सुरक्षा कारणों और उसके बढ़ते रसूख को देखते हुए उसे भागलपुर केंद्रीय कारा स्थानांतरित कर दिया गया। पुलिस के अनुसार, जेल में रहते हुए अजीत सिंह ने अपने आपराधिक नेटवर्क की नींव रखी थी। जांच में सामने आया है कि डकैती कांड में शामिल अधिकांश बदमाशों की मुलाकात अजीत सिंह से जेल में हुई थी। समय के साथ उसके संपर्क में आए अपराधी एक-एक कर जेल से रिहा होते गए। करीब डेढ़ साल पहले खुद जेल से बाहर आने के बाद अजीत सिंह ने इन सभी से दोबारा संपर्क किया और पिछले चार से पांच महीनों में उन्हें एकजुट कर लिया। इसके बाद अजीत सिंह ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर एक गैंग बनाया, जिसका निशाना बड़े कारोबारी और संपन्न लोग थे। 2019 में बीज कारोबारी के पूर्व के ड्राइवर के संपर्क में आया था अजीत बीज कारोबारी के पूर्व ड्राइवर के संपर्क में अजीत सिंह आया था। गिरफ्तार किए गए 5 अपराधियों में नवादा जिले के वारसलीगंज स्थित बागी-बगडीहा गांव के रहने वाले महेंद्र महतो का बेटा बबलू प्रसाद भी शामिल है, जो कभी बीज कारोबारी राजीव रंजन का ड्राइवर हुआ करता था। साल 2019 में जब राजीव रंजन नवादा में अपने ससुराल के बगल में एक किराए के मकान में रहा करता था, तब बबलू उनकी कार चलाता था। बबलू हर दिन नवादा से कारोबारी को लेकर देवीसराय स्थित उनकी दुकान पर आता था और अपनी गाड़ी मंगला स्थान में पार्क करता था। इसी पार्किंग स्थल पर उसकी मुलाकात अजीत सिंह के दाहिने हाथ माने जाने वाले राजेश झा उर्फ लंगड़ा से हुई। इसके बाद अजीत के संपर्क में आया था। साल 2019 में भी अजीत के राइटहैंड ने कारोबारी के घर की थी लूट साल 2019 में ही इन अपराधियों ने बीज कारोबारी के नवादा वाले घर पर डकैती की पहली घटना को अंजाम दिया था। उस समय कारोबारी दिल्ली में थे और घर पर केवल उनकी पत्नी मौजूद थीं। किसी अज्ञात कारण या भयवश उस समय इस मामले की पुलिस में कोई लिखित शिकायत या केस दर्ज नहीं कराया गया। इसी खामोशी ने अपराधियों के हौसले बुलंद कर दिए। नवादा छोड़ने के बाद जब कारोबारी अपने पैतृक घर देवीसराय आ गए, तब से ड्राइवर बबलू को उनके घर के चप्पे-चप्पे और पैसे रखने की जगह की पूरी जानकारी थी। छत के रास्ते घर में घुसे थे डकैत करीब 15 से 20 दिन पहले कारोबारी का पूर्व ड्राइवर बबलू अपने एक रिश्तेदार से मिलने जोरारपुर गया था। वहीं उसकी मुलाकात एक बार फिर राजेश झा उर्फ लंगड़ा से हुई। बातचीत के दौरान बबलू ने उसे अहम जानकारी दी कि जुलाई के अंतिम सप्ताह और अगस्त में बीज का कारोबार चरम पर होता है, इसलिए इस दौरान कारोबारी के घर में भारी मात्रा में नकदी रहती है। यह सूचना मिलते ही लंगड़ा ने अपने सरगना और गैंग के मास्टरमाइंड अजीत सिंह को इसकी जानकारी दी। इसके बाद अजीत सिंह ने डकैती की साजिश रची। दीपनगर थानाध्यक्ष सुमन कुमार के नेतृत्व में हुई पूछताछ में खुलासा हुआ कि डकैती की योजना को अंतिम रूप देने के लिए सबसे पहले पांच प्रमुख बदमाश अजीत सिंह की अगुवाई में कारगिल बस स्टैंड पर जुटे थे। कारगिल बस स्टैंड पर हुई बैठक के बाद इन्हीं पांचों ने बीज कारोबारी के घर की रेकी की। पूर्व ड्राइवर बबलू ने अपराधियों को बताया था कि घर की छत पर कोई दरवाजा नहीं है। ऐसे में दीवार फांदकर सीधे छत पर पहुंचना और वहां से घर के अंदर दाखिल होना सबसे आसान रास्ता होगा। पुलिस गश्ती ने टाली थी 31 जुलाई की वारदात, तीन अगस्त