औरंगाबाद में राष्ट्रीय राजमार्ग-139 पर बटाने नदी स्थित दोमुहान पुल की क्षतिग्रस्त स्थिति के बीच भारी गाड़ी के परिचालन पर रोक लगी है। इसके बाद अब छोटी गाड़ी का भी वन-वे परिचालन शुरू किए जाने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मंगलवार से लागू इस व्यवस्था के कारण पुल के दोनों छोर पर गाड़ी की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को करीब 4 घंटे तक जाम में फंसे रहना पड़ा। बुधवार को भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी और सुबह से शाम तक पुल के आसपास जाम का नजारा देखने को मिला। पुल की सुरक्षा को लेकर उठाए गए इस कदम ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल पार करने में दो से चार घंटे तक का समय लग रहा है। कई यात्रियों को मजबूर होकर वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जबकि कई गाड़ी ड्राइवर बीच रास्ते से ही वापस लौट गए। पुल पर बढ़ा दबाव, यात्रियों को झेलनी पड़ी भारी परेशानी बता दें कि दोमुहान पुल में दरार और संरचनात्मक क्षति की आशंका को देखते हुए करीब पंद्रह दिन पहले भारी गाड़ी के आवागमन पर रोक लगा दी गई थी। इसके बावजूद कुछ चालक रात के समय अवरोध हटाकर पुल पार कर रहे थे। इसी को रोकने के लिए पुल के एक हिस्से को और अधिक अवरुद्ध कर छोटे गाड़ी का परिचालन भी एक लेन से कर दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि पुल के दोनों ओर कार, ऑटो, बाइक और अन्य छोटी गाड़ी की लंबी कतार लग गई। बुधवार को झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से आने-जाने वाले यात्रियों को भीषण गर्मी में घंटों इंतजार करना पड़ा। धनबाद से डाल्टेनगंज जा रहे यात्री विवेक सिन्हा ने बताया कि उन्हें पुल की स्थिति की कोई जानकारी नहीं थी और परिवार के साथ जाम में फंसने के कारण काफी परेशानी उठानी पड़ी। वहीं जाम में फंसे जदयू जिला प्रवक्ता रवि सिंह राजपूत ने बताया कि अंबा जाने के दौरान वे भी लंबे समय तक जाम में फंसे रहे और अंततः वापस लौटना पड़ा। लोगों ने उठाए सवाल, प्रशासन से मांगी व्यवस्था स्थानीय नागरिकों और गाड़ी ड्राइवर का कहना है कि वन-वे व्यवस्था के कारण पुल पर गाड़ी की लंबी कतार लग रही है, जिससे पहले से क्षतिग्रस्त पुल पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। लोगों ने आशंका जताई कि यदि यही स्थिति बनी रही तो पुल को और नुकसान पहुंच सकता है। किसी बड़ी दुर्घटना की संभावना भी बढ़ सकती है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि छोटे गाड़ी का परिचालन पहले की तरह दोनों ओर से नियंत्रित तरीके से शुरू कराया जाए, ताकि जाम की समस्या खत्म हो सके। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग-19 सहित अन्य प्रमुख मार्गों पर सूचना पट और संकेतक लगाने की भी मांग की गई है, ताकि बाहर से आने वाले गाड़ी ड्राइवर समय रहते वैकल्पिक मार्ग चुन सकें और अनावश्यक जाम से बच सकें। संवेदक की कार्यशैली पर विभाग नाराज, जल्द बहाल होगी सामान्य व्यवस्था एनएच-139 के कार्यपालक अभियंता तुलसी प्रसाद ने बताया कि विभाग ने केवल भारी गाड़ी को रोकने के लिए पुल के दोनों ओर अवरोध लगाने का निर्देश दिया था। सूचना मिली थी कि कुछ लोग रात में पत्थर हटाकर बड़े गाड़ी का परिचालन करा रहे थे, इसलिए मेंटेनेंस काम कर रहे संवेदक को व्यवस्था मजबूत करने के लिए भेजा गया था। लेकिन संवेदक ने अतिरिक्त सामग्री गिराकर छोटे गाड़ी का परिचालन भी वन-वे कर दिया, जो विभागीय निर्देशों के अनुरूप नहीं था। उन्होंने इसे अनुचित कदम बताते हुए कहा कि संवेदक को तत्काल अतिरिक्त मटेरियल हटाने और छोटे गाड़ी के लिए दोनों दिशाओं से आवागमन बहाल करने का निर्देश दे दिया गया है। कार्यपालक अभियंता ने बताया कि विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और जल्द ही सामान्य परिचालन बहाल किया जाएगा। वहीं प्रशासन की ओर से पुल के समानांतर लगभग 4.56 करोड़ रुपये की लागत से डायवर्जन निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है, जिसके बाद क्षेत्र में यातायात व्यवस्था सुगम होने की उम्मीद