सहरसा में महिलाओं की सुरक्षा और पुनर्वास को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन ने पहल की है। जिलाधिकारी दीपेश कुमार और उप विकास आयुक्त गौरव कुमार ने शनिवार शाम सदर अस्पताल परिसर का निरीक्षण किया। यहां के पुराने भवन में 50 बेड का वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) स्थापित किया जाएगा। जिलाधिकारी ने संवेदक को एक हफ्ते में सभी की चीजों को ठीक करने का निर्देश दिया है। जिलाधिकारी ने बताया कि वर्तमान में वन स्टॉप सेंटर एक अस्थायी भवन में संचालित हो रहा है। महिलाओं को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से इसे सदर अस्पताल के पुराने भवन में स्थानांतरित किया जाएगा। इस प्रस्तावित केंद्र में लगभग 50 बेड की व्यवस्था होगी, जो घरेलू हिंसा, लैंगिक उत्पीड़न या अन्य प्रकार की प्रताड़ना की शिकार महिलाओं को सुरक्षित आश्रय, परामर्श और आवश्यक सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराएगा। जिलाधिकारी ने जोर देकर कहा कि वन स्टॉप सेंटर महिलाओं के लिए राहत और पुनर्वास का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। प्रशासन की प्राथमिकता है कि यहां रहने वाली पीड़ित महिलाओं को सुरक्षित वातावरण के साथ चिकित्सा, कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श और अन्य आवश्यक सुविधाएं मिलें। निरीक्षण के दौरान सदर अस्पताल में चल रहे मरम्मत और जीर्णोद्धार कार्यों की भी समीक्षा की गई। कई स्थानों पर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और प्रगति में खामियां पाई गईं। इसे गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने सभी कार्यों को निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण तरीके से शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सरकारी भवनों के निर्माण और मरम्मत कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी कार्य समयबद्ध और गुणवत्ता मानकों के अनुसार पूरे होने चाहिए, ताकि आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे। प्रशासन की इस पहल से हिंसा की शिकार महिलाओं को भविष्य में बेहतर संरक्षण और सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। सहरसा में महिलाओं की सुरक्षा और पुनर्वास को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन ने पहल की है। जिलाधिकारी दीपेश कुमार और उप विकास आयुक्त गौरव कुमार ने शनिवार शाम सदर अस्पताल परिसर का निरीक्षण किया। यहां के पुराने भवन में 50 बेड का वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) स्थापित किया जाएगा। जिलाधिकारी ने संवेदक को एक हफ्ते में सभी की चीजों को ठीक करने का निर्देश दिया है। जिलाधिकारी ने बताया कि वर्तमान में वन स्टॉप सेंटर एक अस्थायी भवन में संचालित हो रहा है। महिलाओं को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से इसे सदर अस्पताल के पुराने भवन में स्थानांतरित किया जाएगा। इस प्रस्तावित केंद्र में लगभग 50 बेड की व्यवस्था होगी, जो घरेलू हिंसा, लैंगिक उत्पीड़न या अन्य प्रकार की प्रताड़ना की शिकार महिलाओं को सुरक्षित आश्रय, परामर्श और आवश्यक सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराएगा। जिलाधिकारी ने जोर देकर कहा कि वन स्टॉप सेंटर महिलाओं के लिए राहत और पुनर्वास का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। प्रशासन की प्राथमिकता है कि यहां रहने वाली पीड़ित महिलाओं को सुरक्षित वातावरण के साथ चिकित्सा, कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श और अन्य आवश्यक सुविधाएं मिलें। निरीक्षण के दौरान सदर अस्पताल में चल रहे मरम्मत और जीर्णोद्धार कार्यों की भी समीक्षा की गई। कई स्थानों पर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और प्रगति में खामियां पाई गईं। इसे गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने सभी कार्यों को निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण तरीके से शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सरकारी भवनों के निर्माण और मरम्मत कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी कार्य समयबद्ध और गुणवत्ता मानकों के अनुसार पूरे होने चाहिए, ताकि आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे। प्रशासन की इस पहल से हिंसा की शिकार महिलाओं को भविष्य में बेहतर संरक्षण और सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।


