नालंदा में फायर सेफ्टी ऑडिट में फेल संस्थानों को नोटिस:होटल, मॉल के साथ अस्पताल भी शामिल; शर्तों का पालन नहीं किया तो सील होंगे

नालंदा में फायर सेफ्टी ऑडिट में फेल संस्थानों को नोटिस:होटल, मॉल के साथ अस्पताल भी शामिल; शर्तों का पालन नहीं किया तो सील होंगे

नालंदा में होटल, रेस्टोरेंट, मॉल और निजी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी का मामला सामने आया है। इस लापरवाही पर फुल स्टॉप लगाने के लिए अग्निशमन विभाग ने कमर कस ली है और राज्य मुख्यालय के निर्देश पर विशेष फायर ऑडिट अभियान शुरू कर दिया है। विभाग ने इस विशेष अभियान के तहत महज चार दिनों के भीतर 102 संस्थानों के संचालकों को नोटिस थमा दिया है। विभाग ने सख्त लहजे में साफ कर दिया है कि तीन बार नोटिस मिलने के बाद भी यदि अग्निशमन शर्तों का अनुपालन नहीं किया गया, तो संबंधित संस्थानों को सील कर दिया जाएगा। तीनों अनुमंडलों में दो-दो यानी कुल छह विशेष टीमें गठित अभियान को प्रभावी ढंग से अंजाम तक पहुंचाने के लिए जिले के तीनों अनुमंडलों में दो-दो यानी कुल छह विशेष टीमें गठित की गई हैं। हर दिन संस्थानों की सघन जांच की जा रही है, जिसमें संचालकों की भारी लापरवाही उजागर हो रही है। हैरानी की बात यह है कि छोटे संस्थानों की बात तो दूर, बड़ी बहुमंजिला इमारतों में भी आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं पाए गए हैं। बिहारशरीफ के अनुमंडल अग्निशमन पदाधिकारी कृष्ण मुरारी प्रसाद, हिलसा के जयंत शर्मा और राजगीर के अभिषेक राज के नेतृत्व में अलग-अलग टीमों ने अपने-अपने क्षेत्रों में 40 से अधिक संस्थानों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान जहां भी कमियां मिलीं, मौके पर ही संचालकों को पहला नोटिस थमाकर जल्द से जल्द नियमों के पालन का अल्टीमेटम दिया गया। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि बड़े-बड़े अस्पताल, मॉल और होटल चलाने वाले कई संचालकों को फायर सेफ्टी के बारे में बुनियादी जानकारी तक नहीं है। जब टीम ने सुरक्षा उपकरणों के बाबत पूछताछ की, तो उनकी अनभिज्ञता देखकर अधिकारी भी असमंजस में पड़ गए। अग्निशमन विभाग द्वारा की जा रही इस जांच में ‘प्रपत्र श’ भरा जा रहा है, जिसमें कई अहम बिंदु शामिल हैं। जांच टीमें मुख्य रूप से भवन की ऊंचाई, मंजिलों व कमरों की संख्या, सीढ़ियों की संख्या व चौड़ाई, प्रवेश और निकास द्वार, आवागमन के रास्ते, वाहन पार्किंग, आपात स्थिति में भवन खाली करने के इंतजाम और एयर कंडीशनिंग सिस्टम की सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं। व्यावसायिक भवनों के लिए हर साल फायर एनओसी लेना अनिवार्य नियमानुसार सभी व्यावसायिक भवनों के लिए हर साल फायर एनओसी लेना अनिवार्य है, लेकिन कई संचालक एक बार एनओसी लेने के बाद उसे रिन्यू कराना भूल जाते हैं। अब विभाग की सख्ती और कार्रवाई के डर से ऐसे संचालक एनओसी के लिए अग्निशमन कार्यालयों का चक्कर काटने लगे हैं। पारदर्शी कार्रवाई के लिए विभाग ने नगर निगम से भी ऐसे व्यावसायिक संस्थानों की सूची मांगी है। विभागीय प्रावधानों के अनुसार, ऑडिट में कमियां मिलने पर संचालकों को अधिकतम तीन बार नोटिस दिया जाएगा। पहला नोटिस मिलते ही उन्हें सुरक्षा उपकरण लगाने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो दूसरा और फिर अंतिम नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद भी मनमानी जारी रहने पर संस्थान को सील करने की कार्रवाई तय है। हालांकि, जो संचालक सुधार के प्रति गंभीरता दिखाएंगे, उन्हें विभाग की ओर से कुछ दिनों की मोहलत दी जा सकती है। पिछले चार दिनों में जारी किए गए नोटिसों के आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक बिहारशरीफ अनुमंडल में