US immigration bill: अमेरिका में एक रिपब्लिकन सांसद ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम में बदलाव का प्रस्ताव पेश किया है। इसका भारतीय टेक प्रोफेशनल्स पर असर पड़ सकता है। प्रस्तावित विधेयक में वीजा धारकों के लिए ग्रीन कार्ड का रास्ता बंद करने और विदेशी छात्रों के लिए ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) कार्यक्रम को समाप्त करने की मांग की गई है। टेक्सास से रिपब्लिकन सांसद चिप रॉय ने गुरुवार को यह विधेयक पेश किया। रॉय ने कहा कि लगभग चार दशक पुराने एच-1बी वीजा कार्यक्रम का दुरुपयोग हुआ है। अमेरिकी कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों को दरकिनार कर सस्ते विदेशी श्रमिकों को प्राथमिकता देती रही हैं। अब समय आ गया है कि लॉटरी आधारित व्यवस्था को समाप्त कर योग्यता पर आधारित प्रणाली लागू की जाए।
प्रस्तावित विधेयक में क्या हैं प्रमुख प्रावधान?
एच-1बी वीजा धारकों के लिए लागू ‘डुअल इंटेंट’ नीति खत्म करने का प्रस्ताव है। अभी ये वीजाधारक काम करते हुए ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। नए प्रस्ताव के अनुसार उन्हें यह साबित करना होगा कि उनका स्थायी निवास अमेरिका के बाहर है और वे उसे छोड़ने का इरादा नहीं रखते। ग्रीन कार्ड प्रक्रिया लंबित रहने के दौरान वीजा की अवधि बढ़ाने की मौजूदा व्यवस्था को भी खत्म करने का प्रस्ताव है। वीजा की अधिकतम अवधि छह वर्ष से घटाकर दो वर्ष करने का सुझाव दिया गया है।
अमी बेरा ने ट्रंप प्रशासन की तीखी आलोचना की
भारतीय-अमेरिकी सांसद अमी बेरा ने ट्रंप प्रशासन की नई आव्रजन नीति, खासकर ग्रीन कार्ड से जुड़े फैसले, की तीखी आलोचना की है। उन्होंने इसे परिवारों, कामगारों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह और अव्यवस्था पैदा करने वाला कदम बताया। अपने बयान में बेरा ने कहा, “मैं ट्रंप प्रशासन के उस विवादास्पद निर्णय का विरोध करता हूं, जिसके तहत कई छात्र, अस्थायी वीजा धारक और ग्रीन कार्ड आवेदकों को उनकी प्रक्रिया पूरी होने तक अमेरिका छोड़कर अपने देश लौटने के लिए कहा जा रहा है। यह नीति कानून का पालन करने वाले परिवारों, कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच अनावश्यक डर और अस्थिरता पैदा करती है।”
इस मुद्दे का असर संयुक्त राज्य अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेषकर एच-1बी वीजा धारकों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच व्यापक रूप से महसूस किए जाने की संभावना है। रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड के लंबित आवेदनों में भारतीय नागरिकों की संख्या सबसे अधिक है, और इनमें से कई आवेदक स्थिति समायोजन (स्टेटस एडजस्टमेंट) के प्रावधानों के सहारे अपने आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने तक अमेरिका में ही निवास करते हैं।


