कुशीनगर जिले में लगभग 250 किलोमीटर लंबी छोटी गंडक नदी में अवैध बालू खनन तेजी से जारी है। रामकोला थानाक्षेत्र के खोटही-मिश्रोली और कप्तानगंज क्षेत्र के सुअरहा-नरायनपुर घाट समेत कई स्थानों पर दिनदहाड़े नदी से बालू निकाली जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह खनन स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से हो रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, खनन माफिया ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य भारी वाहनों का इस्तेमाल कर खुलेआम नदी से बालू निकाल रहे हैं। दिन के समय निकाली गई बालू का भंडारण नदी किनारे किया जाता है, और रात में इसे विभिन्न बाजारों तथा निर्माण स्थलों तक पहुंचाया जाता है। निर्माण कार्यों में बालू की बढ़ती मांग के कारण यह अवैध कारोबार लंबे समय से फल-फूल रहा है। लगातार अवैध खनन के कारण नदी की प्राकृतिक धारा प्रभावित हो रही है, जिससे कई स्थानों पर तटों का कटान बढ़ गया है। इसके चलते नदी किनारे की उपजाऊ कृषि भूमि पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में नदी का रुख बदलने और कटान बढ़ने से कई किसानों की जमीन नदी में समा चुकी है, और अन्य खेतों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस अवैध खनन से सरकार को भारी राजस्व का नुकसान हो रहा है। उनकी शिकायत है कि बार-बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद, संबंधित विभागों द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती है, जिसके कारण अवैध खनन में लिप्त लोगों के हौसले बुलंद हैं। छोटी गंडक नदी महाराजगंज के तराई क्षेत्र से निकलकर कुशीनगर और देवरिया जिलों से होते हुए बिहार तक जाती है। इस अवैध कारोबार के आर्थिक पहलू को उजागर करते हुए, एक मजदूर ने बताया कि रामकोला के खोटही इलाके में नदी से एक ट्राली बालू निकालने में 1500 रुपये लगते हैं। इसके बाद, स्थानीय पुलिस और प्रशासन को उनका हिस्सा देने के बाद, बालू को गोरखपुर तक पहुंचाने में 3 से 4 हजार रुपये का खर्च आता है। गोरखपुर में यही बालू 7 से 10 हजार रुपये प्रति ट्राली बेची जाती है।