को दिया घटना को अंजाम सूत्र बताते हैं कि डकैतों ने इस वारदात को अंजाम देने के लिए सबसे पहले 31 जुलाई की रात का समय तय किया था। योजना के अनुसार, सभी अपराधी हथियारों और नकाब के साथ तैयार थे। लेकिन उस रात दीपनगर पुलिस की गश्ती टीम और घरवालों की सजगता के कारण कामयाब नहीं हो सके। पुलिस के सायरन और गश्ती गाड़ी को देखकर अपराधी भटक गए और उन्हें वापस लौटना पड़ा। हालांकि, वे अपने इरादे से पीछे नहीं हटे और मात्र तीन दिन बाद, यानी 3 अगस्त की रात को उन्होंने दोबारा धावा बोला और इस बार वे छत के रास्ते घर में घुसने में सफल रहे, जिसके बाद उन्होंने हथियारों के बल पर सवा करोड़ रुपए की संपत्ति और नकदी लूट ली। लूट के माल का बंटवारा और देवघर भागने की थी पूरी तैयारी अपराधियों ने वारदात से पहले ही तय कर लिया था कि पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए डकैती के तुरंत बाद नालंदा छोड़ देना है और कोई भी सदस्य शहर में नहीं रुकेगा। उनकी शुरुआती योजना लूट के बाद सीधे देवघर भागने की थी, ताकि उन पर किसी को शक न हो। डकैती को अंजाम देने के बाद लूट की रकम का आपस में बंटवारा भी किया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मास्टरमाइंड अजीत सिंह ने लूट का बड़ा हिस्सा अपने पास रखा, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों को उनकी भूमिका के अनुसार साढ़े तीन-तीन लाख रुपए दिए। गिरोह का सदस्य राजेश झा उर्फ लंगड़ा नौकरी दिलाने के नाम पर 10-15 लोगों से कथित तौर पर ठगी कर चुका था और उस पर पैसे लौटाने का दबाव था। वहीं, गिरोह के एक अन्य सदस्य सोनू ने हाल ही में एक नई नेक्सॉन कार खरीदी थी। उसकी किस्तें चुकाने के लिए पैसों की जरूरत थी। गिरफ्तार अपराधियों में ये लोग शामिल सवा करोड़ के डकैती कांड में दीपनगर थाने की पुलिस ने गुप्त सूचनाओं के आधार पर छापेमारी की और अजीत सिंह समेत 5 बदमाशों को जामताड़ा से गिरफ्तार किया। इसमें मास्टरमाइंड अजीत सिंह, संजीव सिंह, बिट्टू कुमार और आदित्य कुमार शामिल हैं। ये चारों अपराधी नालंदा जिले के दीपनगर थाना क्षेत्र के श्यामनगर गांव के ही रहने वाले हैं। इनके अलावा, कारोबारी के घर की पूरी मुखबिरी करने वाला पांचवां आरोपी पूर्व ड्राइवर बबलू प्रसाद है, जो नवादा जिले के वारसलीगंज थाना क्षेत्र के बागी-बगडीहा गांव का रहने वाला है। नालंदा के दीपनगर में बीज कारोबारी के घर 3 अगस्त (सोमवार) की रात 1.25 करोड़ की डकैती का मास्टरमाइंड हत्यारा निकला। मास्टरमाइंड ने कारोबारी के पूर्व ड्राइवर की मदद से वारदात को अंजाम दिया था। नालंदा पुलिस ने बुधवार को मास्टरमाइंड अजीत सिंह को अरेस्ट किया है। पुलिस ने बताया कि अजीत सिंह एक हत्या के मामले में 20 साल की सजा काट चुका है। उसने 15 साथियों के साथ डकैती की घटना को अंजाम दिया और अगले दिन देवघर में जलाभिषेक के लिए निकल गया था। देवघर में पूजा करने के बाद जामताड़ा निकल गया। पुलिस की टीम ने जामताड़ा से अजीत समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। गिरफ्तार आरोपियों के पास से 16.43 लाख कैश, 450 ग्राम सोने के आभूषण, 7 किलो चांदी के साथ-साथ डायमंड और प्लैटिनम के कीमती जेवर बरामद हुए हैं। मास्टरमाइंड की कहानी क्या है? मास्टरमाइंड ने लाइनर के साथ मिलकर कैसे वारदात को अंजाम दिया? कारोबारी के पूर्व ड्राइवर के साथ अजीत कैसे संपर्क में आया? पढ़िए इनसाइड स्टोरी। पहले डकैती की वारदात से जुड़ी दो तस्वीरे देखिए अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए पूरा मामला चार दिन पहले देवीसराय मोहल्ले में बीज कारोबारी राजीव रंजन के घर 15 अपराधियों ने परिजनों को बंधक बनाकर करीब एक घंटे तक डकैती की वारदात को अंजाम दिया था। अपराधी घर से करीब 1.25 करोड़ रुपए की संपत्ति लूटकर फरार हो गए थे। