Donald Trump Foreign Policy: डोनाल्ड ट्रंप ने एक फरवरी 2025 को दूसरी बार अमेरिकी के राष्ट्रपति पद की शपथ ली। उसके बाद उन्होंने खुद को शांतिदूत बताते हुए दुनियाभर में चल रहे अलग अलग संघर्षों को रोक शांति स्थापित करने का दावा किया। साथ ही खुद को शांति के लिए नोबल पुरस्कार के हकदार भी बताने लगे। लेकिन एक सच यह भी है कि उन्होंने अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद अब तक 15 देशों को धमकियां दी हैं, जबकि अमेरिकी सेना ने अब तक तीन महाद्वीपों के सात देशों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है। अभी दो देश क्यूबा और ग्रीनलैंड अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर हैं। इन संघर्षों में दुनियाभर में लोगों की मुश्किलों को बढ़ाया है। इसका सबसे बड़ा सबूत ईरान युद्ध है। जिसके कारण दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा की आपूर्ति पर ग्रहण लग गया है। इसे कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है।
किन देशों पर कब और क्यों किए हमले
एशियाः
- ईरान- जून 2025- फरवरी 2026- ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर निशाना, सत्ता परिवर्तन
- इराक – मार्च 2025- आईएसआईएस के खिलाफ
- सीरिया – दिसंबर 2025-आइएसआइएस के खिलाफ
- यमन – मार्च, अप्रेल और मई 2025- हूति विद्रोहियों के खिलाफ
अफ्रीका
- नाइजीरिया- दिसंबर 2025- आइएसआइएस के खिलाफ
- सोमालिया- फरवरी 2025- आइएसआइएस और अल शबाब के खिलाफ
दक्षिण अमरीका
- वेनेजुएला- जनवरी 2026- सत्ता परिवर्तन और तेल पर वर्चस्व
- कैरेबियाई सागर और पूर्वी प्रशांत सागर- अमरीका ने इस समुद्री क्षेत्र में ड्रग्स और नार्को टैरर के खिालऊ कार्रवाई में 207 लोग मारे जा चुके हैं।
नया निशाना- क्यूबा
- कैरेबियाई देश क्यूबा शीत युद्ध से ही अमेरिका की आंखों की किरकिरी रहा है। ट्रंप के आने के बाद वेनेजुएला की तरह ही क्यूबा को भी आर्थिक रूप से तोड़ने के लिए सैन्य नाकेबंदी का सामना करना पड़ रहा है। क्यूबा की तेल आपूर्ति रोकने के साथ ही यहां के राजनीतिक नेतृत्व को बदलने का प्रयास जारी है। गुरुवार को ही क्यूबा के राष्ट्रपति और उनके परिवार पर कई प्रतिबंध लगाए हैं।
- ग्रीनलैंड- अमेरिका का इरादा ग्रीनलैंड को खरीदने या इस पर कब्जा करने का है। इस बाबत वह यूरोपीय देशों से भी उलझ चुका है। जबकि यहां अमरीका के ही सहयोगी देश डेनमार्क का शासन है।


