राजस्थान के जयपुर से आठ बाल मजदूरों को मुक्त कराकर उनके गृह जिले अररिया लाया गया है। बाल कल्याण समिति की टीम ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन बच्चों को आज उनके परिजनों को सौंप दिया। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दीपक वर्मा उर्फ रिंकू वर्मा ने बताया कि ये आठ बच्चे अररिया जिले के जोकीहाट प्रखंड के निवासी थे और बाल मजदूरी का शिकार हुए थे। गांव के कुछ लोगों द्वारा परिवार की सहमति से इन्हें जयपुर ले जाया गया था, जहाँ इनसे काम कराया जा रहा था। लगभग 5-6 महीने पहले श्रम विभाग की टीम ने जयपुर में छापेमारी कर इन बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया था। विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत उन्हें बाल गृह में रखा गया था। बच्चों को ले जाने में परिवार की सहमति थी
इसके बाद, 26 मई को इन बच्चों को बिहार सरकार के ‘अपना घर’, बेली रोड पटना लाया गया। वहाँ सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट तैयार करने के बाद बच्चों को अररिया जिला लाया गया, जहाँ आज उचित पहचान और सत्यापन के बाद उन्हें उनके अभिभावकों को सौंप दिया गया। दीपक वर्मा ने कहा कि बाल कल्याण समिति बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों को ले जाने में परिवार की सहमति थी, लेकिन बाल श्रम निषेध कानून का उल्लंघन होने के कारण उन्हें रेस्क्यू किया गया। पुनर्वास के लिए योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा
बाल अधिकारों के कार्यकर्ताओं ने इस रेस्क्यू को सराहनीय बताया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बाल मजदूरी की समस्या बनी हुई है, जहाँ कई परिवार आर्थिक तंगी के कारण बच्चों को दूर-दराज के शहरों में काम करने भेज देते हैं। ऐसे में जागरूकता और सख्त कानूनी कार्रवाई दोनों आवश्यक हैं। बाल कल्याण समिति ने आश्वासन दिया है कि बच्चों को शिक्षा और पुनर्वास के लिए योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। इस कार्रवाई में श्रम विभाग और बाल कल्याण समिति के बीच समन्वय देखा गया। अधिकारियों का कहना है कि बाल मजदूरी पर अंकुश लगाने के लिए नियमित छापेमारी और पुनर्वास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। राजस्थान के जयपुर से आठ बाल मजदूरों को मुक्त कराकर उनके गृह जिले अररिया लाया गया है। बाल कल्याण समिति की टीम ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन बच्चों को आज उनके परिजनों को सौंप दिया। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दीपक वर्मा उर्फ रिंकू वर्मा ने बताया कि ये आठ बच्चे अररिया जिले के जोकीहाट प्रखंड के निवासी थे और बाल मजदूरी का शिकार हुए थे। गांव के कुछ लोगों द्वारा परिवार की सहमति से इन्हें जयपुर ले जाया गया था, जहाँ इनसे काम कराया जा रहा था। लगभग 5-6 महीने पहले श्रम विभाग की टीम ने जयपुर में छापेमारी कर इन बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया था। विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत उन्हें बाल गृह में रखा गया था। बच्चों को ले जाने में परिवार की सहमति थी
इसके बाद, 26 मई को इन बच्चों को बिहार सरकार के ‘अपना घर’, बेली रोड पटना लाया गया। वहाँ सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट तैयार करने के बाद बच्चों को अररिया जिला लाया गया, जहाँ आज उचित पहचान और सत्यापन के बाद उन्हें उनके अभिभावकों को सौंप दिया गया। दीपक वर्मा ने कहा कि बाल कल्याण समिति बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों को ले जाने में परिवार की सहमति थी, लेकिन बाल श्रम निषेध कानून का उल्लंघन होने के कारण उन्हें रेस्क्यू किया गया। पुनर्वास के लिए योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा
बाल अधिकारों के कार्यकर्ताओं ने इस रेस्क्यू को सराहनीय बताया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बाल मजदूरी की समस्या बनी हुई है, जहाँ कई परिवार आर्थिक तंगी के कारण बच्चों को दूर-दराज के शहरों में काम करने भेज देते हैं। ऐसे में जागरूकता और सख्त कानूनी कार्रवाई दोनों आवश्यक हैं। बाल कल्याण समिति ने आश्वासन दिया है कि बच्चों को शिक्षा और पुनर्वास के लिए योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। इस कार्रवाई में श्रम विभाग और बाल कल्याण समिति के बीच समन्वय देखा गया। अधिकारियों का कहना है कि बाल मजदूरी पर अंकुश लगाने के लिए नियमित छापेमारी और पुनर्वास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।


