लखनऊ विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने एक साथ 169 शिक्षकों के प्रमोशन को मंजूरी देकर नया रिकॉर्ड कायम किया है। इनमें 56 शिक्षकों को वरिष्ठ प्रोफेसर, 54 को प्रोफेसर, 15 को एसोसिएट प्रोफेसर और 44 को असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर पदोन्नत किया गया। विश्वविद्यालय के 105 वर्षों के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों को एक साथ पदोन्नति दी गई है। एक माह में पूरी हुई प्रक्रिया विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, प्रमोशन की पूरी प्रक्रिया एक माह के भीतर पूरी की गई। इसमें आईक्यूएसी निदेशक प्रो.विनोद सिंह और कुलसचिव डॉ.भावना मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कुलपति प्रो.जेपी सेनी ने लंबित मामलों का निस्तारण कर शिक्षकों को एक साथ पदोन्नति प्रदान की। वरिष्ठ प्रोफेसर पद पर हुए प्रमुख प्रमोशन वरिष्ठ प्रोफेसर पद पर प्रो.अरविंद मोहन, प्रो.पूनम टंडन, प्रो.राजीव मनोहर, प्रो.आरके सिंह, प्रो.अर्चना सिंह, प्रो.शीला मिश्रा, प्रो.विनोद सिंह, प्रो.राजेंद्र प्रसाद, प्रो.ध्रुवसेन सिंह, प्रो. पवन अग्रवाल, प्रो.वाईपी सिंह, प्रो.अनिल मिश्रा, प्रो.विवेक सहाय, प्रो.राजीव माहेश्वरी, प्रो.राम मिलन, प्रो.अमिता कन्नौजिया और प्रो.मोनिशा बनर्जी प्रमुख रूप से शामिल हैं। प्रोफेसर पद पर इन शिक्षकों को मिली पदोन्नति प्रोफेसर पद पर डॉ.विनीत वर्मा, डॉ.श्याम किशोर, डॉ.अनुपमा रस्तोगी, डॉ.अर्चना वर्मा, डॉ.ममता तिवारी, डॉ.राहुल पांडे, डॉ.रविकांत, डॉ.एनबीसी शुक्ला, डॉ.यूएस राजपूत, डॉ.रेखा श्रीवास्तव, डॉ.स्वर्णिमा बहादुर, डॉ.अजय प्रकाश, डॉ.ऋतु नारंग, डॉ.ए.के. सिंह, डॉ.मोहम्मद अनीस, डॉ.अशोक सिंह, डॉ.गुलाम नबी और डॉ.संगीता श्रीवास्तव को पदोन्नति दी गई है। प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय बना लखनऊ विश्वविद्यालय प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय बन गया है जहां एक साथ इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ प्रोफेसर पद पर प्रमोशन दिए गए हैं। शिक्षकों का कहना है कि इससे वर्षों से लंबित पदोन्नति मामलों का समाधान हुआ है और शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे संस्थान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।


