लुधियाना साइबर फ्रॉड केस में आरोपी को राहत:सबूत पेश करने में असफल रही पुलिस, कोर्ट ने रिहा करने के दिए आदेश

लुधियाना साइबर फ्रॉड केस में आरोपी को राहत:सबूत पेश करने में असफल रही पुलिस, कोर्ट ने रिहा करने के दिए आदेश

लुधियाना के चर्चित और बड़े साइबर फ्रॉड मामलों में से एक की जांच को बड़ा झटका लगा है। स्थानीय अदालत ने साइबर क्राइम थाना में दर्ज अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी मामले के एक आरोपी को सबूतों के अभाव में न्यायिक हिरासत से रिहा करने के आदेश दिए हैं। एडिश्नल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट डेजी बंगड़ ने आरोपी कशिश जैन को रिहा करने का आदेश जारी किया। कशिश जैन को 15 मई को गिरफ्तार किया गया था। यह मामला एक कथित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड रैकेट से जुड़ा है, जिसमें अब तक 138 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जांच के दौरान ऐसा कोई ठोस साक्ष्य (सबूत) सामने नहीं आया, जिससे आरोपी को कथित साइबर ठगी से सीधे तौर पर जोड़ा जा सके। कोर्ट ने जांच रिकॉर्ड के साथ-साथ जांच अधिकारी के बयान को भी आधार बनाया। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह एक अवैध कॉल सेंटर संचालित कर रहा था, जहां फर्जी पहचान, वीओआईपी सॉफ्टवेयर और इंटरनेट सेवाओं का इस्तेमाल कर अमेरिका, कनाडा और भारत के लोगों को निशाना बनाया जाता था। आरोप है कि गिरोह लोगों की निजी जानकारी हासिल कर फर्जी दस्तावेज भेजता था, उन्हें डराता-धमकाता था और ऑनलाइन ट्रांसफर व वर्चुअल करेंसी के जरिए रकम हासिल कर हवाला नेटवर्क के माध्यम से आगे भेजता था। फोरेंसिक जांच में उपकरणों से नहीं मिला धोखाधड़ी या ठगी के डेटा
जांच के दौरान पुलिस ने कशिश जैन के कब्जे से तीन लैपटॉप, चार मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए थे। हालांकि फोरेंसिक जांच में इन उपकरणों से धोखाधड़ी या ठगी से जुड़ा कोई आपत्तिजनक डेटा नहीं मिला। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कशिश जैन दो विदेशी कंपनियों के लिए ऑनलाइन काम करता था, जिनका संबंध कॉफी मशीनों की बिक्री और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से था। उसके बैंक खातों की जांच में केवल वेतन संबंधी लेन-देन मिले और साइबर ठगी से जुड़ा कोई वित्तीय ट्रांजेक्शन सामने नहीं आया। साइबर क्राइम थाना के एसएचओ इंस्पेक्टर सतबीर सिंह ने अदालत में बयान दिया कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य (सबूत) या संदेह का कोई उचित आधार नहीं मिला है। इसी कारण उसे न्यायिक हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं बनता। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं विश्वास बंसल, विभव खन्ना, दीपक अटवाल, पुनीत भूषण, रवितेज सिंह और कमलजीत सिंह ने अदालत में दलील दी कि जांच के दौरान ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला जो कशिश जैन को कथित अवैध कॉल सेंटर संचालन या साइबर ठगी गतिविधियों से जोड़ सके। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश केवल कशिश जैन को न्यायिक हिरासत से रिहा करने तक सीमित है। उसे मामले से बरी नहीं किया गया है और एफआईआर में दर्ज कार्रवाई कानून के अनुसार आगे भी जारी रहेगी।

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