सीवान कांग्रेस कार्यालय की जमीन विवाद पर कार्यकर्ताओं का विरोध:भू-माफियाओं पर कब्जे की साजिश का आरोप, संगठन मजबूत करने का संकल्प

सीवान कांग्रेस कार्यालय की जमीन विवाद पर कार्यकर्ताओं का विरोध:भू-माफियाओं पर कब्जे की साजिश का आरोप, संगठन मजबूत करने का संकल्प

सीवान जिला कांग्रेस कार्यालय में रविवार को कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला कांग्रेस कार्यालय की जमीन को कथित रूप से हड़पने की साजिश के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया गया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भू-माफियाओं की गिद्ध दृष्टि और कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से कांग्रेस कार्यालय की ऐतिहासिक जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। वक्ताओं ने कहा कि कांग्रेसजन अंतिम सांस तक इस जमीन की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ेंगे। पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत बनाने का अभियान
बैठक को संबोधित करते हुए कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सुशील कुमार ने संगठन सृजन अभियान की चर्चा करते हुए कहा कि पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत बनाने का अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के निर्देशानुसार 15 जून तक सभी प्रखंडों में ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत बनाने और जनसंपर्क बढ़ाने का आह्वान किया। महाराजगंज जिला कांग्रेस अध्यक्ष जवाहर भाई ने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा और उसके इतिहास को गांव-गांव तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से जनता के बीच जाकर संगठन को मजबूत करने और पार्टी की नीतियों का प्रचार-प्रसार करने का आह्वान किया। बैठक में कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष शिवधारी दुबे ने जिला कांग्रेस कार्यालय की जमीन के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। पूरे क्षेत्र में आंदोलन और संगठन का प्रमुख केंद्र रहा
उन्होंने कहा कि आजादी से पूर्व वर्ष 1938 में भूमिदाता गोकुल प्रसाद ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की उपस्थिति में तत्कालीन प्रांतीय कांग्रेस नेता एवं देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को यह भूमि प्रदान की थी। उन्होंने दावा किया कि यह स्थान स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पूरे क्षेत्र में आंदोलन और संगठन का प्रमुख केंद्र रहा है। पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. विधु शेखर पाण्डेय ने कहा कि वर्ष 1988 में डॉ. सीताराम वर्मा ने भी लिखित रूप से स्वीकार किया था कि उनके पितामह गोकुल प्रसाद ने उक्त भूमि कांग्रेस पार्टी को दान दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अब कुछ भू-माफिया इस ऐतिहासिक जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष को और तेज करेगी। सीवान जिला कांग्रेस कार्यालय में रविवार को कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला कांग्रेस कार्यालय की जमीन को कथित रूप से हड़पने की साजिश के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया गया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भू-माफियाओं की गिद्ध दृष्टि और कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से कांग्रेस कार्यालय की ऐतिहासिक जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। वक्ताओं ने कहा कि कांग्रेसजन अंतिम सांस तक इस जमीन की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ेंगे। पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत बनाने का अभियान
बैठक को संबोधित करते हुए कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सुशील कुमार ने संगठन सृजन अभियान की चर्चा करते हुए कहा कि पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत बनाने का अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के निर्देशानुसार 15 जून तक सभी प्रखंडों में ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत बनाने और जनसंपर्क बढ़ाने का आह्वान किया। महाराजगंज जिला कांग्रेस अध्यक्ष जवाहर भाई ने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा और उसके इतिहास को गांव-गांव तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से जनता के बीच जाकर संगठन को मजबूत करने और पार्टी की नीतियों का प्रचार-प्रसार करने का आह्वान किया। बैठक में कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष शिवधारी दुबे ने जिला कांग्रेस कार्यालय की जमीन के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। पूरे क्षेत्र में आंदोलन और संगठन का प्रमुख केंद्र रहा
उन्होंने कहा कि आजादी से पूर्व वर्ष 1938 में भूमिदाता गोकुल प्रसाद ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की उपस्थिति में तत्कालीन प्रांतीय कांग्रेस नेता एवं देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को यह भूमि प्रदान की थी। उन्होंने दावा किया कि यह स्थान स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पूरे क्षेत्र में आंदोलन और संगठन का प्रमुख केंद्र रहा है। पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. विधु शेखर पाण्डेय ने कहा कि वर्ष 1988 में डॉ. सीताराम वर्मा ने भी लिखित रूप से स्वीकार किया था कि उनके पितामह गोकुल प्रसाद ने उक्त भूमि कांग्रेस पार्टी को दान दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अब कुछ भू-माफिया इस ऐतिहासिक जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष को और तेज करेगी।  

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