PoK : पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर में स्थानीय नागरिकों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सेना की किए जा रहे कथित अत्याचारों का मामला अब गरमाता जा रहा है। जम्मू-कश्मीर की जानी-मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता और कस्टम्स ऑफ टेरर विक्टिम्स इन कश्मीर की अध्यक्ष तस्लीमा अख्तर ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने वहां आम जनता के खिलाफ बल प्रयोग और हिंसक दमन की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे मानवता के खिलाफ बड़ा अपराध बताया है।
दमन के खिलाफ तुरंत अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए: अख्तर
तस्लीमा अख्तर ने जारी एक बयान में कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बेगुनाह लोगों की जिंदगी को खून के खेल में बदल दिया गया है। वहां की स्थिति बेहद चिंताजनक है और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों को इस दमन के खिलाफ तुरंत अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे संकट की इस घड़ी में पीड़ित नागरिकों के साथ खड़े हों और पाकिस्तान की जवाबदेही तय करें।
‘सच को दबाने के लिए इंटरनेट पर लगाया बैन’
मानवाधिकार कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी हुकूमत ने पाक अधिकृत कश्मीर के जमीनी हालात दुनिया से छिपाने के लिए वहां इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह से ठप कर दिया है। सरकार का मकसद स्थानीय लोगों की आवाज को दबाना और बाहर की दुनिया तक सूचनाओं के प्रसार को रोकना है। हालांकि, तस्लीमा ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि आज के आधुनिक तकनीकी युग में सूचनाओं को दबाना मुमकिन नहीं है। जम्मू-कश्मीर के लोग वैश्विक स्तर पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और सच्चाई को ज्यादा दिनों तक छिपाकर नहीं रखा जा सकता।
बुनियादी अधिकारों की मांग पर मिल रहा दमन
तस्लीमा अख्तर ने स्पष्ट किया कि पाक अधिकृत कश्मीर की जनता कोई नाजायज मांग नहीं कर रही है। वहां के नागरिक सिर्फ अपने मौलिक अधिकार मांग रहे हैं, जिनमें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, खाद्य सुरक्षा (राशन की उपलब्धता) और बुनियादी जनसुविधाएं शामिल हैं। लेकिन पाकिस्तानी प्रशासन उनकी इन जायज मांगों को पूरा करने के बजाय लाठियों और गोलियों से उनका दमन कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘हम इस संकट में पाक अधिकृत कश्मीर के भाई-बहनों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं।’
पत्रकारों और लोकतंत्र पर हमला
क्षेत्र में मीडिया की आजादी और राजनीतिक गतिविधियों पर लगे प्रतिबंधों पर निशाना साधते हुए अख्तर ने कहा कि वहां सच लिखने और बोलने वाले पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है, उन्हें जेलों में डाला जा रहा है। इसके साथ ही वहां चुनाव जैसी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को भी अनिश्चितता के भंवर में डाल दिया गया है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर से ऐसी कई वीडियो फुटेज सामने आई हैं, जिनमें नागरिकों की हत्या और उन पर किए जा रहे जुल्म साफ देखे जा सकते हैं। इस मुद्दे को लेकर न केवल घाटी में बल्कि लंदन समेत दुनिया के कई बड़े शहरों में पाकिस्तान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। (इनपुट: ANI)


