भरतपुर जिला क्रिकेट संघ सस्पेंड, सचिव पर स्थानीय खिलाड़ियों से पैसे मांगने का आरोप

भरतपुर। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) की एडहॉक कमेटी ने अनियमितताओं के आरोपों पर भरतपुर जिला क्रिकेट संघ निलंबित कर दिया गया। सचिव पर आरोप लगा था कि वे बाहरी खिलाड़ी खिला रहे और स्थानीय खिलाड़ियों से रुपए मांग रहे थे। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) की एडहॉक कमेटी की मंगलवार को आरसीए एकेडमी स्थित कार्यालय पर बैठक हुई। बैठक में भरतपुर जिला क्रिकेट संघ को निलंबित कर दिया।

बीडीसीए (भरतपुर जिला क्रिकेट संघ) को निलंबित करते हुए, कंवीनर डॉ. मोहित यादव ने कहा कि हमें भरतपुर जिला क्रिकेट संघ के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थी, इन लगातार शिकायतों पर निर्णय लेते हुए हमनें ये फैसला लिया है।

निर्णय के अंतर्गत बीडीसीए को निलंबित कर दिया गया है। भरतपुर डीसीए की खामियों को बताते हुए कहा गया कि बीडीसीए में एनओसी की भी पालना नहीं की गई। भरतपुर जिला क्रिकेट संघ लोकल खिलाड़ियों को नजरअंदाज कर रहा है और उसके बजाय बाहर के खिलाड़ियों को खिलाया जा रहा है। सचिव पर आरोप लगा कि वे बाहरी खिलाड़ी खिला रहे और स्थानीय खिलाड़ियों से रुपए मांग रहे थे।

खिलाड़ियों से पैसे मांगते हैं सचिव

खिलाड़ियों ने भरतपुर क्रिकेट संघ पर आरोप लगाते हुए बताया कि वहां के सचिव स्थानीय खिलाड़ियों से रुपए मांग रहे हैं। हमारे पास इसकी रिकॉर्डिंग मौजूद हैं। कमेटी ने तय किया कि किसी भी कीमत पर इस तरह के व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, इसलिए हमने काफी सोच-विचार कर बीडीसीए को सस्पेंड कर दिया।

भरतपुर जिला क्रिकेट संघ के निलंबित होने के बाद अब वहां की सारी क्रिकेट गतिविधियां आरसीए अपने स्तर पर चलाएगा। यादव ने आगे कहा कि हम उदयपुर स्टेडियम के लिए अदाणी ग्रुप सहित अन्य सहयोगियों से बात कर रहे हैं, क्योंकि पहले भी उन्होंने रुचि दिखाई थी। अभी वहां की जमीन फाइनल हुई है, अभी काफी काम करना है।

नागौर डीसीए में भी मिलीं वित्तीय खामियां

भरतपुर जिला क्रिकेट संघ के साथ नागौर जिला क्रिकेट संघ की मान्यता वापस लेने के मुद्दे पर कमेटी सदस्य धनंजय सिंह खींवसर ने कहा कि नागौर में भी हमें कई वित्तीय मामलों में गड़बड़ियां मिली हैं। जवाब मांगा जाने पर उन्होंने कोई भी जवाब सही तरीके नहीं दिया, बल्कि इसके विपरीत हम पर ही अनेक आक्षेप लगा दिए। नागौर जिला क्रिकेट संघ ने खेल को बीजेपी-कांग्रेस से जोड़ दिया। साथ ही एनडीसीए ने एडहॉक कमेटी के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।

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