सर्वाधिक 42, हिलसा अनुमंडल में 40 और राजगीर अनुमंडल में 20 संस्थानों को नोटिस जारी किया जा चुका है। नालंदा में होटल, रेस्टोरेंट, मॉल और निजी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी का मामला सामने आया है। इस लापरवाही पर फुल स्टॉप लगाने के लिए अग्निशमन विभाग ने कमर कस ली है और राज्य मुख्यालय के निर्देश पर विशेष फायर ऑडिट अभियान शुरू कर दिया है। विभाग ने इस विशेष अभियान के तहत महज चार दिनों के भीतर 102 संस्थानों के संचालकों को नोटिस थमा दिया है। विभाग ने सख्त लहजे में साफ कर दिया है कि तीन बार नोटिस मिलने के बाद भी यदि अग्निशमन शर्तों का अनुपालन नहीं किया गया, तो संबंधित संस्थानों को सील कर दिया जाएगा। तीनों अनुमंडलों में दो-दो यानी कुल छह विशेष टीमें गठित अभियान को प्रभावी ढंग से अंजाम तक पहुंचाने के लिए जिले के तीनों अनुमंडलों में दो-दो यानी कुल छह विशेष टीमें गठित की गई हैं। हर दिन संस्थानों की सघन जांच की जा रही है, जिसमें संचालकों की भारी लापरवाही उजागर हो रही है। हैरानी की बात यह है कि छोटे संस्थानों की बात तो दूर, बड़ी बहुमंजिला इमारतों में भी आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं पाए गए हैं। बिहारशरीफ के अनुमंडल अग्निशमन पदाधिकारी कृष्ण मुरारी प्रसाद, हिलसा के जयंत शर्मा और राजगीर के अभिषेक राज के नेतृत्व में अलग-अलग टीमों ने अपने-अपने क्षेत्रों में 40 से अधिक संस्थानों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान जहां भी कमियां मिलीं, मौके पर ही संचालकों को पहला नोटिस थमाकर जल्द से जल्द नियमों के पालन का अल्टीमेटम दिया गया। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि बड़े-बड़े अस्पताल, मॉल और होटल चलाने वाले कई संचालकों को फायर सेफ्टी के बारे में बुनियादी जानकारी तक नहीं है। जब टीम ने सुरक्षा उपकरणों के बाबत पूछताछ की, तो उनकी अनभिज्ञता देखकर अधिकारी भी असमंजस में पड़ गए। अग्निशमन विभाग द्वारा की जा रही इस जांच में ‘प्रपत्र श’ भरा जा रहा है, जिसमें कई अहम बिंदु शामिल हैं। जांच टीमें मुख्य रूप से भवन की ऊंचाई, मंजिलों व कमरों की संख्या, सीढ़ियों की संख्या व चौड़ाई, प्रवेश और निकास द्वार, आवागमन के रास्ते, वाहन पार्किंग, आपात स्थिति में भवन खाली करने के इंतजाम और एयर कंडीशनिंग सिस्टम की सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं। व्यावसायिक भवनों के लिए हर साल फायर एनओसी लेना अनिवार्य नियमानुसार सभी व्यावसायिक भवनों के लिए हर साल फायर एनओसी लेना अनिवार्य है, लेकिन कई संचालक एक बार एनओसी लेने के बाद उसे रिन्यू कराना भूल जाते हैं। अब विभाग की सख्ती और कार्रवाई के डर से ऐसे संचालक एनओसी के लिए अग्निशमन कार्यालयों का चक्कर काटने लगे हैं। पारदर्शी कार्रवाई के लिए विभाग ने नगर निगम से भी ऐसे व्यावसायिक संस्थानों की सूची मांगी है। विभागीय प्रावधानों के अनुसार, ऑडिट में कमियां मिलने पर संचालकों को अधिकतम तीन बार नोटिस दिया जाएगा। पहला नोटिस मिलते ही उन्हें सुरक्षा उपकरण लगाने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो दूसरा और फिर अंतिम नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद भी मनमानी जारी रहने पर संस्थान को सील करने की कार्रवाई तय है। हालांकि, जो संचालक सुधार के प्रति गंभीरता दिखाएंगे, उन्हें विभाग की ओर से कुछ दिनों की मोहलत दी जा सकती है। पिछले चार दिनों में जारी किए गए नोटिसों के आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक बिहारशरीफ अनुमंडल में सर्वाधिक 42, हिलसा अनुमंडल में 40 और राजगीर अनुमंडल में 20 संस्थानों को नोटिस जारी किया जा चुका है।  

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