है। औरंगाबाद में राष्ट्रीय राजमार्ग-139 पर बटाने नदी स्थित दोमुहान पुल की क्षतिग्रस्त स्थिति के बीच भारी गाड़ी के परिचालन पर रोक लगी है। इसके बाद अब छोटी गाड़ी का भी वन-वे परिचालन शुरू किए जाने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मंगलवार से लागू इस व्यवस्था के कारण पुल के दोनों छोर पर गाड़ी की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को करीब 4 घंटे तक जाम में फंसे रहना पड़ा। बुधवार को भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी और सुबह से शाम तक पुल के आसपास जाम का नजारा देखने को मिला। पुल की सुरक्षा को लेकर उठाए गए इस कदम ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल पार करने में दो से चार घंटे तक का समय लग रहा है। कई यात्रियों को मजबूर होकर वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जबकि कई गाड़ी ड्राइवर बीच रास्ते से ही वापस लौट गए। पुल पर बढ़ा दबाव, यात्रियों को झेलनी पड़ी भारी परेशानी बता दें कि दोमुहान पुल में दरार और संरचनात्मक क्षति की आशंका को देखते हुए करीब पंद्रह दिन पहले भारी गाड़ी के आवागमन पर रोक लगा दी गई थी। इसके बावजूद कुछ चालक रात के समय अवरोध हटाकर पुल पार कर रहे थे। इसी को रोकने के लिए पुल के एक हिस्से को और अधिक अवरुद्ध कर छोटे गाड़ी का परिचालन भी एक लेन से कर दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि पुल के दोनों ओर कार, ऑटो, बाइक और अन्य छोटी गाड़ी की लंबी कतार लग गई। बुधवार को झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से आने-जाने वाले यात्रियों को भीषण गर्मी में घंटों इंतजार करना पड़ा। धनबाद से डाल्टेनगंज जा रहे यात्री विवेक सिन्हा ने बताया कि उन्हें पुल की स्थिति की कोई जानकारी नहीं थी और परिवार के साथ जाम में फंसने के कारण काफी परेशानी उठानी पड़ी। वहीं जाम में फंसे जदयू जिला प्रवक्ता रवि सिंह राजपूत ने बताया कि अंबा जाने के दौरान वे भी लंबे समय तक जाम में फंसे रहे और अंततः वापस लौटना पड़ा। लोगों ने उठाए सवाल, प्रशासन से मांगी व्यवस्था स्थानीय नागरिकों और गाड़ी ड्राइवर का कहना है कि वन-वे व्यवस्था के कारण पुल पर गाड़ी की लंबी कतार लग रही है, जिससे पहले से क्षतिग्रस्त पुल पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। लोगों ने आशंका जताई कि यदि यही स्थिति बनी रही तो पुल को और नुकसान पहुंच सकता है। किसी बड़ी दुर्घटना की संभावना भी बढ़ सकती है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि छोटे गाड़ी का परिचालन पहले की तरह दोनों ओर से नियंत्रित तरीके से शुरू कराया जाए, ताकि जाम की समस्या खत्म हो सके। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग-19 सहित अन्य प्रमुख मार्गों पर सूचना पट और संकेतक लगाने की भी मांग की गई है, ताकि बाहर से आने वाले गाड़ी ड्राइवर समय रहते वैकल्पिक मार्ग चुन सकें और अनावश्यक जाम से बच सकें। संवेदक की कार्यशैली पर विभाग नाराज, जल्द बहाल होगी सामान्य व्यवस्था एनएच-139 के कार्यपालक अभियंता तुलसी प्रसाद ने बताया कि विभाग ने केवल भारी गाड़ी को रोकने के लिए पुल के दोनों ओर अवरोध लगाने का निर्देश दिया था। सूचना मिली थी कि कुछ लोग रात में पत्थर हटाकर बड़े गाड़ी का परिचालन करा रहे थे, इसलिए मेंटेनेंस काम कर रहे संवेदक को व्यवस्था मजबूत करने के लिए भेजा गया था। लेकिन संवेदक ने अतिरिक्त सामग्री गिराकर छोटे गाड़ी का परिचालन भी वन-वे कर दिया, जो विभागीय निर्देशों के अनुरूप नहीं था। उन्होंने इसे अनुचित कदम बताते हुए कहा कि संवेदक को तत्काल अतिरिक्त मटेरियल हटाने और छोटे गाड़ी के लिए दोनों दिशाओं से आवागमन बहाल करने का निर्देश दे दिया गया है। कार्यपालक अभियंता ने बताया कि विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और जल्द ही सामान्य परिचालन बहाल किया जाएगा। वहीं प्रशासन की ओर से पुल के समानांतर लगभग 4.56 करोड़ रुपये की लागत से डायवर्जन निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है, जिसके बाद क्षेत्र में यातायात व्यवस्था सुगम होने की उम्मीद है।


