पूर्णिया विश्वविद्यालय में यूजी सेमेस्टर-5 के सैकड़ों छात्र परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित रह गए थे। छात्रों का आरोप था कि विश्वविद्यालय की तकनीकी खामी के कारण पोर्टल पर फॉर्म भरने में समस्या आ रही थी, जिससे बड़ी संख्या में विद्यार्थी निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना परीक्षा फॉर्म जमा नहीं कर सके। परीक्षा फॉर्म नहीं भर पाने से छात्रों के बीच भविष्य और परीक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। छात्रों की समस्या को देखते हुए सोशलिस्ट स्टूडेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। संगठन के प्रधान महासचिव चाहत यादव के नेतृत्व में सबसे पहले परीक्षा विभाग को आवेदन देकर फॉर्म भरने की अवधि बढ़ाने की मांग की गई। संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन को बताया कि तकनीकी कारणों से छात्रों का नुकसान हो रहा है और उन्हें अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए। आवेदन के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो SSAI के नेतृत्व में करीब 50 छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय परिसर में धरने पर बैठ गए। धरने के दौरान छात्रों ने अपनी समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा और परीक्षा फॉर्म भरने के लिए विशेष अवसर देने की मांग की। परीक्षा विभाग के सामने प्रदर्शन कर जताया विरोध धरने के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला, तो छात्रों ने परीक्षा विभाग के सामने प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान छात्रों ने कहा कि तकनीकी खामी की जिम्मेदारी छात्रों पर नहीं थोपी जा सकती और उन्हें परीक्षा से वंचित करना अन्याय होगा। छात्रों के लगातार आंदोलन और बढ़ते दबाव को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आया। मामले की गंभीरता को समझते हुए कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह ने SSAI प्रतिनिधिमंडल और छात्र-छात्राओं के साथ बैठक की। बैठक के दौरान SSAI के प्रधान महासचिव चाहत यादव ने कुलपति को विस्तार से बताया कि विश्वविद्यालय की तकनीकी खामियों के कारण बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित रह गए हैं। मांग की कि छात्रहित को ध्यान में रखते हुए तत्काल अतिरिक्त समय दिया जाए, ताकि कोई भी छात्र परीक्षा से वंचित न हो। छात्रों के आंदोलन और उनकी मांगों पर विचार करने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सकारात्मक निर्णय लिया। प्रशासन ने फॉर्म भरने से वंचित छात्रों को अतिरिक्त समय देने पर सहमति जताई। इस फैसले के बाद उन छात्रों को बड़ी राहत मिली जो तकनीकी कारणों से परीक्षा फॉर्म नहीं भर सके थे। एकजुटता और संघर्ष की जीत बताया छात्रों ने इसे अपनी एकजुटता और संघर्ष की जीत बताया। उनका कहना है कि अगर समय रहते आवाज नहीं उठाई जाती तो सैकड़ों छात्रों का एक शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो सकता था। SSAI के प्रधान महासचिव चाहत यादव ने कहा कि यह जीत केवल संगठन की नहीं बल्कि उन सभी छात्र-छात्राओं की है, जिन्होंने अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष किया। छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि SSAI आगे भी छात्रों की समस्याओं और अधिकारों को लेकर मजबूती से आवाज उठाता रहेगा तथा छात्रहित से जुड़े हर मुद्दे पर संघर्ष जारी रहेगा। आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और एकजुट होकर अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखा। छात्रों का कहना है कि संगठन और छात्र एकता की बदौलत ही विश्वविद्यालय प्रशासन को उनकी मांगों पर विचार करना पड़ा। आंदोलन के सफल होने के बाद छात्रों में खुशी का माहौल है। पूर्णिया विश्वविद्यालय में यूजी सेमेस्टर-5 के सैकड़ों छात्र परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित रह गए थे। छात्रों का आरोप था कि विश्वविद्यालय की तकनीकी खामी के कारण पोर्टल पर फॉर्म भरने में समस्या आ रही थी, जिससे बड़ी संख्या में विद्यार्थी निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना परीक्षा फॉर्म जमा नहीं कर सके। परीक्षा फॉर्म नहीं भर पाने से छात्रों के बीच भविष्य और परीक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। छात्रों की समस्या को देखते हुए सोशलिस्ट स्टूडेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। संगठन के प्रधान महासचिव चाहत यादव के नेतृत्व में सबसे पहले परीक्षा विभाग को आवेदन देकर फॉर्म भरने की अवधि बढ़ाने की मांग की गई। संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन को बताया कि तकनीकी कारणों से छात्रों का नुकसान हो रहा है और उन्हें अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए। आवेदन के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो SSAI के नेतृत्व में करीब 50 छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय परिसर में धरने पर बैठ गए। धरने के दौरान छात्रों ने अपनी समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा और परीक्षा फॉर्म भरने के लिए विशेष अवसर देने की मांग की। परीक्षा विभाग के सामने प्रदर्शन कर जताया विरोध धरने के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला, तो छात्रों ने परीक्षा विभाग के सामने प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान छात्रों ने कहा कि तकनीकी खामी की जिम्मेदारी छात्रों पर नहीं थोपी जा सकती और उन्हें परीक्षा से वंचित करना अन्याय होगा। छात्रों के लगातार आंदोलन और बढ़ते दबाव को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आया। मामले की गंभीरता को समझते हुए कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह ने SSAI प्रतिनिधिमंडल और छात्र-छात्राओं के साथ बैठक की। बैठक के दौरान SSAI के प्रधान महासचिव चाहत यादव ने कुलपति को विस्तार से बताया कि विश्वविद्यालय की तकनीकी खामियों के कारण बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित रह गए हैं। मांग की कि छात्रहित को ध्यान में रखते हुए तत्काल अतिरिक्त समय दिया जाए, ताकि कोई भी छात्र परीक्षा से वंचित न हो। छात्रों के आंदोलन और उनकी मांगों पर विचार करने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सकारात्मक निर्णय लिया। प्रशासन ने फॉर्म भरने से वंचित छात्रों को अतिरिक्त समय देने पर सहमति जताई। इस फैसले के बाद उन छात्रों को बड़ी राहत मिली जो तकनीकी कारणों से परीक्षा फॉर्म नहीं भर सके थे। एकजुटता और संघर्ष की जीत बताया छात्रों ने इसे अपनी एकजुटता और संघर्ष की जीत बताया। उनका कहना है कि अगर समय रहते आवाज नहीं उठाई जाती तो सैकड़ों छात्रों का एक शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो सकता था। SSAI के प्रधान महासचिव चाहत यादव ने कहा कि यह जीत केवल संगठन की नहीं बल्कि उन सभी छात्र-छात्राओं की है, जिन्होंने अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष किया। छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि SSAI आगे भी छात्रों की समस्याओं और अधिकारों को लेकर मजबूती से आवाज उठाता रहेगा तथा छात्रहित से जुड़े हर मुद्दे पर संघर्ष जारी रहेगा। आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और एकजुट होकर अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखा। छात्रों का कहना है कि संगठन और छात्र एकता की बदौलत ही विश्वविद्यालय प्रशासन को उनकी मांगों पर विचार करना पड़ा। आंदोलन के सफल होने के बाद छात्रों में खुशी का माहौल है।


