सप्ताह की शुरुआत शेयर बाजार निवेशकों के लिए काफी निराशाजनक रही है। सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों की संपत्ति में कुछ ही घंटों के भीतर पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी दर्ज की गई है। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया।
कारोबार शुरू होते ही प्रमुख इंडेक्स भारी दबाव में दिखाई दिए। बाजार में लगभग सभी बड़े शेयरों में बिकवाली का माहौल रहा। मौजूद जानकारी के अनुसार सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य घटकर करीब 456 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इससे निवेशकों की संपत्ति को बड़ा झटका लगा है।
गौरतलब है कि गिरावट केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। मध्यम और छोटे आकार की कंपनियों के शेयरों में भी व्यापक बिकवाली देखने को मिली है। इससे यह साफ संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
बाजार विशेषज्ञ वी. के. विजयकुमार का मानना है कि इस सप्ताह की शुरुआत कई नकारात्मक कारकों के साथ हुई है। उनके अनुसार पिछले सप्ताह अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों में आई बड़ी गिरावट का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है। दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे प्रौद्योगिकी आधारित बाजारों में तेज बिकवाली ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
बता दें कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने भी निवेशकों की चिंता को और गहरा किया है। इजराइल और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियों में वृद्धि के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। रिपोर्टों के अनुसार ईरान की ओर से मिसाइल हमलों और उसके बाद इजराइल की जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्रीय हालात को और संवेदनशील बना दिया। तेहरान, तबरीज और इस्फहान जैसे शहरों में विस्फोटों की खबरों ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है।
इस तनाव का सीधा असर ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। गौरतलब है कि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरती है। ऐसे में किसी भी प्रकार का व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।
वैश्विक बाजारों में भी कमजोरी का माहौल देखने को मिला है। दक्षिण कोरिया का प्रमुख सूचकांक शुरुआती कारोबार में करीब नौ प्रतिशत तक टूट गया, जबकि जापान, हांगकांग और चीन के बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई है। वहीं अमेरिका के शेयर बाजार में भी पिछले सप्ताह भारी दबाव देखने को मिला था।
मौजूद जानकारी के अनुसार अमेरिका से आए रोजगार संबंधी मजबूत आंकड़ों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। मई महीने में अपेक्षा से कहीं अधिक नई नौकरियां जुड़ने के बाद यह आशंका बढ़ी है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा। इसका असर उभरते बाजारों पर भी पड़ सकता है।
दूसरी ओर भारतीय मुद्रा में भी कमजोरी दर्ज की गई है। रुपया शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले फिसलकर 95.35 के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि पिछले सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक की नीतिगत घोषणा के बाद रुपये में मजबूती देखने को मिली थी, लेकिन वैश्विक दबावों के चलते वह बढ़त कायम नहीं रह सकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में वैश्विक माहौल, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। फिलहाल निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना हुआ है।