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया, जिसमें आरोपी एक-एक कर वारदात को अंजाम देने के बाद भागते दिखाई दे रहे थे। इस डकैती का मास्टरमाइंड श्याम नगर गांव का रहने वाला कुख्यात अपराधी अजीत सिंह बताया गया था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, अजीत सिंह का आपराधिक इतिहास लंबा रहा है। वह हत्या के एक मामले में 20 साल की सजा काटने के बाद फरवरी 2025 में जेल से रिहा हुआ था। अपनी सजा के दौरान अजीत सिंह कई साल बिहारशरीफ मंडल कारा में रहा। इसके बाद सुरक्षा कारणों और उसके बढ़ते रसूख को देखते हुए उसे भागलपुर केंद्रीय कारा स्थानांतरित कर दिया गया। पुलिस के अनुसार, जेल में रहते हुए अजीत सिंह ने अपने आपराधिक नेटवर्क की नींव रखी थी। जांच में सामने आया है कि डकैती कांड में शामिल अधिकांश बदमाशों की मुलाकात अजीत सिंह से जेल में हुई थी। समय के साथ उसके संपर्क में आए अपराधी एक-एक कर जेल से रिहा होते गए। करीब डेढ़ साल पहले खुद जेल से बाहर आने के बाद अजीत सिंह ने इन सभी से दोबारा संपर्क किया और पिछले चार से पांच महीनों में उन्हें एकजुट कर लिया। इसके बाद अजीत सिंह ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर एक गैंग बनाया, जिसका निशाना बड़े कारोबारी और संपन्न लोग थे। 2019 में बीज कारोबारी के पूर्व के ड्राइवर के संपर्क में आया था अजीत बीज कारोबारी के पूर्व ड्राइवर के संपर्क में अजीत सिंह आया था। गिरफ्तार किए गए 5 अपराधियों में नवादा जिले के वारसलीगंज स्थित बागी-बगडीहा गांव के रहने वाले महेंद्र महतो का बेटा बबलू प्रसाद भी शामिल है, जो कभी बीज कारोबारी राजीव रंजन का ड्राइवर हुआ करता था। साल 2019 में जब राजीव रंजन नवादा में अपने ससुराल के बगल में एक किराए के मकान में रहा करता था, तब बबलू उनकी कार चलाता था। बबलू हर दिन नवादा से कारोबारी को लेकर देवीसराय स्थित उनकी दुकान पर आता था और अपनी गाड़ी मंगला स्थान में पार्क करता था। इसी पार्किंग स्थल पर उसकी मुलाकात अजीत सिंह के दाहिने हाथ माने जाने वाले राजेश झा उर्फ लंगड़ा से हुई। इसके बाद अजीत के संपर्क में आया था। साल 2019 में भी अजीत के राइटहैंड ने कारोबारी के घर की थी लूट साल 2019 में ही इन अपराधियों ने बीज कारोबारी के नवादा वाले घर पर डकैती की पहली घटना को अंजाम दिया था। उस समय कारोबारी दिल्ली में थे और घर पर केवल उनकी पत्नी मौजूद थीं। किसी अज्ञात कारण या भयवश उस समय इस मामले की पुलिस में कोई लिखित शिकायत या केस दर्ज नहीं कराया गया। इसी खामोशी ने अपराधियों के हौसले बुलंद कर दिए। नवादा छोड़ने के बाद जब कारोबारी अपने पैतृक घर देवीसराय आ गए, तब से ड्राइवर बबलू को उनके घर के चप्पे-चप्पे और पैसे रखने की जगह की पूरी जानकारी थी। छत के रास्ते घर में घुसे थे डकैत करीब 15 से 20 दिन पहले कारोबारी का पूर्व ड्राइवर बबलू अपने एक रिश्तेदार से मिलने जोरारपुर गया था। वहीं उसकी मुलाकात एक बार फिर राजेश झा उर्फ लंगड़ा से हुई। बातचीत के दौरान बबलू ने उसे अहम जानकारी दी कि जुलाई के अंतिम सप्ताह और अगस्त में बीज का कारोबार चरम पर होता है, इसलिए इस दौरान कारोबारी के घर में भारी मात्रा में नकदी रहती है। यह सूचना मिलते ही लंगड़ा ने अपने सरगना और गैंग के मास्टरमाइंड अजीत सिंह को इसकी जानकारी दी। इसके बाद अजीत सिंह ने डकैती की साजिश रची। दीपनगर थानाध्यक्ष सुमन कुमार के नेतृत्व में हुई पूछताछ में खुलासा हुआ कि डकैती की योजना को अंतिम रूप देने के लिए सबसे पहले पांच प्रमुख बदमाश अजीत सिंह की अगुवाई में कारगिल बस स्टैंड पर जुटे थे। कारगिल बस स्टैंड पर हुई बैठक के बाद इन्हीं पांचों ने बीज कारोबारी के घर की रेकी की। पूर्व ड्राइवर बबलू ने अपराधियों को बताया था कि घर की छत पर कोई दरवाजा नहीं है। ऐसे में दीवार फांदकर सीधे छत पर पहुंचना और वहां से घर के अंदर दाखिल होना सबसे आसान रास्ता होगा। पुलिस गश्ती ने टाली थी 31 जुलाई की वारदात, तीन अगस्त को दिया घटना को अंजाम सूत्र बताते हैं कि डकैतों ने इस वारदात को अंजाम देने के लिए सबसे पहले 31 जुलाई की रात का समय तय किया था। योजना के अनुसार, सभी अपराधी हथियारों और नकाब के साथ तैयार थे। लेकिन उस रात दीपनगर पुलिस की गश्ती टीम और घरवालों की सजगता के कारण कामयाब नहीं हो सके। पुलिस के सायरन और गश्ती गाड़ी को देखकर अपराधी भटक गए और उन्हें वापस लौटना पड़ा। हालांकि, वे अपने इरादे से पीछे नहीं हटे और मात्र तीन दिन बाद, यानी 3 अगस्त की रात को उन्होंने दोबारा धावा बोला और इस बार वे छत के रास्ते घर में घुसने में सफल रहे, जिसके बाद उन्होंने हथियारों के बल पर सवा करोड़ रुपए की संपत्ति और नकदी लूट ली। लूट के माल का बंटवारा और देवघर भागने की थी पूरी तैयारी अपराधियों ने वारदात से पहले ही तय कर लिया था कि पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए डकैती के तुरंत बाद नालंदा छोड़ देना है और कोई भी सदस्य शहर में नहीं रुकेगा। उनकी शुरुआती योजना लूट के बाद सीधे देवघर भागने की थी, ताकि उन पर किसी को शक न हो। डकैती को अंजाम देने के बाद लूट की रकम का आपस में बंटवारा भी किया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मास्टरमाइंड अजीत सिंह ने लूट का बड़ा हिस्सा अपने पास रखा, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों को उनकी भूमिका के अनुसार साढ़े तीन-तीन लाख रुपए दिए। गिरोह का सदस्य राजेश झा उर्फ लंगड़ा नौकरी दिलाने के नाम पर 10-15 लोगों से कथित तौर पर ठगी कर चुका था और उस पर पैसे लौटाने का दबाव था। वहीं, गिरोह के एक अन्य सदस्य सोनू ने हाल ही में एक नई नेक्सॉन कार खरीदी थी। उसकी किस्तें चुकाने के लिए पैसों की जरूरत थी। गिरफ्तार अपराधियों में ये लोग शामिल सवा करोड़ के डकैती कांड में दीपनगर थाने की पुलिस ने गुप्त सूचनाओं के आधार पर छापेमारी की और अजीत सिंह समेत 5 बदमाशों को जामताड़ा से गिरफ्तार किया। इसमें मास्टरमाइंड अजीत सिंह, संजीव सिंह, बिट्टू कुमार और आदित्य कुमार शामिल हैं। ये चारों अपराधी नालंदा जिले के दीपनगर थाना क्षेत्र के श्यामनगर गांव के ही रहने वाले हैं। इनके अलावा, कारोबारी के घर की पूरी मुखबिरी करने वाला पांचवां आरोपी पूर्व ड्राइवर बबलू प्रसाद है, जो नवादा जिले के वारसलीगंज थाना क्षेत्र के बागी-बगडीहा गांव का रहने वाला है।  

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